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Kurukshetra News: एआई से होगा बर्नआउट का समाधान, कुवि के डॉ. अनिल ने विकसित किया फ्रेमवर्क
Fri, 08 Aug 2025 03:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 08 Aug 2025 03:09 AM IST
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कुरुक्षेत्र। गल्फ मेडिकल यूनिवर्सिटी अजमान (यूएई) में आयोजित सम्मेलन में बेस्ट पेपर अवार्ड से स
राजरानी
कुरुक्षेत्र। पुलिसकर्मियों की मानसिक थकावट और काम के प्रति उदासीनता यानी बर्नआउट वर्तमान समय में एक समस्या बन चुकी है। इस चुनौती से निपटने के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार ने एक एआई-सहायित फ्रेमवर्क विकसित किया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है।
उन्होंने शोधपत्र एआई फॉर वर्क वेल बिंग इन पुलिसिंग को जून माह में गल्फ मेडिकल यूनिवर्सिटी अजमान (यूएई) में आयोजित सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया, जहां इसे बेस्ट पेपर अवॉर्ड मिला। डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि यह अध्ययन प्रदेश के 1223 पुलिस अधिकारियों पर आधारित है, जिसमें जॉब डिमांडस एंड रिसॉर्स मॉडल के जरिए बर्नआउट और वर्क एंगेजमेंट का विश्लेषण किया गया। शोध में सामने आया कि लंबी ड्यूटी, अस्पष्ट भूमिकाएं और अवकाश की कमी बर्नआउट बढ़ाते हैं। जबकि सहयोग, मान्यता और स्वायत्तता जैसे संसाधन काम के प्रति ऊर्जा और लगाव बढ़ाते हैं। कई बार वरिष्ठों का समर्थन भी बर्नआउट को बढ़ा सकता है। इसका कारण विभागीय कठोरता है।
डॉ. कुमार ने बताया कि इस शोध के आधार पर एक लैब टू एक्शन एआई फ्रेमवर्क का प्रस्ताव है जो चार चरणों में कार्य करेगा। डाटा संग्रह, एनएलपी विश्लेषण, पूर्वानुमान मॉडल और एक डैशबोर्ड। यह सिस्टम एचआर को समय रहते हस्तक्षेप के लिए सक्षम बनाएगा। यह प्रणाली निगरानी के लिए नहीं बल्कि सहानुभूति आधारित सहायता के लिए होगी। इसमें गोपनीयता, स्वैच्छिक भागीदारी और मानव निर्णय की भूमिका को प्राथमिकता दी जाएगी। संवाद
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प्रदेश सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा शोध
डॉ अनिल कुमार का कहना है कि इस फ्रेमवर्क को वह प्रदेश सरकार को प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं, ताकि इसे संस्थागत रूप से लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन पुलिस कर्मियों और अधिकारियों पर किया गया है। लेकिन मूलत: यह प्रणाली हर वर्ग के कर्मचारियों की भावनात्मक स्थिति को समझकर उन्हें समय पर सहायता देने में सहायक साबित हो सकती है। इसका उद्देश्य कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। क्योंकि नई पीढ़ी के युवाओं में सहनशक्ति कम है और वह तनाव में आकर गलत फैसले ले रहे हैं।
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जानिए क्या है बर्नआउट
डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि बर्नआउट एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह से थका हुआ महसूस करता है। इस स्थिति में व्यक्ति की काम या व्यक्तिगत जीवन में रुचि और प्रेरणा की कमी हो जाती है। काम करने की क्षमता भी कम होती है।
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कुरुक्षेत्र। पुलिसकर्मियों की मानसिक थकावट और काम के प्रति उदासीनता यानी बर्नआउट वर्तमान समय में एक समस्या बन चुकी है। इस चुनौती से निपटने के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार ने एक एआई-सहायित फ्रेमवर्क विकसित किया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है।
उन्होंने शोधपत्र एआई फॉर वर्क वेल बिंग इन पुलिसिंग को जून माह में गल्फ मेडिकल यूनिवर्सिटी अजमान (यूएई) में आयोजित सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया, जहां इसे बेस्ट पेपर अवॉर्ड मिला। डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि यह अध्ययन प्रदेश के 1223 पुलिस अधिकारियों पर आधारित है, जिसमें जॉब डिमांडस एंड रिसॉर्स मॉडल के जरिए बर्नआउट और वर्क एंगेजमेंट का विश्लेषण किया गया। शोध में सामने आया कि लंबी ड्यूटी, अस्पष्ट भूमिकाएं और अवकाश की कमी बर्नआउट बढ़ाते हैं। जबकि सहयोग, मान्यता और स्वायत्तता जैसे संसाधन काम के प्रति ऊर्जा और लगाव बढ़ाते हैं। कई बार वरिष्ठों का समर्थन भी बर्नआउट को बढ़ा सकता है। इसका कारण विभागीय कठोरता है।
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डॉ. कुमार ने बताया कि इस शोध के आधार पर एक लैब टू एक्शन एआई फ्रेमवर्क का प्रस्ताव है जो चार चरणों में कार्य करेगा। डाटा संग्रह, एनएलपी विश्लेषण, पूर्वानुमान मॉडल और एक डैशबोर्ड। यह सिस्टम एचआर को समय रहते हस्तक्षेप के लिए सक्षम बनाएगा। यह प्रणाली निगरानी के लिए नहीं बल्कि सहानुभूति आधारित सहायता के लिए होगी। इसमें गोपनीयता, स्वैच्छिक भागीदारी और मानव निर्णय की भूमिका को प्राथमिकता दी जाएगी। संवाद
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प्रदेश सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा शोध
डॉ अनिल कुमार का कहना है कि इस फ्रेमवर्क को वह प्रदेश सरकार को प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं, ताकि इसे संस्थागत रूप से लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन पुलिस कर्मियों और अधिकारियों पर किया गया है। लेकिन मूलत: यह प्रणाली हर वर्ग के कर्मचारियों की भावनात्मक स्थिति को समझकर उन्हें समय पर सहायता देने में सहायक साबित हो सकती है। इसका उद्देश्य कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। क्योंकि नई पीढ़ी के युवाओं में सहनशक्ति कम है और वह तनाव में आकर गलत फैसले ले रहे हैं।
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जानिए क्या है बर्नआउट
डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि बर्नआउट एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह से थका हुआ महसूस करता है। इस स्थिति में व्यक्ति की काम या व्यक्तिगत जीवन में रुचि और प्रेरणा की कमी हो जाती है। काम करने की क्षमता भी कम होती है।