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बेसहारा गोवंश बन रहे हादसों का सबब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 13 Aug 2021 11:47 PM IST
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Destitute cows are becoming the cause of accidents
शहर की कॉलोनी, सड़कों और चौराहों पर बेसहारा गोवंशों की बढ़ती तादाद हादसों का कारण बन रही है। सड़क और गलियों में गोवंश बैठे रहते हैं, जिस कारण यहां से आने जाने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है और कई बार लोग घायल भी हो चुके हैं। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों आदि का निकलना भी मुश्किल हो गया है। लोगों ने कई बार इस समस्या को लेकर समाधान की मांग की है, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकल पाया। ऐसा तब है जब जिले में 25 से ज्यादा गोशालाएं हैं। नगर परिषद के अधिकारी रोजाना बेसहारा गोवंश को गोशालाओं को पहुंचाने के दावे भी कर रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके शहर की शायद की कोई कॉलोनी या सड़क ऐसी होगी जहां 10 से कम संख्या में गोवंश नजर आ जाए। अधिकारियों के पास इन बेसहारा गोवंश का कोई आंकड़ा नहीं है। इन दिनों सिर्फ शहर के अंदर 400 के करीब गोवंश सड़कों, खाल प्लाटों, गलियों, कॉलोनियों व सेक्टरों में डेरा जमाए हुए हैं। कई जगह तो पार्कों में भी इनको देखा जा सकता है। नगर परिषद द्वारा हर बार कहा जाता है कि गोवंश को सड़क पर बेसहारा छोड़ने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन आज तक न तो किसी की पहचान की गई है और न कोई कार्रवाई हो पाई है। अकेले गुलजारी नंदा मार्ग पर पिछले एक सप्ताह में इन गोवंश के कारण 10 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं।
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-रेलवे रोड पर लगभग 40
-पिपपी से थर्ड गेट तक करीब 100
-किरमिच रोड पर 50
-अमीन रोड पर लगभग 40
-कैथल रोड पर मिर्जापुर तक 100 के करीब
-लाडवा रोड पर मथाना तक 50
-सिरसला रोड पर लगभग 40
-सेक्टर 2,3,4,5,7,13,17 व 30 में 100 से ज्यादा
-केडीबी रोड पर 30
-उमरी रोड पर 33
-झांसा रोड पर 35
-थानेसर बाजार व साथ लगते मोहल्लों में 60 से ज्यादा
दीदार नगर वासी मनदीप ने बताया कि उनके गली में पिछले पांच दिनों में बेसहारा गोवंश की संख्या काफी बढ़ गई है। खाली प्लाट हमेशा इनसें भरे रहते हैं। सड़क पर भी इनका ही डेरा है। बहुत परेशानी झेलनी पड़ रही है। इनकी वजह से गलियों में गंदगी फैल चुकी है, वहीं सड़कों पर चलना भी बहुत खतरनाक साबित हो रहा है। नप इस नगर में भी कोई अभियान चलाकर हमारी समस्या का समाधान करे।
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राजेश ने कहा कि अगर प्रशासन इस बेसहारा गोवंश को गोशाला नहीं पहुंचा सकता तो कम से कम इनके गले रिफ्लेक्टर ही डलवा दें। यदि पशुओं के गले में रिफ्लेक्टर का पट्टा होगा तो रात को अंधेरे में वाहन चालक की दूर से इन पर नजर पड़ जाएगी, जिससे हादसों में कमी आएगी।
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नगर परिषद के चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर रूप रविंद्र बिश्नोई ने कहा कि सड़कों पर घूम रहे पशुओं को पकड़ने के लिए नप की चार टीमों में करीब 16 कर्मचारी दिनरात शहर को कैटल फ्री करने के लिए लगे हुए हैं। अब तक शहर में से करीब 80 पशुओं को पकड़कर गोशाला पहुंचाया जा चुका है। वहीं रोजाना सात से आठ पशुओं को पकड़ा जा रहा है। पकड़े गए पशुओं को फिलहाल बारना स्थित गौशाला में भेजा जा रहा है। जल्द ही शहर को कैटल फ्री कर दिया जाएगा।
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