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पेस्टीसाइड विक्रेता का लाइसेंस रद्द करने की मांग को लेकर किसानों ने कृषि कार्यालय को घेरा
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तीन दिन पहले पेस्टीसाइड विक्रेता के गोदाम में बरामद 300 यूरिया के बैग को लेकर माहौल गरमा गया है। किसान यूनियन ने विक्रेता का लाइसेंस रद्द करने की मांग को लेकर कृषि विभाग के कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान किसानों ने अनाज मंडी में विभाग के कार्यालय के सामने जमकर नारेबाजी की तथा अधिकारियों को दफ्तर के अंदर ही घेर लिया।
सूचना पाकर सिटी थाना प्रभारी एसएचओ छोटू राम मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया, मगर किसान विभाग के बड़े अधिकारियों को बुलाकर आरोपी विक्रेता का लाइसेंस तुरंत रद्द करने की जिद पर अड़े रहे। किसान यूनियन के प्रधान कंवलजीत सिंह, प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच व सुखविंद्र सिंह व अन्य कई किसानों ने बताया कि उन्होंने तीन दिन पहले कृषि विभाग व पुलिस को सूचना देकर यूनियन ने एक पेस्टिसाइड विक्रेता के गोदाम से लगभग 300 बैग यूरिया की अवैध खेप को पकड़वाया था। उसके बाद विभाग ने विक्रेता के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई थी, मगर अभी तक न तो विक्रेता को अवैध स्टॉक रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और न ही उसका लाइसेंस रद्द किया गया।
किसान यूनियन ने जब कृषि विभाग के अधिकारियों से लाइसेंस रद्द करने की मांग की तो उनका जवाब सुनकर किसान भड़क गए। किसानों का आरोप है कि विभाग के एक बड़े अधिकारी ने उन्हें यह कहा कि लाइसेंस रद्द करना या नहीं करना विभाग की मर्जी है और गिरफ्तारी का काम पुलिस का है। आरोप है कि अधिकारी ने मिलीभगत के चलते रूखे रवैया में उनसे बात की, जिस कारण मजबूरन उन्हें दफ्तर का घेराव करना पड़ा। उधर, मामले को लेकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में थोड़ा समय लगता है। ई-मेल के जरिए अधिकारियों को सूचना भेजी गई है तथा अप्रूवल आने के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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सूचना पाकर सिटी थाना प्रभारी एसएचओ छोटू राम मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया, मगर किसान विभाग के बड़े अधिकारियों को बुलाकर आरोपी विक्रेता का लाइसेंस तुरंत रद्द करने की जिद पर अड़े रहे। किसान यूनियन के प्रधान कंवलजीत सिंह, प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच व सुखविंद्र सिंह व अन्य कई किसानों ने बताया कि उन्होंने तीन दिन पहले कृषि विभाग व पुलिस को सूचना देकर यूनियन ने एक पेस्टिसाइड विक्रेता के गोदाम से लगभग 300 बैग यूरिया की अवैध खेप को पकड़वाया था। उसके बाद विभाग ने विक्रेता के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई थी, मगर अभी तक न तो विक्रेता को अवैध स्टॉक रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और न ही उसका लाइसेंस रद्द किया गया।
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किसान यूनियन ने जब कृषि विभाग के अधिकारियों से लाइसेंस रद्द करने की मांग की तो उनका जवाब सुनकर किसान भड़क गए। किसानों का आरोप है कि विभाग के एक बड़े अधिकारी ने उन्हें यह कहा कि लाइसेंस रद्द करना या नहीं करना विभाग की मर्जी है और गिरफ्तारी का काम पुलिस का है। आरोप है कि अधिकारी ने मिलीभगत के चलते रूखे रवैया में उनसे बात की, जिस कारण मजबूरन उन्हें दफ्तर का घेराव करना पड़ा। उधर, मामले को लेकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में थोड़ा समय लगता है। ई-मेल के जरिए अधिकारियों को सूचना भेजी गई है तथा अप्रूवल आने के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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