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गेहूं की अच्छी ग्रोथ के साथ-साथ सूरजमुखी, टमाटर, बैंगन, मिर्च और खीरा की बुवाई के लिए काफी फायदेमंद है यह मौसम
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पूरी तरह से मौसम में बदलाव हो चुका है। सुबह-शाम ठिठुरन और दिन में अच्छी धूप खिल रही है। तापमान भी 10 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने लगा है। कृषि एवं सब्जी विशेषज्ञ इस मौसम को गेहूं की अच्छी ग्रोथ के साथ-साथ सूरजमुखी, टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च और खीरा सहित अन्य सब्जी की बुवाई/बिजाई के लिए काफी फायदेमंद बता रहे हैं।
सब्जी विशेषज्ञ डॉ. सीबी सिंह ने बताया कि सुबह-शाम ठंड के साथ-साथ दिनभर अच्छी धूप खिल रही है। किसान इस मौसम का भरपूर फायदा उठाए और सूरजमुखी की बुवाई शुरू कर दें। इस समय बुवाई करने पर मई के अंत पर जून के पहले सप्ताह तक फसल पक कर तैयार होगी। अगर देर से बुवाई होगी तो फसल के पकने पर बारिश शुरू हो जाती है। इससे दानों का नुकसान होगा। इसलिए किसान सूरजमुखी की बुवाई करने में देरी न करें। बताया कि पहली सिंचाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद हल्की या स्प्रिंकलर से करें। इससे पानी की भी बचत होगी और फसल की ग्रोथ भी अच्छी होगी। इसके पश्चात आवश्यकतानुसार 10 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें। इसके साथ-साथ किसान टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च, तोरी, हरी मिर्च, खीरा, ककड़ी और खरबूजे की फसलों की बुवाई अभी से शुरू कर सकते हैं। ऐसे मौसम में पौधा जमीन में अच्छी पकड़ बनाता है। इसलिए किसान इस मौसम का फायदा उठाएं।
उधर, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रदीप मील का कहना है कि पीली हुई गेहूं को पीला रतुआ न समझें, बल्कि कृषि वैज्ञानिक से जांच कराएं। पिछले दिनों हुई बारिश के कारण भी गेहूं की फसल पीली दिखाई देने लग जाती है। इसका मतलब यह नहीं कि वह पीला रतुआ की बीमारी है। किसान सतर्क रहे, न कि बिना जरूरत के दवाइयों का छिड़काव करें। बताया कि गेहूं की फसल में हल्दी के चूर्ण जैसा दिखने वाला पाउडर पीता रतुआ का कारण है, जो फसलों की पैदावार में रुकावट पैदा करता है।
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सब्जी विशेषज्ञ डॉ. सीबी सिंह ने बताया कि सुबह-शाम ठंड के साथ-साथ दिनभर अच्छी धूप खिल रही है। किसान इस मौसम का भरपूर फायदा उठाए और सूरजमुखी की बुवाई शुरू कर दें। इस समय बुवाई करने पर मई के अंत पर जून के पहले सप्ताह तक फसल पक कर तैयार होगी। अगर देर से बुवाई होगी तो फसल के पकने पर बारिश शुरू हो जाती है। इससे दानों का नुकसान होगा। इसलिए किसान सूरजमुखी की बुवाई करने में देरी न करें। बताया कि पहली सिंचाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद हल्की या स्प्रिंकलर से करें। इससे पानी की भी बचत होगी और फसल की ग्रोथ भी अच्छी होगी। इसके पश्चात आवश्यकतानुसार 10 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें। इसके साथ-साथ किसान टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च, तोरी, हरी मिर्च, खीरा, ककड़ी और खरबूजे की फसलों की बुवाई अभी से शुरू कर सकते हैं। ऐसे मौसम में पौधा जमीन में अच्छी पकड़ बनाता है। इसलिए किसान इस मौसम का फायदा उठाएं।
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उधर, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रदीप मील का कहना है कि पीली हुई गेहूं को पीला रतुआ न समझें, बल्कि कृषि वैज्ञानिक से जांच कराएं। पिछले दिनों हुई बारिश के कारण भी गेहूं की फसल पीली दिखाई देने लग जाती है। इसका मतलब यह नहीं कि वह पीला रतुआ की बीमारी है। किसान सतर्क रहे, न कि बिना जरूरत के दवाइयों का छिड़काव करें। बताया कि गेहूं की फसल में हल्दी के चूर्ण जैसा दिखने वाला पाउडर पीता रतुआ का कारण है, जो फसलों की पैदावार में रुकावट पैदा करता है।
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