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भूमिपुत्रों का उभरा दर्द, जमीं पर कोरोना की मार,आसमां से मौसम का प्रहार
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कोरोना के खिलाफ चल रही वैश्विक जंग में जहां हर वर्ग प्रभावित हुआ है,वहीं फसल खरीद के लिये अपनाई जा रही प्रक्रिया और मौसम के मिजाज से भूमिपुत्र त्रस्त हैं। सोमवार को सरकारी स्तर पर गेहूं की खरीद प्रक्रिया शुरू होने के दौरान जब इनका दर्द झलका तो परिस्थितियों के आगे असहाय नजर आए। इन किसानों का मानना है कि जमीं पर कोरोना वायरस की मार झेल रहे और आसमां से मौसम का प्रहार। सोमवार सुबह से मौसम एकदम साथ था, मगर दोपहर बाद काले बादलों के साथ और जमकर बिजली गरजी और हलकी बारिश शुरू होते ही देरी से शुरु हुई खरीद प्रक्रिया पहले ही दिन प्रभावित हो गई। किसान बोले कि समय रहते सरकार ने किसानों की स्थिति को नहीं समझा तो किसान वर्ग को
विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि मंडियों में फसल की आवक के दौरान जो नीति अपनाई जा रही है, वो किसानों के साथ साथ आढ़तियों के लिये भी परेशानी पैदा करने वाली है। हालांकि सरकार और जिला प्रशासन का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था के बीच कुरुक्षेत्र के खरीद केंद्रों पर सुचारु रुप से गेंहू खरीद शुरू हो चुकी है। खरीद और अन्य प्रबंधों के लेकर सोमवार को उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक ने किया अनाज मंडी शाहाबाद का निरीक्षण भी किया। डीसी के मुताबिक जिला में बनाए गये 188 खरीद केंद्रों पर लगभग 500 किसान सोमवार को फसल की आवक हुई है। डीसी और एसपी ने खरीद प्रक्रिया के दौरान आवश्यक दिशा-निर्देश के साथ सोशल डिस्टेसिंग का पालन करने की अपील भी किसानों और व्यापारियों से की है। बता दें कि हैफेड ने पहले दिन 4 हजार 485 क्विंटल गेहूं की खरीद तय समर्थन मूल्य पर की है।
बाक्स
किसानों का तर्क
किसानों का तर्क है कि कोरोना जैसे हालात के मद्देनजर जितनी मात्रा में फसल लाने की बात कही जा रही है, उससे छोटे जमींदारों का प्रभावित होना लाजिमी है। उन्होंने बताया कि जो मंडी का एक व्यापारी जो गेहूं के पूरे सीजन में 10 हजार बैग खरीदता था,उन्हें निर्देश हैं कि वे केवल तीन प्रतिशत ही एक दिन में ले सकता है, इससे किसान प्रभावित होंगे। उनके पास फसल रखने की पर्याप्त जगह नहीं है और ऊपर से मौसम के मिजाज से किसानों की नींद उड़ा रखी है।
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फसल रखने की जगह कहां है छोटे जमींदार के पास
जब मंडी व्यापारी कम खरीद करेंगे तो फसल को सुरक्षित रखने की बड़ी समस्या है। जिन भी कारणों से फसल की जो खरीद देरी से शुरू हुई है, उसके बाद खरीद केंद्रों पर फसल की आवक का सिलसिला लंबा खिंचेगा, जिससे अगली फसल की तैयारी भी प्रभावित होगी। किसानों ने बताया कि जहां पहले 20 अप्रैल तक खरीद लगभग समाप्ति हो जाती थी, वहीं इस बार कोरोना की वजह से खरीद 20 अप्रैल से शुरू हो रही है।
बाक्स
कंबाइन क्या एक दो एकड़ फसल की कटाई करेगी
किसानों के मुताबिक खेत मजदूरों का पहले ही टोटा है और कंबाइन से फसल का कटान एक साथ होता है,यदि सरकारी खरीद नीति पर अमल करते हुए कंबाइन से सारी फसल कटवाते हैं तो इससे बड़ी समस्या इसकी संभाल की पैदा होगी। इन्होंने बताया कि कंबाइन थोड़ी थोड़ी फसल के कटाने के लिये मिलना मुमकिन भी नहीं है। खरीद के बाद उनकी अदायगी कैसे होगी और इस दौरान अदायगी न होने से वह भुगतान कैसे करेंगे।
बाक्स
डीसी ने की आढ़तियों से चर्चा
डीसी ने आढ़तियों से कहा कि वे किसानों की फसलों को खरीदने में प्रशासन का सहयोग करे। प्रदेश सरकार द्वारा आढ़तियों की अधिकतर मांगों को पूरा करने का काम किया गया है। आढ़तियों ने हमेशा ही आगे आकर सरकार व प्रशासन का सहयोग करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि हर अनाज मंडी तथा खरीद सेंटर पर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए हैं ।
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विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि मंडियों में फसल की आवक के दौरान जो नीति अपनाई जा रही है, वो किसानों के साथ साथ आढ़तियों के लिये भी परेशानी पैदा करने वाली है। हालांकि सरकार और जिला प्रशासन का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था के बीच कुरुक्षेत्र के खरीद केंद्रों पर सुचारु रुप से गेंहू खरीद शुरू हो चुकी है। खरीद और अन्य प्रबंधों के लेकर सोमवार को उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक ने किया अनाज मंडी शाहाबाद का निरीक्षण भी किया। डीसी के मुताबिक जिला में बनाए गये 188 खरीद केंद्रों पर लगभग 500 किसान सोमवार को फसल की आवक हुई है। डीसी और एसपी ने खरीद प्रक्रिया के दौरान आवश्यक दिशा-निर्देश के साथ सोशल डिस्टेसिंग का पालन करने की अपील भी किसानों और व्यापारियों से की है। बता दें कि हैफेड ने पहले दिन 4 हजार 485 क्विंटल गेहूं की खरीद तय समर्थन मूल्य पर की है।
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किसानों का तर्क
किसानों का तर्क है कि कोरोना जैसे हालात के मद्देनजर जितनी मात्रा में फसल लाने की बात कही जा रही है, उससे छोटे जमींदारों का प्रभावित होना लाजिमी है। उन्होंने बताया कि जो मंडी का एक व्यापारी जो गेहूं के पूरे सीजन में 10 हजार बैग खरीदता था,उन्हें निर्देश हैं कि वे केवल तीन प्रतिशत ही एक दिन में ले सकता है, इससे किसान प्रभावित होंगे। उनके पास फसल रखने की पर्याप्त जगह नहीं है और ऊपर से मौसम के मिजाज से किसानों की नींद उड़ा रखी है।
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फसल रखने की जगह कहां है छोटे जमींदार के पास
जब मंडी व्यापारी कम खरीद करेंगे तो फसल को सुरक्षित रखने की बड़ी समस्या है। जिन भी कारणों से फसल की जो खरीद देरी से शुरू हुई है, उसके बाद खरीद केंद्रों पर फसल की आवक का सिलसिला लंबा खिंचेगा, जिससे अगली फसल की तैयारी भी प्रभावित होगी। किसानों ने बताया कि जहां पहले 20 अप्रैल तक खरीद लगभग समाप्ति हो जाती थी, वहीं इस बार कोरोना की वजह से खरीद 20 अप्रैल से शुरू हो रही है।
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कंबाइन क्या एक दो एकड़ फसल की कटाई करेगी
किसानों के मुताबिक खेत मजदूरों का पहले ही टोटा है और कंबाइन से फसल का कटान एक साथ होता है,यदि सरकारी खरीद नीति पर अमल करते हुए कंबाइन से सारी फसल कटवाते हैं तो इससे बड़ी समस्या इसकी संभाल की पैदा होगी। इन्होंने बताया कि कंबाइन थोड़ी थोड़ी फसल के कटाने के लिये मिलना मुमकिन भी नहीं है। खरीद के बाद उनकी अदायगी कैसे होगी और इस दौरान अदायगी न होने से वह भुगतान कैसे करेंगे।
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डीसी ने की आढ़तियों से चर्चा
डीसी ने आढ़तियों से कहा कि वे किसानों की फसलों को खरीदने में प्रशासन का सहयोग करे। प्रदेश सरकार द्वारा आढ़तियों की अधिकतर मांगों को पूरा करने का काम किया गया है। आढ़तियों ने हमेशा ही आगे आकर सरकार व प्रशासन का सहयोग करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि हर अनाज मंडी तथा खरीद सेंटर पर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए हैं ।