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Kurukshetra News: 8.47 लाख की वसूली याचिका खारिज, बंसल राइस मिल को राहत
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन की ओर से बंसल राइस मिल, इस्माईलाबाद के खिलाफ दायर 8,47,421 रुपये की वसूली याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। एडीशनल डिस्ट्रिक्ट जज अरविंद कुमार की अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए एचएसडब्ल्यूसी की अपील भी निरस्त कर दी।
मामला वर्ष 2012-13 के खरीफ मार्केटिंग सीजन से जुड़ा है, जब एचएसडब्ल्यूसी ने बंसल राइस मिल को धान मिलिंग के लिए दिया था। कॉर्पोरेशन का आरोप था कि मिल ने कस्टम मिल्ड राइस समय पर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को नहीं दिया जिसके कारण होल्डिंग चार्ज और ब्याज की वसूली की जानी चाहिए।
हालांकि, अदालत ने पाया कि मिल के पास कस्टम मिल्ड राइस तैयार थी लेकिन एफसीआई में भंडारण के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं थी। एफसीआई की ओर से जारी नो स्पेस प्रमाणपत्रों को अदालत ने वैध साक्ष्य माना।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि देरी मिल की लापरवाही के कारण नहीं बल्कि एफसीआई में स्थान की कमी के कारण हुई। ऐसे में बंसल राइस मिल पर होल्डिंग चार्ज का दायित्व नहीं बनता। निर्णय में यह भी कहा गया कि अनुबंध के अनुसार मिल की जिम्मेदारी केवल एफसीआई को चावल डिलीवर करने तक सीमित थी। जब एफसीआई स्वयं चावल स्वीकार करने में असमर्थ रहा, तो मिल को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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मामला वर्ष 2012-13 के खरीफ मार्केटिंग सीजन से जुड़ा है, जब एचएसडब्ल्यूसी ने बंसल राइस मिल को धान मिलिंग के लिए दिया था। कॉर्पोरेशन का आरोप था कि मिल ने कस्टम मिल्ड राइस समय पर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को नहीं दिया जिसके कारण होल्डिंग चार्ज और ब्याज की वसूली की जानी चाहिए।
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हालांकि, अदालत ने पाया कि मिल के पास कस्टम मिल्ड राइस तैयार थी लेकिन एफसीआई में भंडारण के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं थी। एफसीआई की ओर से जारी नो स्पेस प्रमाणपत्रों को अदालत ने वैध साक्ष्य माना।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि देरी मिल की लापरवाही के कारण नहीं बल्कि एफसीआई में स्थान की कमी के कारण हुई। ऐसे में बंसल राइस मिल पर होल्डिंग चार्ज का दायित्व नहीं बनता। निर्णय में यह भी कहा गया कि अनुबंध के अनुसार मिल की जिम्मेदारी केवल एफसीआई को चावल डिलीवर करने तक सीमित थी। जब एफसीआई स्वयं चावल स्वीकार करने में असमर्थ रहा, तो मिल को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।