कारागार के बाथरुम में फांसी के फंदे में लटकी मिली जेल बंदी की लाश

Rohtak Bureau Updated Sun, 10 Sep 2017 12:04 AM IST
फोटो-23 से 27 और 29
-चोरी के प्रयास के मामले में जेल में बंद था 24 वर्षीय प्रदीप उर्फ काका
-परिजन बोले, सात सितंबर को जांच अधिकारी पेश होता तो जिंदा होता काका
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
जिला जेल के बाथरूम में फांसी के फंदे से लटकी एक बंदी की लाश मिली। जेल प्रशासन ने आनन-फानन में उच्चाधिकारियों और सीजेएम को घटना की जानकारी दी। रात को उच्चाधिकारियों की निगरानी में घटनास्थल की वीडियोग्राफी कराई गई। इसके बाद शव को फांसी के फंदे से निकालकर लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया। यहां मृतक के पोस्टमार्टम के दौरान भी वीडियोग्राफी कराई गई। इधर पुलिस जांच में जुटी है कि यह मामला आत्महत्या का है या कुछ और। हालांकि जेल प्रशासन इस घटना को आत्महत्या का मान रहा है और मृतक जेल बंदी के परिवार वाले भी इससे सहमत दिख रहे हैं। उन्होंने आत्महत्या का कारण जांच अधिकारी के दो बार पेशी पर न पहुंचने को बताया है।
गौरतलब है कि जिला कुरुक्षेत्र के गांव मोरथली वासी 24 वर्षीय प्रदीप कुमार उर्फ काका पुत्र सतपाल सिंह पर डेढ़ साल पहले पिहोवा की सिटी पुलिस चौकी ने एक घर में चोरी का प्रयास करने के मामले में कार्रवाई कराई थी। प्रदीप के खिलाफ थाना पिहोवा में चोरी के प्रयास का मामला दर्ज था। पुलिस ने इस मामले में उसके गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था,लेकिन जेल में कुछ दिन रहने के बाद उसे जमानत मिल गई थी। बताया गया है कि जमानत के बाद वह कोर्ट में पेश नहीं हुआ और तीन माह पहले उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था और तब से वह जेल में बंद था।
मृतक प्रदीप के चचेरे भाई राजू ने बताया गया है कि जिस घर में चोरी के प्रयास का मामला प्रदीप के खिलाफ दर्ज किया गया था, उस घर के मालिक ने कोर्ट में लिख कर दिया था कि वह इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं चाहते और ना ही उसका कोई नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि उक्त मामले के जांच अधिकारी पिहोवा सिटी पुलिस चौकी के जांच अधिकारी बलवंत सिंह पेशी नहीं पहुंच रहे थे। सात सितंबर 2017 को तीसरी बार पेशी पर नहीं पहुंचे पर रीडर और वकील ने भी जांच अधिकारी को फोन किया था, लेकिन उसने इस बार भी नहीं आने का बहाना बना लिया। मृतक के परिजनों का आरोप है कि अगर जांच अधिकारी पेशी पर पहुंच जाता तो 8 सितंबर की रात को शायद प्रदीप आत्महत्या करने के लिये विवश नहीं होता।

जेल में नहीं थी परेशानी : डिप्टी सुपरिंटेंडेंट, जेल
जेल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट यश कुमार ने बताया कि बंदी को जेल में किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं थी। जेल में डेरा सच्चा सौदा के काफी संख्या में बंदी हैं, जिन्हें रोजाना की तरह शुक्रवार को भी प्रार्थना के लिए बोला गया था। उन्होंने बताया कि पेशी पर किसी गवाह को आना था, लेकिन उसके नहीं आने से प्रदीप परेशान था। उन्होंने बताया रात को उन्हें सूचना मिली कि प्रदीप कुमार जेल के बाथरूम में फांसी का फंदा डालकर सुसाइड कर चुका है। इसके बाद वह तुरंत मौके पर पहुंचे और उच्चाधिकारियों को घटना से अवगत कराया। बताया गया है कि घटना की सूचना मिलने के बाद इसकी वीडियोग्राफी कराई गई और रात को ही सीजेएम नताशा शर्मा को अवगत कराया गया। इसके बाद उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया।

बंदी के पिता का आरोप
मृतक का पिता सतपाल ने बताया कि जेल प्रशासन ने उन्हें रात ही घटना की सूचना दी थी। इस घटना की जानकारी मिलते ही वह कुरुक्षेत्र पहुंचे थे। यहां पहुंचने पर उन्हें घटना के बाद पुलिस द्वारा कराई गई वीडियोग्राफी दिखाई गई,जबकि उनके पुत्र ने जिस जगह पर सुसाइड किया,उन्हें उस घटनास्थल पर नहीं ले जाया गया। इधर प्रदीप के पोस्टमार्टम के दौरान उसके परिवार के सदस्य व रिश्तेदार पहुंचे हुए थे। यहां इन्होंने जांच अधिकारी के पेशी पर अदालत में नहीं पहुंचने का भी आरोप लगाया।

7 सितंबर को होनी थी जमानत
मृतक प्रदीप उर्फ काका (करीब 24 वर्ष) के चाचा रमेश ने बताया कि प्रदीप ने जमानत के लिए न्यायालय से गुहार लगाई थी और 7 सितंबर को जमानत के लिए उसे ले जाया गया था। यहां से उसके पिता उससे मिलने के लिए गए थे। तब वह बहुत खुश लग रहा था। लेकिन उसका केस संभाल रहे अधिकारी किसी कारण न्यायालय नहीं पहुंच सका और उसकी जमानत नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि चोरी के एक केस में वह शक के बिनाह पर पिछले तीन महीने से जेल में बंद था। 7 तारीख को अगर उसकी जमानत हो गई होती तो शायद आज वह जिंदा होता।

डेढ़ साल पहले गर्भावस्था में पत्नी की हुई थी मौत
रमेश ने बताया कि प्रदीप शादीशुदा था। करीब डेढ़ साल पहले गर्भावस्था के दौरान उसकी पत्नी की मौत हो गई थी। इसके बाद से वह अकेला ही रहने लगा था और मजदूरी करके अपना गुजारा चला रहा था। उन्होंने बताया कि प्रदीप अपने भाई बहनों में तीसरे नंबर पर था।
जेल में पहले भी हो चुके हैं मामले
जून 2015 में भी कुरुक्षेत्र जेल में पिहोवा वासी एक बंदी ने नस काट ली थी। हालांकि तब जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाये गए थे। इस में जेल बंदी के परिजनों ने कुरुक्षेत्र लघु सचिवालय पर प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद अप्रैल 2016 में पुलिस कर्मचारियों से परेशान एक गृहरक्षी विभाग के एक जवान में आत्महत्या की थी। पिपली थाने में ड्यूटी पर तैनात इस होमगार्ड ने पुलिस कर्मचारियों से परेशान होकर कुरुक्षेत्र महिला थाना के सामने जहर खाकर आत्महत्या की थी।

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