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Haryana: डॉ. अनेजा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड, ये प्राप्त करने वाले देश के उत्तरीय क्षेत्र से पहले वैज्ञानिक
Sat, 10 Dec 2022 07:53 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sat, 10 Dec 2022 07:53 PM IST
सार
माइक्रोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया की ओर सेमाइकोलॉजी में आजीवन योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया जाता है। माइकोलॉजी में कवक जैव विविधता, जैव प्रौद्योगिकी और औषधीय पौधों और सिंथेटिक यौगिकों के माध्यम से मानव रोगों का नियंत्रण है।
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प्रो. के आर अनेजा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
हरियाणा के कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के पूर्व प्रोफेसर एवं पूर्व अध्यक्ष प्रो. के आर अनेजा को माइकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया ने लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया है। वह देश के उत्तरी भाग से यह लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड पाने वाले पहले और एकमात्र वैज्ञानिक हैं। उन्हें यह अवार्ड मिलने से केयू परिसर में खुशी की लहर दौड़ गई है।
प्रो. अनेजा को यह सम्मान बिलासपुर, (छत्तीसगढ़) के केंद्रीय विश्वविद्यालय गुरु घासीदास में 28 नवंबर से 30 नवंबर के बीच प्रगति, संरक्षण और आईपीआर मुद्दे विषय पर आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव, डीन स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज, जीजीवी, माइक्रोलॉजिकल के अध्यक्ष, सचिव और उप सचिवों की ओर से प्रदान किया गया। इस अवसर पर माइकोेलॉजिस्ट, शिक्षक, एमएससी पीएचडी छात्र, माइकोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया व सम्मेलन के आयोजन सचिव आदि मौजूद रहे।
प्रो. अनेजा आईसी एफआरई, देहरादून (2020-2025) के विशेषज्ञ समूह के सदस्य और आईसीएआर की अनुसंधान सलाहकार समिति के सदस्य डीडब्ल्यूआर, जबलपुर, मध्य प्रदेश (2022-25) को यह अचीवमेंट अवार्ड ‘सतत भविष्य के लिए फफूंद विविधता’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रतिष्ठित माइकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया 2022 लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
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माइक्रोलॉजी में आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है अवाॅर्ड
माइक्रोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया की ओर सेमाइकोलॉजी में आजीवन योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया जाता है। माइकोलॉजी में कवक जैव विविधता, जैव प्रौद्योगिकी और औषधीय पौधों और सिंथेटिक यौगिकों के माध्यम से मानव रोगों का नियंत्रण है।
प्रो. अनेजा ने कई नई कवक प्रजातियों की पहचान की, जिसमें 40 के करीब देश शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सिन्नमुकर्जियोमाइसेस थर्मोफाइल, मिट्टी से पैदा होने वाला थर्मोफिलिक कवक, विज्ञान का एक नया जीनस है। प्रो. अनेजा नेे माइकोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी और विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित पुस्तकें लिखी हैं, जिसमें इंटरनेशनल (3) और राष्ट्रीय (12) प्रकाशकों द्वारा पुस्तकों और दो मैनुअल का संपादन उन्होेंने किया है।
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प्रो. अनेजा को यह सम्मान बिलासपुर, (छत्तीसगढ़) के केंद्रीय विश्वविद्यालय गुरु घासीदास में 28 नवंबर से 30 नवंबर के बीच प्रगति, संरक्षण और आईपीआर मुद्दे विषय पर आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव, डीन स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज, जीजीवी, माइक्रोलॉजिकल के अध्यक्ष, सचिव और उप सचिवों की ओर से प्रदान किया गया। इस अवसर पर माइकोेलॉजिस्ट, शिक्षक, एमएससी पीएचडी छात्र, माइकोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया व सम्मेलन के आयोजन सचिव आदि मौजूद रहे।
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प्रो. अनेजा आईसी एफआरई, देहरादून (2020-2025) के विशेषज्ञ समूह के सदस्य और आईसीएआर की अनुसंधान सलाहकार समिति के सदस्य डीडब्ल्यूआर, जबलपुर, मध्य प्रदेश (2022-25) को यह अचीवमेंट अवार्ड ‘सतत भविष्य के लिए फफूंद विविधता’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रतिष्ठित माइकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया 2022 लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
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माइक्रोलॉजी में आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है अवाॅर्ड
माइक्रोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया की ओर सेमाइकोलॉजी में आजीवन योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया जाता है। माइकोलॉजी में कवक जैव विविधता, जैव प्रौद्योगिकी और औषधीय पौधों और सिंथेटिक यौगिकों के माध्यम से मानव रोगों का नियंत्रण है।
प्रो. अनेजा ने कई नई कवक प्रजातियों की पहचान की, जिसमें 40 के करीब देश शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सिन्नमुकर्जियोमाइसेस थर्मोफाइल, मिट्टी से पैदा होने वाला थर्मोफिलिक कवक, विज्ञान का एक नया जीनस है। प्रो. अनेजा नेे माइकोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी और विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित पुस्तकें लिखी हैं, जिसमें इंटरनेशनल (3) और राष्ट्रीय (12) प्रकाशकों द्वारा पुस्तकों और दो मैनुअल का संपादन उन्होेंने किया है।