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काली पट्टी बांध जनसंघर्ष मंच, निमार्ण कार्य मजदूर और मनरोगा मजदूर यूनियन ने मनाया काला दिवस
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जन संघर्ष मंच हरियाणा ने मनरेगा मजदूर यूनियन, निर्माण कार्य मजदूर मिस्त्री यूनियन के सहयोग से वीरवार को काला दिवस मनाया। मंच व यूनियनों के सदस्य सुबह 11 बजे पुराना बस स्टैंड पर एकत्रित हुए और यहां काली पट्टी बांधकर केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ रोष मार्च निकाला। रोष मार्च पुराने बस स्टैंड से शुरू हुआ और थानेसर शहर के मुख्य बाजार, सब्जी मंडी, मोती चौक, कच्चा घेर से होते हुए आंबेडकर चौक पर खत्म हुआ। यहां मंच की प्रांतीय महासचिव सुदेश कुमारी, जिला सचिव चंद्र रेखा ,उपाध्यक्ष उषा कुमारी, मनरेगा मजदूर यूनियन के प्रांतीय प्रधान नरेश कुमार, जिला प्रधान मेवाराम, निर्माण कार्य मजदूर मिस्त्री यूनियन के प्रांतीय प्रधान करनैल सिंह, जिला प्रधान चांदीराम, रामचंद्र ने चार लेबर कोड को रद्द करने की मांग की और सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों की कड़ी आलोचना की।
महासचिव सुदेश कुमारी ने कहा कि मोदी व खट्टर सरकार के राज में नौकरियां तेजी से खत्म हो गई है। सैलरी भी घट रही है अगर नौकरी मिल भी जाए तो वह पक्की नहीं होती साधारण नौकरी की उम्मीद बंद होती जा रही हैं। युवाओं का भविष्य अंधकार में है। सरकार सरकारी संपत्तियों, उपक्रमों, सरकारी महकमा को निजी हाथों को बेच रही है। जिला सचिव चंद्र रेखा व उप प्रधान उषा कुमारी ने कहा कि केंद्र सरकार मजदूरों किसानों कर्मचारियों महिलाओं के खिलाफ लगातार नीतियां बना रही है और काले कानून थौप रही है। डीजल पेट्रोल रसोई गैस व अन्य जरूरी सामानों के भाव आसमान छू रहे हैं, जिससे आम जनता को अपना निर्वाह करना बहुत कठिन हो गया है। कहा कि इसी तरह एक साल पूर्व सरकार ने संवैधानिक परंपराओं को दरकिनार करके किसान विरोधी 3 कृषि कानूनों को पारित कर दिया था। ये तीनों कानून कॉरपोरेट पूंजी को फायदा पहुंचाने व जन वितरण प्रणाली को नष्ट करने के उद्देश्य से लाए गए हैं।
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महासचिव सुदेश कुमारी ने कहा कि मोदी व खट्टर सरकार के राज में नौकरियां तेजी से खत्म हो गई है। सैलरी भी घट रही है अगर नौकरी मिल भी जाए तो वह पक्की नहीं होती साधारण नौकरी की उम्मीद बंद होती जा रही हैं। युवाओं का भविष्य अंधकार में है। सरकार सरकारी संपत्तियों, उपक्रमों, सरकारी महकमा को निजी हाथों को बेच रही है। जिला सचिव चंद्र रेखा व उप प्रधान उषा कुमारी ने कहा कि केंद्र सरकार मजदूरों किसानों कर्मचारियों महिलाओं के खिलाफ लगातार नीतियां बना रही है और काले कानून थौप रही है। डीजल पेट्रोल रसोई गैस व अन्य जरूरी सामानों के भाव आसमान छू रहे हैं, जिससे आम जनता को अपना निर्वाह करना बहुत कठिन हो गया है। कहा कि इसी तरह एक साल पूर्व सरकार ने संवैधानिक परंपराओं को दरकिनार करके किसान विरोधी 3 कृषि कानूनों को पारित कर दिया था। ये तीनों कानून कॉरपोरेट पूंजी को फायदा पहुंचाने व जन वितरण प्रणाली को नष्ट करने के उद्देश्य से लाए गए हैं।
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