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Kurukshetra News: कैथल व पटियाला के बाद कुरुक्षेत्र में भी पैदा की जाने लगी सलेहरी, खुशबू से महकी लाडवा अनाजमंडी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 May 2024 04:45 AM IST
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After Kaithal and Patiala, Salehari started being produced in Kurukshetra also, Ladwa grain market smelled with fragrance.
संजीव शर्मा
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लाडवा। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी लाडवा अनाज मंडी सलेहरी औषधि की खुशबू से महक उठी है। हरियाणा और पंजाब की सीमा कैथल और पटियाला से औषधि की यह फसल पहुंचनी शुरू हो गई है जबकि इस फसल की बुवाई अब कुरुक्षेत्र जिले में भी कुछ किसानों द्वारा की जाने लगी है। पूरे उत्तर भारत में लाडवा और अमृतसर की अनाज मंडी में बिक्री के लिए सलेहरी की फसल आती है।
लाडवा अनाज मंडी भी एशिया की प्रमुख अनाज मंडी में से एक है। यहां इस औषधि की फसल हर वर्ष लगभग 15 हजार से 20 हजार बोरी किसानों द्वारा बिक्री के लिए लाई जाती है, जिसकी कारोबारियों द्वारा खरीद की जाती है। अब अनाज मंडी में लगभग 500 से एक हजार बोरी सलेहरी आ चुकी है, जिसको व्यापारियों द्वारा 7200 रुपए से लेकर 8500 रुपए प्रति क्विंटल तक खरीदा जा रहा है। मंडी व्यापारियों ने बताया कि इस फसल का एशिया के अन्य देशों में निर्यात किया जाता है। इसका तेल निकाल कर देशी दवाइयां बनाने में प्रयोग किया जाता है और खाद्य सामग्री को लंबे समय तक ठीक रखने के लिए भी इस औषधि का प्रयोग किया जाता है।
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योग्य मजदूर ही कर सकते हैं औषधि फसल की साफ सफाई
व्यापारियों ने बताया कि इस औषधि की साफ सफाई का काम योग्य मजदूरों द्वारा ही किया जा सकता है। सबसे पहले मजदूरों द्वारा इस फसल को बड़े पंखों के आगे झरनी द्वारा उड़ा कर साफ किया जाता है। उसके बाद इसमें तिनका व मिट्टी निकालने के लिए अलग-अलग झरनी का प्रयोग किया जाता है। फसल की सफाई और गुणवत्ता के आधार पर ही किसानों को इसका मूल्य मिलता है।
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हरे और भूरे रंग की खुशबूदार औषधि होती है सलेहरी
सलेहरी औषधि हरे और भूरे रंग की खुशबूदार औषधि है और यह देखने में अजवायन जैसी लगती है। यह देसी दवाइयां बनाने और खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए प्रयोग होता है। बताया जाता है कि कुछ लोग इसे हड्डियों और जोड़ों के दर्द में दवा के रूप में प्रयोग करते हैं। कुछ लोग इसे बूटी भी कहते हैं। क्योंकि इससे भयंकर बीमारियों को दूर करने की दवाई बनाई जाती है।





किसानों के लिए फायदे का सौदा मानी जाती है सलेहरी
किसानों के लिए सलेहरी औषधि व मटर की पैदावार करना फायदे का सौदा है। इन फसलों की निकासी का समय छह महीने का है। मटर सब्जी की फसल तीन महीने में तैयार हो जाती है। जिसको तीन महीने बाद मंडी में बेच दिया जाता है। उस समय के बाजार भाव के हिसाब से लगभग 30 हजार से 50 हजार रुपए तक प्रति एकड़ के हिसाब से मटर सब्जी बिक जाती है। तीन महीने के बाद सलेहरी औषधि की फसल तैयार हो जाती है। इस फसल की छह से आठ क्विंटल प्रति एकड़ निकासी होती है। यह फसल लगभग 50 हजार से 60 हजार प्रति एकड़़ तक बिक जाती है। किसान अमरीक सिंह, करनैल सिंह, अमरजीत सिंह, निदान सिंह, कर्मवीर, जयपाल आदि का कहना है कि इस फसल की बिजाई अक्टूबर- नवंबर में की जाती है।
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