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Kurukshetra News: ब्रह्मसरोवर तट पर शिल्प और सरस मेला शुरू, शंखनाद के साथ राज्यपाल ने किया उद्घाटन
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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के तहत पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर शिल्प व सरस मेला वीरवार को शुरू हुआ, जिसका उद्घाटन शंखनाद की ध्वनि व मंत्रोच्चार के बीच राज्यपाल बंडारु दत्तात्रेय ने किया। इस सरस और शिल्प मेले के शुभारंभ के साथ ही प्रदेश के 24 राज्यों से आए कलाकारों और शिल्पकारों में खुशी की लहर दौड़ गई तो वहीं कलाकारों ने उद्घाटन समारोह के दौरान अपने-अपने प्रदेश की संस्कृति की छटा बिखेरी, जिसे देख पर्यटक भी गदगद हो उठे। मेले के साथ राज्यपाल ने मीडिया सेंटर का भी उद्घाटन किया। राज्यपाल ने श्रीमद्भगवद गीता की प्रति पर भी पुष्प अर्पित किए तथा शिल्प व सरस मेले का अवलोकन किया।
राज्यपाल का इस दौरान विभिन्न प्रदेशों से आए कलाकारों ने अपनी लोक व नृत्य कला के साथ स्वागत किया। इस मौके पर राज्यपाल ने ढोल-नगाड़ा पार्टी, विभिन्न करतब व नृत्य कर रहे कलाकार और बीन पार्टी से बातचीत की। इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकला को देखकर शिल्पकारों के साथ अपने मन की भावनाओं को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि यह हम सभी के लिए ऐतिहासिक अवसर है। इस शिल्प और सरस मेले की भव्य शुरूआत शिल्पकारों के लिए सार्थक होगी। इस ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर दूर-दराज से आने वाले लाखों पर्यटकों के लिए एक मंच पर 24 राज्यों के 250 से ज्यादा शिल्पकारों और सरस मेले में पहुंचे स्वयं सहायता समूह के सदस्यों की कला देखने को मिलेगी। यह दृश्य पर्यटकों के लिए अद्भुत और अनोखा होगा।
उन्होंने कहा कि महोत्सव का आयोजन सात से 24 दिसंबर तक किया जाएगा और मुख्य कार्यक्रम पहली बार आठ दिनों के होंगे, जो 17 से 24 दिसंबर तक चलेंगे। इस महोत्सव में संत सम्मेलन, दीपोत्सव, गीता सेमिनार, वैश्विक गीता पाठ मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे। कार्यक्रमों से युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी और प्राचीन संस्कृति से आत्मसात होने का अनोखा अवसर भी मिलेगा। विधायक सुभाष सुधा ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयास से छोटे से महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। अब यह महोत्सव आमजन का महोत्सव बन चुका है। इस महोत्सव में लाखों लोग पहुंचते है।
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गीता का संदेश व कुरुक्षेत्र आज भी उतना ही उपयोगी : राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि हजारों साल पहले कुरुक्षेत्र की भूमि पर भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। यह गीता ज्ञान उस वक्त जितना उपयोगी था, आज भी उतना ही उपयोगी है। कुरुक्षेत्र भी उस वक्त जितना उपयोगी था, आज भी उतना ही उपयोगी है। गीता का यह संदेश युगों-युगों तक याद रखा जाएगा। राज्यपाल ने कहा कि गीता महोत्सव न केवल कुरुक्षेत्र की भूमि पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर भी मनाया जा रहा है। देश और विदेश से लाखों की संख्या में लोग महोत्सव में पहुंचेंगे। इसके साथ-साथ विभिन्न प्रांतों से कलाकार, शिल्पकार, कारीगर व सामान बेचने वाले स्वयं सहायता समूह महोत्सव में पहुंचे हैं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है और लोगों को हमारी संस्कृति जानने का अवसर भी मिलता है। वहीं मीडिया सेंटर के उद्घाटन के दौरान राज्यपाल ने कहा कि कुरुक्षेत्र एक आध्यात्मिक, धार्मिक और शिक्षा का केंद्र है। इस महान भूमि की धूल को मानव अपने माथे पर लगाकर स्वयं को धन्य मानता है। इसे भारत की प्राचीन संस्कृति का उद्गम स्थल भी कहा जाता है।
इस अवसर पर थानेसर के विधायक सुभाष सुधा, अंबाला मंडल आयुक्त रेणू फुलिया, उपायुक्त शांतनु शर्मा, पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र भौरिया, एडीसी एवं केडीबी सीईओ अखिल पिलानी, केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के चेयरमैन मदन मोहन छाबड़ा, केडीबी सदस्य अशोक रोसा, डाॅ. ऋषिपाल मथाना भी मौजूद रहे।
मातृ भूमि की रक्षा और अखंडता के लिए भारतीय सेना ने दी है कुर्बानियां : बंडारु
राज्यपाल बंडारु दत्तात्रेय ने कहा कि भारतीय सशस्त्र सेनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका से देश का हर नागरिक परिचित है। हमारी सशस्त्र सेनाओं का गौरवपूर्ण इतिहास रहा है, जिन्होंने हमारे देश की सेवा करते हुए जल, थल, वायु सेनाओं में जो कुर्बानियां दी हैं। वे मीडिया सेंटर में सशस्त्र सेना झंडा दिवस के उपलक्ष्य में बातचीत कर रहे थे। इससे पहले सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण विभाग की तरफ से राज्यपाल बंडारु दत्तात्रेय को सूबेदार आरआर शर्मा और रविंद्र कौशिक ने सशस्त्र सेना झंडा दिवस का बैज लगाया। राज्यपाल ने कहा कि सशस्त्र सेनाएं शांति के समय में भी हमारे राष्ट्र की रक्षा करतीं हैं। साथ ही प्राकृतिक आपदाओं के दौरान नागरिकों की मदद में वे जो महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं उससे भी हम परिचित हैं। अपने वीर जवानों के लिए हमारा यह कर्तव्य बनता है कि जब वे दूर नव, समुंदर या थल सीमाओं की रक्षा कर रहे हों तो हम उनके परिवारों की देखभाल करें ।
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राज्यपाल का इस दौरान विभिन्न प्रदेशों से आए कलाकारों ने अपनी लोक व नृत्य कला के साथ स्वागत किया। इस मौके पर राज्यपाल ने ढोल-नगाड़ा पार्टी, विभिन्न करतब व नृत्य कर रहे कलाकार और बीन पार्टी से बातचीत की। इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकला को देखकर शिल्पकारों के साथ अपने मन की भावनाओं को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि यह हम सभी के लिए ऐतिहासिक अवसर है। इस शिल्प और सरस मेले की भव्य शुरूआत शिल्पकारों के लिए सार्थक होगी। इस ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर दूर-दराज से आने वाले लाखों पर्यटकों के लिए एक मंच पर 24 राज्यों के 250 से ज्यादा शिल्पकारों और सरस मेले में पहुंचे स्वयं सहायता समूह के सदस्यों की कला देखने को मिलेगी। यह दृश्य पर्यटकों के लिए अद्भुत और अनोखा होगा।
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उन्होंने कहा कि महोत्सव का आयोजन सात से 24 दिसंबर तक किया जाएगा और मुख्य कार्यक्रम पहली बार आठ दिनों के होंगे, जो 17 से 24 दिसंबर तक चलेंगे। इस महोत्सव में संत सम्मेलन, दीपोत्सव, गीता सेमिनार, वैश्विक गीता पाठ मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे। कार्यक्रमों से युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी और प्राचीन संस्कृति से आत्मसात होने का अनोखा अवसर भी मिलेगा। विधायक सुभाष सुधा ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयास से छोटे से महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। अब यह महोत्सव आमजन का महोत्सव बन चुका है। इस महोत्सव में लाखों लोग पहुंचते है।
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गीता का संदेश व कुरुक्षेत्र आज भी उतना ही उपयोगी : राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि हजारों साल पहले कुरुक्षेत्र की भूमि पर भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। यह गीता ज्ञान उस वक्त जितना उपयोगी था, आज भी उतना ही उपयोगी है। कुरुक्षेत्र भी उस वक्त जितना उपयोगी था, आज भी उतना ही उपयोगी है। गीता का यह संदेश युगों-युगों तक याद रखा जाएगा। राज्यपाल ने कहा कि गीता महोत्सव न केवल कुरुक्षेत्र की भूमि पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर भी मनाया जा रहा है। देश और विदेश से लाखों की संख्या में लोग महोत्सव में पहुंचेंगे। इसके साथ-साथ विभिन्न प्रांतों से कलाकार, शिल्पकार, कारीगर व सामान बेचने वाले स्वयं सहायता समूह महोत्सव में पहुंचे हैं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है और लोगों को हमारी संस्कृति जानने का अवसर भी मिलता है। वहीं मीडिया सेंटर के उद्घाटन के दौरान राज्यपाल ने कहा कि कुरुक्षेत्र एक आध्यात्मिक, धार्मिक और शिक्षा का केंद्र है। इस महान भूमि की धूल को मानव अपने माथे पर लगाकर स्वयं को धन्य मानता है। इसे भारत की प्राचीन संस्कृति का उद्गम स्थल भी कहा जाता है।
इस अवसर पर थानेसर के विधायक सुभाष सुधा, अंबाला मंडल आयुक्त रेणू फुलिया, उपायुक्त शांतनु शर्मा, पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र भौरिया, एडीसी एवं केडीबी सीईओ अखिल पिलानी, केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के चेयरमैन मदन मोहन छाबड़ा, केडीबी सदस्य अशोक रोसा, डाॅ. ऋषिपाल मथाना भी मौजूद रहे।
मातृ भूमि की रक्षा और अखंडता के लिए भारतीय सेना ने दी है कुर्बानियां : बंडारु
राज्यपाल बंडारु दत्तात्रेय ने कहा कि भारतीय सशस्त्र सेनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका से देश का हर नागरिक परिचित है। हमारी सशस्त्र सेनाओं का गौरवपूर्ण इतिहास रहा है, जिन्होंने हमारे देश की सेवा करते हुए जल, थल, वायु सेनाओं में जो कुर्बानियां दी हैं। वे मीडिया सेंटर में सशस्त्र सेना झंडा दिवस के उपलक्ष्य में बातचीत कर रहे थे। इससे पहले सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण विभाग की तरफ से राज्यपाल बंडारु दत्तात्रेय को सूबेदार आरआर शर्मा और रविंद्र कौशिक ने सशस्त्र सेना झंडा दिवस का बैज लगाया। राज्यपाल ने कहा कि सशस्त्र सेनाएं शांति के समय में भी हमारे राष्ट्र की रक्षा करतीं हैं। साथ ही प्राकृतिक आपदाओं के दौरान नागरिकों की मदद में वे जो महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं उससे भी हम परिचित हैं। अपने वीर जवानों के लिए हमारा यह कर्तव्य बनता है कि जब वे दूर नव, समुंदर या थल सीमाओं की रक्षा कर रहे हों तो हम उनके परिवारों की देखभाल करें ।