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Kurukshetra News: सन्निहित सरोवर पर पूजा, पिंडदान के लिए बनेगा ऑनलाइन पोर्टल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Jun 2023 02:20 AM IST
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फोटो 41
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सन्निहित सरोवर पर पूजा, पिंडदान के लिए बनेगा ऑनलाइन पोर्टल
- इस पर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड व श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के साथ मिलकर किया जागा काम
- श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है सन्निहित सरोवर
संवाद न्यूज एजेंसी

कुरुक्षेत्र। विश्व प्रसिद्ध सन्निहित सरोवर के प्रति देश-विदेश के लोगों की गहरी आस्था रही है। यहां अब पिंडदान व पूजा अर्चना के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाएगा। जिसके लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड व श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के साथ मिलकर काम करेगा।
सन्निहित सरोवर पर श्रद्धालु तीर्थाटन की दृष्टि से आते हैं । ऐसे में इस तीर्थ के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण में केडीबी कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहता। केडीबी के नवनियुक्त मानद सचिव उपेंद्र सिंघल ने सबसे पहले सन्निहित सरोवर की कायाकल्प करने को लेकर योजना तैयार की है। इसके साथ ही यह सरोवर एकाएक ही फिर चर्चा में आ गया है।
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सन्निहित सरोवर में भगवान विष्णु का स्थाई निवास माना जाता है। यहां हर पाप से मुक्ति मिलती है। पवित्र सन्निहित सरोवर विश्व प्रसिद्ध ही नहीं बल्कि तीनों लोको में पूजनीय तीर्थों में से एक पावन तीर्थ है इसकी महिमा का बखान महाभारत,पद्मपुराण ,अग्निपुराण,ब्रह्म पुराण,वामन पुराण आदि अनेक ग्रन्थों में मिलता है ।
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प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित रामराज कौशिक की मानें तो यहां भगवान विष्णु का स्थायी निवास है। वामन पुराण के अनुसार सन्निहित सरोवर रंतुक यक्ष पिपली से लेकर ओजस तीर्थ से होते हुए पावन और चतुर्मुख तक विस्तृत था। धीरे-धीरे इसके आकर में परिवर्तन आता रहा, जिससे कलयुग में यह विश्वेश्वर से अस्थिपुर तक ओघवती तक सीमित हो गया। इस तीर्थ के किनारे भगवान शिव
ने स्वयं शिवलिंग की स्थापना की थी, जिन्हें स्थाणु महाराज कहा जाता है। सन्निहित सरोवर कई योजन में फैला हुआ था।
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पंडित रामराज कौशिक के अनुसार यही वो परम पवित्र सरोवर है, जिसके तट पर इंद्र व अन्य देवताओं की याचना पर देव कार्य हेतु महर्षि दधिची ने अपनी अस्थियां दान कर दी थी। जिससे वज्र तैयार कर वृत्रासुर नामक राक्षस का वध किया था और भागवत पुराण के अनुसार खग्रास सूर्यग्रहण के अवसर पर द्वारकाधीश श्री कृष्ण जी ने विरह में पीड़ित गोप गोपियों को आत्मज्ञान की दीक्षा दी थी। ये वही पवित्र सन्निहित सरोवर है, जहां भगवान परशुराम जी ने सभी देवी देवताओं का आह्वान कर वरदान मांगा था की हर रोज दोपहर के समय यहां सभी देवी-देवताओं का वास रहेगा और यहां स्नान दान व पिंड दान किया जाएगा।

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सन्निहित सरोवर का पुराणों में महत्त्व
महाभारत के अनुसार सूर्य ग्रहण के अवसर पर सन्निहित सरोवर में स्नान करने से सौ अश्वमेघ यज्ञों का अभीष्ट एवम शाश्वत फल प्राप्त होता है। इस पवन पवित्र सरोवर का वर्णन वामन पुराण, ब्रह्म पुराण महाभारत में कई बार मिलता है। इस पवित्र सरोवर में स्नान और जलपान करके मनुष्य स्वर्ग को पा लेता है और जो व्यक्ति सूर्यग्रहण या अमावस को अपने पितरों के निमित श्राद्ध पिंडदान दान तर्पण करता है, उसे हजारों अश्वमेघ यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
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