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महिला और बच्चों से जुड़े दो मंत्रालयों के लिये चुनौतीपूर्ण है कोरोनाकाल : देबाश्री

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 09 Aug 2020 11:12 PM IST
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central minister Debashri Chaudhary talk about corona's problems
पश्चिम बंगाल की रायगंज सीट से भाजपा की तेजतर्रार सांसद और केंद्रीय मंत्री देबाश्री चौधरी ने भद्रकाली शक्तिपीठ में बंगाल चुनाव से पहले जीत घंटी बजा दी है। श्रृष्टि में विराजमान बावन शक्तिपीठों में से एक मां भद्रकाली शक्तिपीठ में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री देबाश्री से पहले भी भाजपा से जुड़ी कई हस्तियां मां के दरबार में हाजिरी लगा चुकी हैं।
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बता दें कि गुजरात विधानसभा चुनाव और इसके बाद लोकसभा चुनाव 2019 से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की धर्मपत्नी एवं हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले जेपी नड्डा मां भद्रकाली शक्तिपीठ के दरबार में मन्नत के घोड़े चढ़ा चुके हैं। धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में पहुंची देबाश्री चौधरी ने अमर उजाला विशेष बातचीत में अपने मंत्रालय की गतिविधियों की जानकारी के साथ बंगाल की सीएम ममता बैनर्जी पर तुष्टीकरण की हद पार करने, हिंदुओं को बहुसंख्यक से अल्प संख्यक बनाने, कोरोनाकाल में बंगाल को केंद्र की मदद से दूर रखने, मृतकों और पीड़ितों के आंकड़े छुपाने, बंगाल को जेहादी और जमाती की आश्रय स्थली बनाने के गंभीर आरोप लगाए।
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देबाश्री चौधरी ने बताया कि कोरोनाकाल में सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति उन दो मंत्रालयों के लिये है, जिनसे महिलाएं और बच्चे जुड़े हैं। इनमें एक मंत्रालय है शिक्षा और दूसरा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय है। वैश्विक महामारी कोविड-19 के लाकडाउन के दौरान गतिविधियों को आगे बढ़ाना काफी चुनौतीपूर्ण रहा है और अनलॉक के दौरान योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि महिला बाल विकास मंत्रालय के पोषण अभियान के तहत देशभर में मार्च में जो पोषण पखवाड़ा चलाया जा रहा था, वह कोरोनाकाल की वजह से पूरा नहीं हो सका। अब लॉकडाउन खत्म होने के बाद मंत्रालय का फोकस मां और बच्चों स्वास्थ्य इम्यून सिस्टम और इन्हें दिये जाने वाले पौष्टिक तत्वों पर रहेगा।
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उन्होंने बताया कि इस दिशा में प्रभावी कदम उठाते हुए सभी आंगनबाड़ी सेंटरों द्वारा घर घर जाकर पौष्टिक आहार पहुंचाने का काम जारी है। इसी के साथ मंत्रालय का ध्यान माईग्रेट लेबर पर भी है। कोरोनाकाल के दौरान एक जगह से दूसरी जगह पहुंची माईग्रेट लेबर, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और इनके शिशु शामिल हैं, उन्हें सुरक्षित जगह पर रोके रखना और इनके लिये पर्याप्त व्यवस्था करना मंत्रालय की प्राथमिकता में शामिल है। देबाश्री चौधरी ने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष में विभिन्न योजाओं के लिये 30 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है, जो कि पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 14 प्रतिशत अधिक है।
केंद्रीय राज्यमंत्री ने बताया कि पोषण, सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण समेत सामाजिक सेवा क्षेत्र के लिए भी बजट में वृद्धि की है, जबकि वर्ष 2019-20 के 3891.71 करोड़ रुपये की जगह 2020-21 में 4036.49 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। राष्ट्रीय पोषण अभियान के लिए भी पिछले वित्त वर्ष के 3400 करोड़ रुपये की अपेक्षा इस वित्त वर्ष में 3700 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है। वन स्टॉप सेंटर योजना(ओएससी) के बजट में भी वृद्धि की है और पिछले वित्त वर्ष के 204 करोड़ के मुकाबले इस वित्त वर्ष में 385 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना(पीएमएमवीवाई) के बजट में 2300 करोड़ रुपये से बढ़ा कर 2500 करोड़ रुपये किये हैं। बाल सुरक्षा सेवा का बजट 1350 करोड़ से 1500 करोड़ रुपये किया है। इस प्रकार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के बजट में पिछले वर्ष के मुकाबले 14 फीसदी वृद्धि के साथ इस वित्त वर्ष के लिये 30,007.10 करोड़ रुपये का बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुनिश्चित किया है। केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के लिए 220 करोड़ रुपये, महिला शक्ति केंद्र के लिए 50 करोड़ से बढ़ा कर 100 करोड़ रुपये बजट किया है।

क्या देबाश्री चौधरी सीएम हो सकती हैं, जवाब की जगह मुस्कान ?
देबाश्री चौधरी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ममता दीदी की सरकार से त्रस्त है और निजात पाने का मन बना चुकी है। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ पश्चिम बंगाल में पहली बार सरकार बनाएगी। पश्चिम बंगाल में अगर भाजपा की सरकार आती है तो क्या भाजपा किसी महिला मुख्यमंत्री की जगह दूसरी महिला मुख्यमंत्री यानी देबाश्री चौधरी को अवसर दे सकती है? इस सवार के उत्तर में उन्होंने मुस्कान तो बिखेरी मगर कोई जवाब नहीं दिया।
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