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इंसान को मारना आसान है, लेकिन उसके विचारों को नहीं
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इंसान को मारना आसान है, लेकिन उसके विचारों को नहीं। शहीद-ए-आजम भगत सिंह के ऐसे क्रांतिकारी विचार आज भी युवाओं में देश के लिए कुछ कर गुजरने की अलख जगाए हुए हैं। उनके जन्मदिवस पर युवाओं ने न केवल उनको याद किया, बल्कि उनके विचारों को भी अपने जहन में उतारा। शहीद भगत सिंह एक महान योद्धा होने के साथ-साथ एक लेखक, वक्ता व विचारक भी रहे हैं। युवाओं ने उन्हें याद करते हुए अमर उजाला के साथ विचार साझा किए।
सामाजिक कार्यकर्ता तिलक राज का कहना है कि शहीद भगत सिंह सिर्फ अंग्रेजी शासन से ही मुक्ति नहीं चाहते थे बल्कि वो समतावादी शासन देश के अंदर चाहते थे। उनकी इंकलाबी सोच और इस देश के प्रति इतना प्रेम था कि जिस दिन उनको फांसी दी गई भारत के हर नागरिक की आंखे नम थी। शहीद भगत सिंह के बलिदान को भारतवासी कभी नहीं भुला सकते।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा सुमन का कहना है कि आज शहीद-ए-आजम भगत सिंह को याद करते समय उनके विचारों की सार्थकता को भली-भांति समझा जा सकता है। उन्होंने शोषण मुक्त समाज का जो सपना देखा था वो कहीं धुंधला- सा नजर आ रहा है। आज के नेता अपने राजनीतिक मंसूबों को पूरा करने के लिए आम नागरिकों को धर्म व जाति के आधार पर बांट रहे है। देश की 90 प्रतिशत जनसंख्या को दरकिनार करते चंद पूंजीपतियों के हाथों देश के संसाधनों को बेचा जा रहा है।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से शोधार्थी राजीव ने कहा कि शहीद भगत सिंह से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। वे देशभक्त के साथ-साथ एक अच्छे वक्ता व विचारक भी थे। अपनी जवानी उन्होंने देश के नाम करके समाज के युवाओं को अपना कायल बना लिया।
डासफी के केयू प्रधान पिंटू सिंगला ने कहा कि सभी विद्यार्थियों को शहीद भगत सिंह के द्वारा लिखे लेख व पुस्तकें पढ़नी चाहिए तभी उन्हें नजदीक से जान सकते हैं। विद्यार्थियों को राजनीति में भाग लेना चाहिए या नही इस बारे में भगत सिंह के क्या विचार थे वो जानने के लिए हमें शहीद भगत सिंह के लेख विद्यार्थी और राजनीति को पढ़ना चाहिए।
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सामाजिक कार्यकर्ता तिलक राज का कहना है कि शहीद भगत सिंह सिर्फ अंग्रेजी शासन से ही मुक्ति नहीं चाहते थे बल्कि वो समतावादी शासन देश के अंदर चाहते थे। उनकी इंकलाबी सोच और इस देश के प्रति इतना प्रेम था कि जिस दिन उनको फांसी दी गई भारत के हर नागरिक की आंखे नम थी। शहीद भगत सिंह के बलिदान को भारतवासी कभी नहीं भुला सकते।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा सुमन का कहना है कि आज शहीद-ए-आजम भगत सिंह को याद करते समय उनके विचारों की सार्थकता को भली-भांति समझा जा सकता है। उन्होंने शोषण मुक्त समाज का जो सपना देखा था वो कहीं धुंधला- सा नजर आ रहा है। आज के नेता अपने राजनीतिक मंसूबों को पूरा करने के लिए आम नागरिकों को धर्म व जाति के आधार पर बांट रहे है। देश की 90 प्रतिशत जनसंख्या को दरकिनार करते चंद पूंजीपतियों के हाथों देश के संसाधनों को बेचा जा रहा है।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से शोधार्थी राजीव ने कहा कि शहीद भगत सिंह से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। वे देशभक्त के साथ-साथ एक अच्छे वक्ता व विचारक भी थे। अपनी जवानी उन्होंने देश के नाम करके समाज के युवाओं को अपना कायल बना लिया।
डासफी के केयू प्रधान पिंटू सिंगला ने कहा कि सभी विद्यार्थियों को शहीद भगत सिंह के द्वारा लिखे लेख व पुस्तकें पढ़नी चाहिए तभी उन्हें नजदीक से जान सकते हैं। विद्यार्थियों को राजनीति में भाग लेना चाहिए या नही इस बारे में भगत सिंह के क्या विचार थे वो जानने के लिए हमें शहीद भगत सिंह के लेख विद्यार्थी और राजनीति को पढ़ना चाहिए।