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एथलीट सुभाष ने तोड़ा दक्षिण एशियाई ट्रायथलॉन का रिकार्ड

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 11 Jan 2022 02:03 AM IST
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Athlete Subhash breaks South Asian triathlon record, Kurukshetra
ब्रह्मसरोवर में सुबह आठ बजे तैराकी करता एथलीट सुभाष कलासर। संवाद - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। जज्बा और जुनून हो तो कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं है। इसे साबित किया है धर्मनगरी के कलासर गांव निवासी एथलीट सुभाष ने। उन्होंने दो घंटे 24 मिनट और 22 सेकेंड में दक्षिण एशियाई ट्रायथलॉन का रिकार्ड ध्वस्त किया है। इससे पहले दो घंटे 40 मिनट और 21 सेकेंड का रिकार्ड दर्ज किया गया था। सोमवार की सुबह कंपकंपाती ठंड के बीच अधिकारियों की देखरेख में ब्रह्मसरोवर से एथलीट सुभाष ने ट्रायथलॉन की शुरुआत की।
ब्रह्मसरोवर से सुबह 8 बजकर 18 मिनट पर डॉ. दिनेश यादव, डॉ. प्रशांत कुमार और सहायक प्रो. जितेंद्र आदि राजपत्रित अधिकारियों की देखरेख व सैकड़ों समर्थकों की मौजूदगी में एथलीट सुभाष ने ट्रायथलॉन की शुरुआत की। इसमें 1500 मीटर तैराकी, 40 किलोमीटर साइकिलिंग और 10 किलोमीटर की दौड़ शामिल थी। यह इवेंट एथलीट सुभाष ने सरोवर के उत्तरी छोर पर स्थित गेट नंबर एक पर ब्रह्मसरोवर के ठंडे पानी में गोता लगाकर शुरू किया।
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इस दौरान उन्होंने 1500 मीटर की तैराकी लगभग 37 मिनट में ब्रह्मसरोवर के दक्षिणी छोर पर स्थित गेट नंबर 2 पर पूरी की। फिर उसी स्थान से बिना रुके वाया उमरी चौक होते हुए नीलोखेड़ी की ओर साइकिलिंग प्रारंभ की। वहां से वापस उमरी चौक तक 40 किलोमीटर की साइकिलिंग इवेंट पूरी की। इसके साथ ही तीसरे इवेंट में बिना रुके 10 किलोमीटर की दौड़ लगाकर ब्रह्मसरोवर के दक्षिणी छोर स्थित दूसरे गेट पर 10 बजकर 32 मिनट पर पहुंचकर इतिहास रच दिया।
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एथलीट सुभाष ने कड़ी मेहनत और संघर्ष की बदौलत अपने ही देश के दक्षिण भारतीय अनुज के रिकॉर्ड को ध्वस्त किया। अनुज ने 2019 के दक्षिण एशियाई खेलों में यह रिकॉर्ड 2 घंटे 40 मिनट 21 सेकेंड में स्थापित किया था। एथलीट सुभाष ने अनुज से ठीक 15 मिनट 59 सेकंड पहले फिनिशिंग प्वाइंट पर पहुंच कर इस कीर्तिमान को अपने नाम किया। इस अवसर पर अनिल लोहट, राजबीर कौल, शमशेर , इंस्पेक्टर रामपाल, राजेश वैद, यशवीर बेदी, कीमती लाल, सुनील, नरवीर, मंगलेश, रवि, राजेश व अंकुश आदि मौजूद रहे।
सहायता मिलने पर विश्व स्तर पर तिरंगा फहराने का है भरोसा
एथलीट सुभाष बहुत ही गरीब और साधारण परिवार से हैं। उन्होंने बिना किसी कोचिंग और सरकारी सहायता के अपने साहस, कड़े संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति से इस मुकाम को हासिल किया है। इससे पहले भी वह अल्ट्रा मैराथन में 10 किलोग्राम वजन उठाकर 104 किलोमीटर की दौड़ में विश्व रिकॉर्ड बना चुके हैं। उनका कहना है कि यदि उन्हें सरकारी सहायता और कोचिंग की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए तो वह विश्व स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं।
लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने की अपील
सोशल एवं प्रिंट मीडिया के माध्यम सुभाष ने प्रदेश व भारत सरकार से इस रिकॉर्ड को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज करवाने व विश्व स्तरीय ट्रायथलॉन इवेंट में भारत का नाम रोशन करने के लिए एक अवसर देने अपील की है।
अधिकारियों से की जा चुकी है बातचीत : नवनीर
सुभाष के साथी नवनीर ने बताया कि वे गुरुग्राम स्थित सेक्टर 29 में लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के ऑफिस जानकारी लेने गए थे। अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि इवेंट का वीडियो रिकॉर्ड कर उनके पास भेजा जाए। सुभाष इवेंट की सीडी लिम्का बुक रिकॉर्ड को कोरियर के माध्यम से भेजेंगे।

सात साल घर पहले छोड़ चुका है सुभाष
सुभाष सात साल पहले मेडल के लिए घर छोड़ चुका है। ग्रामीणों ने उन्हें ताने देना शुरू कर दिए कि ये नहीं जीत पाएगा कोई मेडल-वेडल। इसके बाद सुभाष ने कठिन मेहनत करनी शुरू की। कड़े संघर्ष के बाद यह मुकाम हासिल किया। वह करीब 23 साल से मेहनत कर रहा है। उनके 72 वर्षीय पिता मजदूरी करते हैं और उनकी मां देख नहीं सकती हैं।
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