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एक साल बाद आंदोलन खत्म कर किसानों की होगी घर वापसी
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संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से आंदोलन की समाप्ति की घोषणा के बाद किसान पूरे एक साल बाद 11 दिसंबर को घर वापसी करेंगे। ये किसान जिले में हिसार चंडीगढ़ हाईवे के दो टोल प्लाजा पर पिछले करीब एक साल से धरना दे रहे थे। वीरवार को सरकार द्वारा सरकार द्वारा किसानों की अन्य मांग मानने से किसानों में खुशी है।
बता दें कि तीन कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन के शुरू होते ही किसान टोल प्लाजों पर डट गए थे और टोल प्लाजा को सभी के लिए निशुल्क कर दिया था। जिससे टोल प्लाजा का ठेका लेने वाली कंपनी को काफी नुकसान उठाना पड़ा। अब कृषि कानूनों के वापसी और किसानों की सभी मांगे पूरी होने के बाद 11 दिसंबर से किसानों की घर वापसी के साथ टोल प्लाजा भी शुरू हो जाएंगे।
सैनी माजरा टोल संघर्ष समिति के उपप्रधान मनजीत सिंह ने कहा कि एक साल की लंबी लड़ाई लड़ने के बाद आखिरकार किसानों की जीत हुई है। उन्होंने बताया कि दिल्ली बॉर्डर से किसानों के रवाना होते हुए सभी टोल प्लाजा पर धरना दे रहे किसान भी अपने अपने घरों को वापस लौट जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस आंदोलन में किसानों ने अपने बहुत से भाइयों को खो दिया। इस जीत का श्रेय आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को ही जाता है। किसान गुरजीत सिंह ने कहा कि तीनों कृषि कानून वापस लेने के साथ किसानों की सभी मांगे सरकार द्वारा मानी जाने से किसानों में काफी खुशी व उत्साह है। सुखबीर सिंह ने कहा कि किसानों ने भीषण गर्मी, बरसात व ठंड के मौसम की मार के साथ साथ पुलिस की मार सहते हुए अपनी तपस्या भंग नहीं की। किसान रोहित लांबा ने कहा कि किसानों की जीत होने से अब किसान गौरव के साथ अपने घरों की वापसी करेंगे। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा किसान आंदोलन की समाप्ति की घोषणा के बाद खेल राज्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन भावनाओं को देखते हुए जनता की मांग पर निर्णय लिया है। कृषि क्षेत्र को घाटे से उबारने के लिए बदलाव जरूरी था लेकिन किसानों को इन कानूनों के फायदे समझाने में कसर रह गई। इसका सीधा फायदा विपक्षी दलों ने भी भोले-भाले किसानों को गुमराह करके उठाया। लोकतंत्र में जन भावनाएं ही सर्वोपरि होती हैं जिन्हें देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की हर मांग को सम्मान पूर्वक मानते हुए शांति का माहौल कायम करने की दिशा में प्रयास किया है। आशा जताई कि जो मनमुटाव गिले-शिकवे किसानों के मन में थे। अब उन्हें मिलजुल कर दूर करके फिर से शांति का माहौल तैयार करने की दिशा में प्रयास किया जाएगा।
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बता दें कि तीन कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन के शुरू होते ही किसान टोल प्लाजों पर डट गए थे और टोल प्लाजा को सभी के लिए निशुल्क कर दिया था। जिससे टोल प्लाजा का ठेका लेने वाली कंपनी को काफी नुकसान उठाना पड़ा। अब कृषि कानूनों के वापसी और किसानों की सभी मांगे पूरी होने के बाद 11 दिसंबर से किसानों की घर वापसी के साथ टोल प्लाजा भी शुरू हो जाएंगे।
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सैनी माजरा टोल संघर्ष समिति के उपप्रधान मनजीत सिंह ने कहा कि एक साल की लंबी लड़ाई लड़ने के बाद आखिरकार किसानों की जीत हुई है। उन्होंने बताया कि दिल्ली बॉर्डर से किसानों के रवाना होते हुए सभी टोल प्लाजा पर धरना दे रहे किसान भी अपने अपने घरों को वापस लौट जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस आंदोलन में किसानों ने अपने बहुत से भाइयों को खो दिया। इस जीत का श्रेय आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को ही जाता है। किसान गुरजीत सिंह ने कहा कि तीनों कृषि कानून वापस लेने के साथ किसानों की सभी मांगे सरकार द्वारा मानी जाने से किसानों में काफी खुशी व उत्साह है। सुखबीर सिंह ने कहा कि किसानों ने भीषण गर्मी, बरसात व ठंड के मौसम की मार के साथ साथ पुलिस की मार सहते हुए अपनी तपस्या भंग नहीं की। किसान रोहित लांबा ने कहा कि किसानों की जीत होने से अब किसान गौरव के साथ अपने घरों की वापसी करेंगे। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा किसान आंदोलन की समाप्ति की घोषणा के बाद खेल राज्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन भावनाओं को देखते हुए जनता की मांग पर निर्णय लिया है। कृषि क्षेत्र को घाटे से उबारने के लिए बदलाव जरूरी था लेकिन किसानों को इन कानूनों के फायदे समझाने में कसर रह गई। इसका सीधा फायदा विपक्षी दलों ने भी भोले-भाले किसानों को गुमराह करके उठाया। लोकतंत्र में जन भावनाएं ही सर्वोपरि होती हैं जिन्हें देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की हर मांग को सम्मान पूर्वक मानते हुए शांति का माहौल कायम करने की दिशा में प्रयास किया है। आशा जताई कि जो मनमुटाव गिले-शिकवे किसानों के मन में थे। अब उन्हें मिलजुल कर दूर करके फिर से शांति का माहौल तैयार करने की दिशा में प्रयास किया जाएगा।
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