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ल कडाउन में चौपट हुआ शू संचालकों का धंधा
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लॉकडाउन में काम धंधा चौपट होने के बाद दुकानदार दोबारा दुकानदारी जमाने में जुटे हुए हैं। उनको उम्मीद है धीरे-धीरे काम रफ्तार पकड़ लेगा। अमर उजाला अभियान खुले बाजार, दर्द बरकरार की कड़ी में बुधवार को जूता बाजार के हालात की जानकारी ली गई। जूता दुकानदारों का कहना है कि लॉकडाउन के कारण सेल कम होने के बाद प्रतिस्पर्धा ने बचत की कम दी। उनकी दुकानदारी को काफी नुकसान हुआ है। स्कूल, कॉलेज बंद होने से स्कूली जूते का पूरा स्टॉक दुकान में पड़ा है। अगले सीजन तक जूतों का डिजाइन बदल जाएगा, जिससे उनको आर्थिक नुकसान होगा। वहीं लॉकडाउन में दुकानें बंद रही और गर्मी और शादी के सीजन में बिकने वाले सैंडल, चप्पल व जूते की बिक्री भी बेहद कम हुई है। धीरे-धीरे उन्हें हालात से उभरने की उम्मीद है मगर कहीं न कहीं तीसरी लहर का भी डर बना हुआ है।
स्टॉक भरना पडा महंगा : विशाल
शर्मा शूज संचालक विशाल ने बताया कि उन्होंने गर्मी के सीजन का काफी स्टॉक दुकान में भर लिया था। अचानक हुए लॉकडाउन में दुकान बंद हो गई, जिससे बिक्री नहीं हुई। अगले सीजन तक काफी काफी सामान खराब हो जाएगा या फिर डिजाइन बदल जाएगा।
दूसरी लहर बनी कहर : रमेश
एससीआरडी संचालक रमेश ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर उन पर कहर बनकर टूटी है। कामकाज कम होने से घर चलाना मुश्किल हो रहा है। सीजन से पहले उन्होंने 8 लाख रुपये का स्टॉक दुकान में भरा था, जिसमें दो लाख का माल खराब हो गया।
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एक तो मंदी ऊपर से आर्थिक स्थिति नहीं चंगी : नरेश
नरेश ने बताया कि जब शुरू में लॉकडाउन खुला तो उन्हें लगा कि काम कुछ ठीक होगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं है। मंदी की मार और आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के चलते दुकान का किराया, बिजली का बिल देना मुश्किल हो रहा है। गर्मी के मौसम में लोग जूते भी कम खरीदते हैं।
शादी कार्यक्रम न होने का व्यवसाय पर पड़ा असर : रवि
राजेंद्रा शूज संचालक रवि ने बताया की शादी, पार्टी व अन्य कार्यक्रम कम होने और लोगों की संख्या निश्चित होने से भी कारोबार पर काफी असर पड़ा है। स्कूल व कॉलेज बंद हैं, जिस कारण स्कूली जूतों का स्टॉक नहीं बिका है। कुछ दिन में काम खुलने की उम्मीद है।
बाजार में भीड़, लेकिन ग्राहक नहीं : विजय
वेलकम शूज संचालक विजय ने बताया की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो चुकी है। बाजारों में लोगों की भीड़ तो काफी है मगर ग्राहक बेहद कम है। वहीं कंपीटीशन के कारण बचत बेहद कम रह गई है। उसके ऊपर दुकानदारी के खर्चे भी काफी है।
गर्मी के सीजन से लिया सीजन : राजेंद्र
पंजाबी शू मेकर संचालक राजेंद्र पठानिया ने बताया कि सर्दी का सीजन ठीक ठाक चला तो स्थिति काबू में आ जाएगी। अगर तीसरी लहर के कारण लॉकडाउन हुआ तो उनका पूरा धंधा ही चौपट हो जाएगा। उन्होंने सर्दी के सीजन के लिए सीमित मात्रा में ही स्टॉक का ऑर्डर दिया है।
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स्टॉक भरना पडा महंगा : विशाल
शर्मा शूज संचालक विशाल ने बताया कि उन्होंने गर्मी के सीजन का काफी स्टॉक दुकान में भर लिया था। अचानक हुए लॉकडाउन में दुकान बंद हो गई, जिससे बिक्री नहीं हुई। अगले सीजन तक काफी काफी सामान खराब हो जाएगा या फिर डिजाइन बदल जाएगा।
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दूसरी लहर बनी कहर : रमेश
एससीआरडी संचालक रमेश ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर उन पर कहर बनकर टूटी है। कामकाज कम होने से घर चलाना मुश्किल हो रहा है। सीजन से पहले उन्होंने 8 लाख रुपये का स्टॉक दुकान में भरा था, जिसमें दो लाख का माल खराब हो गया।
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एक तो मंदी ऊपर से आर्थिक स्थिति नहीं चंगी : नरेश
नरेश ने बताया कि जब शुरू में लॉकडाउन खुला तो उन्हें लगा कि काम कुछ ठीक होगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं है। मंदी की मार और आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के चलते दुकान का किराया, बिजली का बिल देना मुश्किल हो रहा है। गर्मी के मौसम में लोग जूते भी कम खरीदते हैं।
शादी कार्यक्रम न होने का व्यवसाय पर पड़ा असर : रवि
राजेंद्रा शूज संचालक रवि ने बताया की शादी, पार्टी व अन्य कार्यक्रम कम होने और लोगों की संख्या निश्चित होने से भी कारोबार पर काफी असर पड़ा है। स्कूल व कॉलेज बंद हैं, जिस कारण स्कूली जूतों का स्टॉक नहीं बिका है। कुछ दिन में काम खुलने की उम्मीद है।
बाजार में भीड़, लेकिन ग्राहक नहीं : विजय
वेलकम शूज संचालक विजय ने बताया की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो चुकी है। बाजारों में लोगों की भीड़ तो काफी है मगर ग्राहक बेहद कम है। वहीं कंपीटीशन के कारण बचत बेहद कम रह गई है। उसके ऊपर दुकानदारी के खर्चे भी काफी है।
गर्मी के सीजन से लिया सीजन : राजेंद्र
पंजाबी शू मेकर संचालक राजेंद्र पठानिया ने बताया कि सर्दी का सीजन ठीक ठाक चला तो स्थिति काबू में आ जाएगी। अगर तीसरी लहर के कारण लॉकडाउन हुआ तो उनका पूरा धंधा ही चौपट हो जाएगा। उन्होंने सर्दी के सीजन के लिए सीमित मात्रा में ही स्टॉक का ऑर्डर दिया है।