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बगैर ईओ के आदेश पर असेसमेंट में छेड़छाड़
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
Updated Thu, 08 Sep 2016 12:38 AM IST
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नगर परिषद में प्रापर्टी असेसमेंट में छेड़छाड़ कर किसी और के मकान का नामांतरण किसी और के नाम पर करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। वशिष्ठ कालोनी निवासी एक बुजुर्ग ने आरोप लगाया कि उसका मकान किसी और के नाम कर दिया गया है। मामले ने इस कदर तुल पकड़ा कि नगर परिषद में पुलिस तक पहुंच गई। हालांकि बाद में नप अधिकारियों ने पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों को अपने अपने दस्तावेज दिखाने के लिए कहा। दोनों पक्षों को गुरुवार को बुलाया गया है। इधर लिखित शिकायत नहीं मिलने पर पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया है। दिलचस्प बात यह भी है कि जिस व्यक्ति पर दस्तावेजों में छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है वह नप का कर्मचारी ही नहीं है। बताया जाता है कि वह पूर्व उपप्रधान का बेटा है।
मामले का खुलासा उस वक्त हुआ जब बुधवार को वशिष्ठ कालोनी निवासी गुरनाम सिंह अपने मकान की असेसमेंट कराने के लिए थानेसर नगर परिषद आया था। यहां जब कर्मचारी ने रिकॉर्ड जांचा तो असेसमेंट में उसकी जगह किसी शमशेर सिंह का नाम लिखा हुआ था। यह देखकर गुरनाम के पैरों तले से जमीन खिसक गई। उसने वहां मौजूद कर्मचारियों से इस बारे में पूछा और इसकी शिकायत नगर परिषद ईओ डॉ. एसके चौहान को की। डॉ. चौहान ने इस मामले को गंभीरता से लिया और उसके साथ हाउस टैक्स विभाग में पहुंचे। यहां पहुंचने पर उन्होंने एक अज्ञात युवक को सीट पर बैठे पाया। पूछने पर युवक ने बताया कि वह नप के पूर्व उपाध्यक्ष का पुत्र है और पिछले कई वर्षों से यहां काम कर रहा है। हालांकि जब उसका रिकॉर्ड जांचा गया, तो पता चला कि वह नगर परिषद का कर्मचारी ही नहीं है। इसके बाद ईओ ने पुलिस को सूचना देकर बुला लिया। बताया जाता है कि युवक के पास से वही रिकॉर्ड बरामद किया, जिसमें छेड़छाड़ की शिकायत की गई थी।
बगैर आदेश के हुई असेसमेंट में छेड़छाड़
नप के ईओ ने जब कथित कर्मचारी से पूछताछ की तो उसने साफ तौर कहा कि वह यहां कई वर्षों से काम कर रहा है। लेकिन जब रिकॉर्ड छाना गया तो पता चला कि वह नप का कर्मचारी नहीं है। जांच में यह भी पता चला कि बगैर ईओ के आदेश के असेसमेंट में छेड़छाड़ की गई है। इस पर ईओ डॉ. चौहान कथित कर्मचारी और शिकायतकर्ता को लेकर अपने चैंबर में आ गए। जब मामला गंभीर नजर आया तो उन्होंने पुलिस को सूचना दे दी।
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पुलिस पहुंची मौके पर
कृष्णा गेट चौकी इंचार्ज निर्मल ने बताया कि वशिष्ठ कालोनी निवासी गुरनाम सिंह चौकी में शिकायत लेकर आया था कि उसका मकान किसी और के नाम कर दिया गया है। इस पर उससे दरख्वास्त देने के लिए कहा था, लेकिन उसने कहा कि वह नप जाकर वहीं से दरख्वास्त लिखकर ला देगा। इसके बाद नप से फोन आया तब एएसआई राजपाल और भीमसिंह को वहां भेजा गया था। फिलहाल किसी ने लिखित शिकायत नहीं दी है। गुरनाम के अलावा जिस शख्स के नाम मकान किया गया है, उन्हें भी गुरुवार को दस्तावेज लेकर बुलाया है। जिसके भी दस्तावेज फर्जी निकलेंगे शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
अब जांचा जाएगा पूरा रिकॉर्ड
ईओ डॉ. एसके चौहान ने बताया कि उनके पास शिकायत आई तो उन्होंने तुरंत विभाग में जाकर जांच की। यहां पाया गया कि सीट पर बैठा अज्ञात युवक नगर परिषद का कर्मचारी है ही नहीं। उसके पास वही रिकॉर्ड है, जिसमें छेड़छाड़ हुई है। उन्होंने को रिकॉर्ड के साथ उसे पकड़ा। पूरे रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है, ताकि अगर कहीं और हेरफेर की गई हो तो वो भी सामने आ जाए। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
अधिकारियों को पता ही नहीं कौन कर रहा है काम
इस पूरे में मामले में सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि नप के अधिकारियों को यह तक पता नहीं कि जो लोग काम कर रहे हैं वे दरअसल है कौन? नप के कर्मचारी है भी या नहीं? यदि नहीं है तो वे किस आधार पर महत्वपूर्ण विभागों में काम कर रहे है? हालांकि सूत्रों की माने तो कथित फर्जी कर्मचारी आउट सोर्सिंग पर पहले काम करता था। लेकिन पिछले वर्ष तक ही उसकी सेंशन थी। इस बार नहीं है। ऐसे में नप के कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यशैली पर खुद ही बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है।
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मामले का खुलासा उस वक्त हुआ जब बुधवार को वशिष्ठ कालोनी निवासी गुरनाम सिंह अपने मकान की असेसमेंट कराने के लिए थानेसर नगर परिषद आया था। यहां जब कर्मचारी ने रिकॉर्ड जांचा तो असेसमेंट में उसकी जगह किसी शमशेर सिंह का नाम लिखा हुआ था। यह देखकर गुरनाम के पैरों तले से जमीन खिसक गई। उसने वहां मौजूद कर्मचारियों से इस बारे में पूछा और इसकी शिकायत नगर परिषद ईओ डॉ. एसके चौहान को की। डॉ. चौहान ने इस मामले को गंभीरता से लिया और उसके साथ हाउस टैक्स विभाग में पहुंचे। यहां पहुंचने पर उन्होंने एक अज्ञात युवक को सीट पर बैठे पाया। पूछने पर युवक ने बताया कि वह नप के पूर्व उपाध्यक्ष का पुत्र है और पिछले कई वर्षों से यहां काम कर रहा है। हालांकि जब उसका रिकॉर्ड जांचा गया, तो पता चला कि वह नगर परिषद का कर्मचारी ही नहीं है। इसके बाद ईओ ने पुलिस को सूचना देकर बुला लिया। बताया जाता है कि युवक के पास से वही रिकॉर्ड बरामद किया, जिसमें छेड़छाड़ की शिकायत की गई थी।
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बगैर आदेश के हुई असेसमेंट में छेड़छाड़
नप के ईओ ने जब कथित कर्मचारी से पूछताछ की तो उसने साफ तौर कहा कि वह यहां कई वर्षों से काम कर रहा है। लेकिन जब रिकॉर्ड छाना गया तो पता चला कि वह नप का कर्मचारी नहीं है। जांच में यह भी पता चला कि बगैर ईओ के आदेश के असेसमेंट में छेड़छाड़ की गई है। इस पर ईओ डॉ. चौहान कथित कर्मचारी और शिकायतकर्ता को लेकर अपने चैंबर में आ गए। जब मामला गंभीर नजर आया तो उन्होंने पुलिस को सूचना दे दी।
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पुलिस पहुंची मौके पर
कृष्णा गेट चौकी इंचार्ज निर्मल ने बताया कि वशिष्ठ कालोनी निवासी गुरनाम सिंह चौकी में शिकायत लेकर आया था कि उसका मकान किसी और के नाम कर दिया गया है। इस पर उससे दरख्वास्त देने के लिए कहा था, लेकिन उसने कहा कि वह नप जाकर वहीं से दरख्वास्त लिखकर ला देगा। इसके बाद नप से फोन आया तब एएसआई राजपाल और भीमसिंह को वहां भेजा गया था। फिलहाल किसी ने लिखित शिकायत नहीं दी है। गुरनाम के अलावा जिस शख्स के नाम मकान किया गया है, उन्हें भी गुरुवार को दस्तावेज लेकर बुलाया है। जिसके भी दस्तावेज फर्जी निकलेंगे शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
अब जांचा जाएगा पूरा रिकॉर्ड
ईओ डॉ. एसके चौहान ने बताया कि उनके पास शिकायत आई तो उन्होंने तुरंत विभाग में जाकर जांच की। यहां पाया गया कि सीट पर बैठा अज्ञात युवक नगर परिषद का कर्मचारी है ही नहीं। उसके पास वही रिकॉर्ड है, जिसमें छेड़छाड़ हुई है। उन्होंने को रिकॉर्ड के साथ उसे पकड़ा। पूरे रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है, ताकि अगर कहीं और हेरफेर की गई हो तो वो भी सामने आ जाए। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
अधिकारियों को पता ही नहीं कौन कर रहा है काम
इस पूरे में मामले में सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि नप के अधिकारियों को यह तक पता नहीं कि जो लोग काम कर रहे हैं वे दरअसल है कौन? नप के कर्मचारी है भी या नहीं? यदि नहीं है तो वे किस आधार पर महत्वपूर्ण विभागों में काम कर रहे है? हालांकि सूत्रों की माने तो कथित फर्जी कर्मचारी आउट सोर्सिंग पर पहले काम करता था। लेकिन पिछले वर्ष तक ही उसकी सेंशन थी। इस बार नहीं है। ऐसे में नप के कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यशैली पर खुद ही बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है।