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आठ साल पहले फर्जी हस्ताक्षर करा ट्रांसफर किए थे डेढ़ लाख, मां बेटे पर केस दर्ज
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पिहोवा। धोखाधड़ी करके बैंक अकाउंट से डेढ़ लाख रुपये निकलवा लिए जाने के करीब आठ साल बाद उपभोक्ता को इंसाफ मिला। सिटी पुलिस ने शाखा प्रबंधक की शिकायत पर मां-बेटे को नामजद करते हुए बैंक के अन्य कर्मियों के खिलाफ धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज किया है।
पिहोवा के रहने वाले मोहन लाल ने बताया कि उसका कैथल रोड स्थित एक निजी बैंक में अकाउंट है। वर्ष 2014 में पिहोवा वासी राजेंद्र कुमार ने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर उसके खाते से डेढ़ लाख रुपये रुपये के वाउचर पर फर्जी हस्ताक्षर कर अपनी मां के खाते में ट्रांसफर कर दिए थे। इस बात का खुलासा तब हुआ जब उसका एक केस आयकर विभाग में लगा था। शिकायतकर्ता अनुसार बैंक कर्मियों ने उसके रुपये वापस अकाउंट में डालने की बजाए उस पर आरोपी के साथ मिलकर जबरन जून 2021 को उससे दोबारा पिछली तारीख 20 फरवरी 2014 का डेढ़ लाख रुपये का वाउचर भरकर उसके असली हस्ताक्षर करा लिए थे।
उसके बाद बैंक ने उस वाउचर को अपने हेड ऑफिस में भिजवा दिया था। हेड ऑफिस के अधिकारियों को शक होने पर उन्होंने इस बारे में उनके साथ बातचीत की तो उन्हें सच्चाई से अवगत कर दिया था। उसके बाद मौजूदा बैंक प्रबंधक ने मामले की शिकायत पुलिस स्टेशन को दी। पुलिस ने जांच करते पाया कि उपभोक्ता मोहन लाल के अकाउंट से फर्जी हस्ताक्षर करके डेढ़ लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। ट्रांसफर किए गए वाउचर पर अंग्रेजी में मोहन लाल के हस्ताक्षर थे जबकि मोहन लाल अपने खाते में हिंदी में करता है। इस पर पुलिस ने दोनों आरोपी राजेंद्र तनेजा व उसकी मां के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
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पिहोवा के रहने वाले मोहन लाल ने बताया कि उसका कैथल रोड स्थित एक निजी बैंक में अकाउंट है। वर्ष 2014 में पिहोवा वासी राजेंद्र कुमार ने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर उसके खाते से डेढ़ लाख रुपये रुपये के वाउचर पर फर्जी हस्ताक्षर कर अपनी मां के खाते में ट्रांसफर कर दिए थे। इस बात का खुलासा तब हुआ जब उसका एक केस आयकर विभाग में लगा था। शिकायतकर्ता अनुसार बैंक कर्मियों ने उसके रुपये वापस अकाउंट में डालने की बजाए उस पर आरोपी के साथ मिलकर जबरन जून 2021 को उससे दोबारा पिछली तारीख 20 फरवरी 2014 का डेढ़ लाख रुपये का वाउचर भरकर उसके असली हस्ताक्षर करा लिए थे।
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उसके बाद बैंक ने उस वाउचर को अपने हेड ऑफिस में भिजवा दिया था। हेड ऑफिस के अधिकारियों को शक होने पर उन्होंने इस बारे में उनके साथ बातचीत की तो उन्हें सच्चाई से अवगत कर दिया था। उसके बाद मौजूदा बैंक प्रबंधक ने मामले की शिकायत पुलिस स्टेशन को दी। पुलिस ने जांच करते पाया कि उपभोक्ता मोहन लाल के अकाउंट से फर्जी हस्ताक्षर करके डेढ़ लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। ट्रांसफर किए गए वाउचर पर अंग्रेजी में मोहन लाल के हस्ताक्षर थे जबकि मोहन लाल अपने खाते में हिंदी में करता है। इस पर पुलिस ने दोनों आरोपी राजेंद्र तनेजा व उसकी मां के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
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