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दो महीने पहले केडीबी ने पिपली पर्यटक केंद्र को दिया टीआईएफसी के लिए, खोल दिया रेस्टोरेंट
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धर्मनगरी में पर्यटकों की सुविधाओं के लिए बनाए गए तीन पर्यटक सूचना एवं सुविधा केंद्र सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। ब्रह्मसरोवर और सन्निहित सरोवर पर बने दो सूचना केंद्र जहां केडीबी के सफाई कर्मचारियों के आरामगाह बने हुए हैं, वहीं पिपली के केंद्र में रेस्टोरेंट चलाया जा रहा है। दो महीने पहले इस केंद्र को केडीबी ने टूरिस्ट इंफॉर्मेशन सेंटर (टीआईएफसी) के लिए टेंडर पर दिया था। इसका किराया प्रति माह 25 हजार रुपये निर्धारित किया गया, मगर टेंडर धारक ने इसमें टीआईएफसी खोलने की बजाय रेस्टोरेंट बना दिया।
यहां बता दें पिपली स्थित सूचना केंद्र का निर्माण हरियाणा टूरिज्म विभाग की ओर से करीब 50 लाख रुपये की लागत से कराया था। साल 2019-20 में इस केंद्र को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) को सौंप दिया गया था। उसके बाद धर्मनगरी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सन्निहित और ब्रह्मसरोवर पर करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से श्रीकृष्णा सर्किट के तहत दो पर्यटन सूचना एवं सुविधा केंद्रों का निर्माण केडीबी ने कराया था। अब इन तीनों सूचना केंद्रों के बंद होने से पर्यटकों को धर्म नगरी के ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी के लिए भटकना पड़ रहा है।
उधर, ब्रह्मसरोवर और सन्निहित सरोवर पर बने दोनों केंद्र भी पर्यटकों के मकसद को पूरा नहीं कर रहे हैं। इन दोनों के गेट को बाहर और अंदर से ताला लगाकर बंद किया गया है ताकि कोई भी अंदर दाखिल न हो। हालांकि केंद्रों के अंदर का नजारा कुछ अलग ही है। केंद्र के अंदर केडीबी के सफाई कर्मी एसी की ठंडी हवा में आराम फरमाते हैं। शुक्रवार सुबह 11:54 बजे ब्रह्मसरोवर के केंद्र का जायजा लिया तो कुछ लोग एसी चलाकर आराम फरमा रहे थे। केंद्र के बारे में जानकारी लेने के लिए बातचीत की गई तो बताया कि यहां कोई अधिकारी नहीं है। वह लोग केडीबी के सफाई कर्मी हैं। ज्यादा जानकारी केडीबी कार्यालय से प्राप्त होगी।
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अक्सर यह सफाई कर्मी सुबह ड्यूटी के बाद केंद्र के पीछे के दरवाजे से अंदर जाते हैं और दोपहर तक आराम करते हैं। इसके लिए बकायदा उन्होंने यहां पर बिस्तर भी लगाए हुए हैं। यहां तक कि दोपहर का खाना भी केंद्र में खाया जाता है। बाहर जाते समय कई बार एसी को खुला ही छोड़ देते हैं।
केडीबी का इन केंद्रों की ओर कोई ध्यान नहीं है। इस कारण तीनों केंद्र अपना वजूद भी खोने लगे हैं। कोरोना काल से तीनों केंद्र ठप पड़े हैं। उन्हें दोबारा खोलने के लिए केडीबी ने योजना बनाई थी, मगर वह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। वहीं पिपली के जिस केंद्र में रेस्टोरेंट चलाया जा रहा है, उससे केडीबी को हर माह 75 हजार रुपये का चूना लग रहा है, क्योंकि केडीबी ने पर्यटकों की सुविधा के लिए टीआईएफसी खोलने के लिए दिया था। अगर इसे रेस्टोरेंट के लिए खोला जाता तो केडीबी टेंडर धारक से एक लाख रुपये किराया वसूल करता।
केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने बताया कि पिपली सूचना केंद्र को टीआईएफसी के लिए किराये पर दिया गया था। केंद्र में रेस्टोरेंट खोलने पर किरायेदार को नोटिस दिया जाएगा तथा उसके खिलाफ कार्रवाई भी होगी। वहीं केंद्रों में सफाई कर्मी के ठहरने पर रोक लगाई जाएगी तथा मामले की जांच होगी। सफाई कर्मी केंद्र का इस्तेमाल अपने आराम के लिए नहीं कर सकते हैं। यह सरासर गलत है।
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यहां बता दें पिपली स्थित सूचना केंद्र का निर्माण हरियाणा टूरिज्म विभाग की ओर से करीब 50 लाख रुपये की लागत से कराया था। साल 2019-20 में इस केंद्र को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) को सौंप दिया गया था। उसके बाद धर्मनगरी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सन्निहित और ब्रह्मसरोवर पर करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से श्रीकृष्णा सर्किट के तहत दो पर्यटन सूचना एवं सुविधा केंद्रों का निर्माण केडीबी ने कराया था। अब इन तीनों सूचना केंद्रों के बंद होने से पर्यटकों को धर्म नगरी के ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी के लिए भटकना पड़ रहा है।
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उधर, ब्रह्मसरोवर और सन्निहित सरोवर पर बने दोनों केंद्र भी पर्यटकों के मकसद को पूरा नहीं कर रहे हैं। इन दोनों के गेट को बाहर और अंदर से ताला लगाकर बंद किया गया है ताकि कोई भी अंदर दाखिल न हो। हालांकि केंद्रों के अंदर का नजारा कुछ अलग ही है। केंद्र के अंदर केडीबी के सफाई कर्मी एसी की ठंडी हवा में आराम फरमाते हैं। शुक्रवार सुबह 11:54 बजे ब्रह्मसरोवर के केंद्र का जायजा लिया तो कुछ लोग एसी चलाकर आराम फरमा रहे थे। केंद्र के बारे में जानकारी लेने के लिए बातचीत की गई तो बताया कि यहां कोई अधिकारी नहीं है। वह लोग केडीबी के सफाई कर्मी हैं। ज्यादा जानकारी केडीबी कार्यालय से प्राप्त होगी।
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अक्सर यह सफाई कर्मी सुबह ड्यूटी के बाद केंद्र के पीछे के दरवाजे से अंदर जाते हैं और दोपहर तक आराम करते हैं। इसके लिए बकायदा उन्होंने यहां पर बिस्तर भी लगाए हुए हैं। यहां तक कि दोपहर का खाना भी केंद्र में खाया जाता है। बाहर जाते समय कई बार एसी को खुला ही छोड़ देते हैं।
केडीबी का इन केंद्रों की ओर कोई ध्यान नहीं है। इस कारण तीनों केंद्र अपना वजूद भी खोने लगे हैं। कोरोना काल से तीनों केंद्र ठप पड़े हैं। उन्हें दोबारा खोलने के लिए केडीबी ने योजना बनाई थी, मगर वह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। वहीं पिपली के जिस केंद्र में रेस्टोरेंट चलाया जा रहा है, उससे केडीबी को हर माह 75 हजार रुपये का चूना लग रहा है, क्योंकि केडीबी ने पर्यटकों की सुविधा के लिए टीआईएफसी खोलने के लिए दिया था। अगर इसे रेस्टोरेंट के लिए खोला जाता तो केडीबी टेंडर धारक से एक लाख रुपये किराया वसूल करता।
केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने बताया कि पिपली सूचना केंद्र को टीआईएफसी के लिए किराये पर दिया गया था। केंद्र में रेस्टोरेंट खोलने पर किरायेदार को नोटिस दिया जाएगा तथा उसके खिलाफ कार्रवाई भी होगी। वहीं केंद्रों में सफाई कर्मी के ठहरने पर रोक लगाई जाएगी तथा मामले की जांच होगी। सफाई कर्मी केंद्र का इस्तेमाल अपने आराम के लिए नहीं कर सकते हैं। यह सरासर गलत है।