{"_id":"634c69da062b9921bd468483","slug":"ahoi-ashtami-today-mothers-will-keep-fast-for-the-prosperity-of-their-children-kurukshetra-kurukshetra-news-knl124694476","type":"story","status":"publish","title_hn":"अहोई अष्टमी आज, संतान की समृद्धि के लिए माताएं रखेंगी व्रत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अहोई अष्टमी आज, संतान की समृद्धि के लिए माताएं रखेंगी व्रत
विज्ञापन
अहोई अष्टमी पर पूजा के लिए खरीदारी करती महिला। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
पिपली। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को माता पार्वती के अहोई स्वरूप की पूजा का विधान है। इस तिथि को अहोई अष्टमी के रूप में पूजा जाता है। इस दिन भारतीय महिलाएं संतान प्राप्ति और संतान की समृद्धि के लिए व्रत करती हैं। सोमवार को पुनर्वसु नक्षत्र, चंद्रमा कर्क राशि और शिव योग में अहोई अष्टमी का व्रत माताएं रखेगी। यह जानकारी कॉस्मिक एस्ट्रो के डायरेक्टर व श्री दुर्गा देवी मंदिर के अध्यक्ष ज्योतिष व वास्तु विशेषज्ञ डॉ. सुरेश मिश्रा ने दी।
उन्होंने बताया कि अहोई का शाब्दिक अर्थ है, अनहोनी को होनी में बदलने वाली माता। इस संपूर्ण सृष्टि में अनहोनी या दुर्भाग्य को टालने वाली आदि शक्ति देवी पार्वती हैं, इसलिए इस दिन माता पार्वती की पूजा-अर्चना अहोई माता के रूप में की जाती है। उन्होंने बताया कि करवा चौथ की तरह इस व्रत में भी महिलाओं को सुबह उठकर स्नान करना चाहिए। स्वच्छ वस्त्र धारण कर मिट्टी के मटके में पानी भरना चाहिए। पूरे दिन कुछ खाएं नहीं और अहोई माता का ध्यान करें।
बालक की उम्र के अनुसार उतने ही चांदी के मोती धागे में डालें और पूजा में रखें। शाम को अहोई माता की पूजा होती है और उन्हें भोग लगाया जाता है। भोग में पूरी, हलवा, चना आदि होता है। इस व्रत को तारे देखने के बाद खोला जाता है। इसमें भी बायना निकालकर सास, ननद या जेठानी को दिया जाता है। अहोई माता की माला को दिवाली तक गले में पहनना होता है। यह व्रत निर्जला रखा जाता है। इस दिन महिलाएं तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। पूजा में श्रद्धा मुख्य है।
विज्ञापन
ये है शुभ मुहूर्त
डॉ. सुरेश मिश्रा के अनुसार पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5:47 से 7:22 बजे तक है। इस समय व्रत की कथा सुनकर महिलाएं माता अहोई की पूजा करें। इसके बाद तारे निकलने पर उन्हें जल का अर्घ्य प्रदान करें और फिर भोजन करके व्रत का समापन करें। अहोई माता की पूजा करने के लिए गाय के घी में हल्दी मिलाकर दीपक तैयार करें, चंदन की धूप करें। देवी पर रोली, हल्दी व केसर चढ़ाएं। चावल की खीर का भोग लगाएं। पूजन के बाद भोग किसी गरीब कन्या को दान देने से शुभ फल मिलता है। जीवन से विपदाएं दूर करने के लिए महादेवी पर पीले कनेर के फूल चढ़ाएं। यथासंभव गरीबों को दान दें या भोजन कराएं।
विज्ञापन
पिपली। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को माता पार्वती के अहोई स्वरूप की पूजा का विधान है। इस तिथि को अहोई अष्टमी के रूप में पूजा जाता है। इस दिन भारतीय महिलाएं संतान प्राप्ति और संतान की समृद्धि के लिए व्रत करती हैं। सोमवार को पुनर्वसु नक्षत्र, चंद्रमा कर्क राशि और शिव योग में अहोई अष्टमी का व्रत माताएं रखेगी। यह जानकारी कॉस्मिक एस्ट्रो के डायरेक्टर व श्री दुर्गा देवी मंदिर के अध्यक्ष ज्योतिष व वास्तु विशेषज्ञ डॉ. सुरेश मिश्रा ने दी।
उन्होंने बताया कि अहोई का शाब्दिक अर्थ है, अनहोनी को होनी में बदलने वाली माता। इस संपूर्ण सृष्टि में अनहोनी या दुर्भाग्य को टालने वाली आदि शक्ति देवी पार्वती हैं, इसलिए इस दिन माता पार्वती की पूजा-अर्चना अहोई माता के रूप में की जाती है। उन्होंने बताया कि करवा चौथ की तरह इस व्रत में भी महिलाओं को सुबह उठकर स्नान करना चाहिए। स्वच्छ वस्त्र धारण कर मिट्टी के मटके में पानी भरना चाहिए। पूरे दिन कुछ खाएं नहीं और अहोई माता का ध्यान करें।
विज्ञापन
बालक की उम्र के अनुसार उतने ही चांदी के मोती धागे में डालें और पूजा में रखें। शाम को अहोई माता की पूजा होती है और उन्हें भोग लगाया जाता है। भोग में पूरी, हलवा, चना आदि होता है। इस व्रत को तारे देखने के बाद खोला जाता है। इसमें भी बायना निकालकर सास, ननद या जेठानी को दिया जाता है। अहोई माता की माला को दिवाली तक गले में पहनना होता है। यह व्रत निर्जला रखा जाता है। इस दिन महिलाएं तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। पूजा में श्रद्धा मुख्य है।
विज्ञापन
ये है शुभ मुहूर्त
डॉ. सुरेश मिश्रा के अनुसार पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5:47 से 7:22 बजे तक है। इस समय व्रत की कथा सुनकर महिलाएं माता अहोई की पूजा करें। इसके बाद तारे निकलने पर उन्हें जल का अर्घ्य प्रदान करें और फिर भोजन करके व्रत का समापन करें। अहोई माता की पूजा करने के लिए गाय के घी में हल्दी मिलाकर दीपक तैयार करें, चंदन की धूप करें। देवी पर रोली, हल्दी व केसर चढ़ाएं। चावल की खीर का भोग लगाएं। पूजन के बाद भोग किसी गरीब कन्या को दान देने से शुभ फल मिलता है। जीवन से विपदाएं दूर करने के लिए महादेवी पर पीले कनेर के फूल चढ़ाएं। यथासंभव गरीबों को दान दें या भोजन कराएं।