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बूरा खाप ने मृत्यु भोज पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव किया पारित
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
Updated Mon, 28 Nov 2016 12:06 AM IST
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गांव किरमिच में बूरा खाप की प्रदेश स्तरीय बैठक में सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। खाप के प्रदेशाध्यक्ष रणबीर सिंह किरमिच की अध्यक्षता में हुई बैठक में मृत्यु भोज बंद करने, शादी में डीजे बजाने पर प्रतिबंध, मृत्यु पर शोक की अवधि 13 दिन से घटाकर सात दिन करने और संस्कार के समय रिश्तेदारों को न बुलाने, रस्मक्रिया पर पगड़ी पर केवल दस रुपये देने तथा अर्थी पर अधिक चादरें न चढ़ाने का फैसला लिया गया।
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बैठक में गांव किरमिच के सभी जातियों के गणमान्य लोगों सहित पूर्व विधायक धर्मपाल ओबरा, निवासी भिवानी, खाप के महासचिव बूढाखेड़ा जिला जींद निवासी भले राम, उप प्रधान दयाकिशन भिवानी, प्रेस प्रवक्ता बलवंत सिंह बूरा निवासी घिराय हिसार, रामचंद्र जींद, जयपाल बूरा हिसार, प्रेम सिंह खानपुर सोनीपत, नसीब भाणा कैथल, सूबे सिंह, गांव किरमिच के सरपंच ओमप्रकाश, पंचायत सदस्य राजेश बाल्मीकि, सोमप्रकाश, रमेश जांगड़ा, सुंदर सिंह भी शामिल हुए।
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बैठक में उपरोक्त सभी प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किया गया। बैठक में 200 से अधिक लोगों ने भाग लिया। बूरा खाप के प्रदेशाध्यक्ष रणबीर सिंह किरमिच ने बताया कि हरियाणा में बूरा गोत्र के 80 गांव हैं। बूरा खाप ने प्रत्येक गांव में बैठक आयोजित करके उपरोक्त सामाजिक बुराइयों को दूर करने का निर्णय लिया है। आज किरमिच गांव के प्रत्येक जाति के लोगों ने बूरा खाप के आग्रह को मानते हुए उपरोक्त निर्णय लागू करने पर सहमति व्यक्त की है।
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उन्होंने कहा कि अभी तक बूरा गोत्र के 27 गांवों में इस प्रकार की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं और सभी 80 गांवों में बैठकें आयोजित करके लोगों को सामाजिक बुराइयां दूर करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दाह संस्कार के समय रिश्तेदारों को नहीं बुलाए जाने का फैसला काफी विचार विमर्श करके लिया गया है, क्योंकि किसी की मृत्यु का समाचार मिलते ही परिजन हड़बड़ा जाते हैं और इस कारण कई बार दुर्घटना भी हो जाती है।
इसके अलावा रिश्तेदारों को अंतिम संस्कार पर शामिल होने के बाद चौथे पर अस्थि संग्रहण करने के समय आना पड़ता है और उसके बाद दसवें व 13वें दिन अंतिम क्रिया पर भी आना होता है। इस प्रकार रिश्तेदारों को किसी की मृत्यु पर चार बार आना पड़ता है। इसके अलावा पगड़ी के समय केवल मात्र 10 रुपये लेने का फैसला लिया गया। अधिकतर लोग काफी पैसा पगड़ी के समय देते हैं, जिससे उन पर बोझ पड़ता है।
मृतक की अर्थी पर चादरें भी सैकड़ों की संख्या में डाली जाती हैं। इसलिए इस प्रथा को बंद करके चादर की बजाए केवल 100 ग्राम घी संस्कार में देने का फैसला लिया गया। उन्होंने बताया कि बूरा खाप ने सभी जाति के लोगों से अपील की है कि वे इस फैसले को लागू करें। रणबीर सिंह किरमिच ने यह भी जानकारी दी कि अगले चरण में नशाबंदी करने, दहेज प्रथा समाप्त करने और कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करने का बीड़ा बूरा खाप द्वारा उठाया जाएगा।