{"_id":"ed8cea8fb3827ec674933d7dbd259f78","slug":"administrative-officers-forget-geeta-janmsthali-jyotisar-terth-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गीता जन्म स्थली पर ही नहीं जला दीया ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गीता जन्म स्थली पर ही नहीं जला दीया
Updated Mon, 21 Dec 2015 12:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुरुक्षेत्र को गीता की जन्मस्थली मानते हुए इस बार गीता जयंती को वृह्द स्तर पर मनाने के दावे शासन स्तर से किए गए थे। इस सब के बीच जिला प्रशासन गीता की जन्मस्थली ज्योतिसर को ही भूल गया। केडीबी ने सारा ध्यान केवल ब्रह्मसरोवर पर लगा दिया। दू
सरी ओर गीता की जन्मस्थली की पूरी तरह उपेक्षा कर दी गई। केडीबी ने यहां न तो सफाई करवाई और न ही गीता जयंती के होर्डिंग ही लगवाए। केडीबी के ज्योतिसर तीर्थ की अनदेखी करने से ज्योतिसर के निवासी ही नहीं, बल्कि शहर की कई धार्मिक संस्थाएं अपने को आहत महसूस कर रही हैं।
ब्रह्मसरोवर पर दो दिन से राज्यस्तरीय कुरुक्षेत्र उत्सव गीता जयंती समारोह चल रहा है। इसको लेकर जिला प्रशासन, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड और भाजपा सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए थे। दावों के बीच आयोजकों ने गीता की जन्मस्थली ज्योतिसर तीर्थ की पूरी तरह से उपेक्षा कर दी।
विज्ञापन
ब्रह्मसरोवर से महज 5.5 किमी. की दूरी पर स्थित गीता का उपदेश भगवान श्री कृष्ण ने ज्योतिसर की भूमि पर ही दिया था। इस स्थान पर गीता उपदेश के साक्षी बने वट वृक्ष भी हैं। दावा किया जाता है कि इनकी आयु साढ़े पांच हजार वर्ष से अधिक हो चुकी है।
इतना महत्व रखने के बाद भपी इस तीर्थ पर न तो केडीबी ने और न ही जिला प्रशासन ने ध्यान दिया। आयोजकों ने यहां कोई कार्यक्रम तक नहीं रखा। यहां की सफाई तक नहीं करवाई गई। यहां के पवित्र सरोवर के जल से दुर्गंध आ रही है। गीता साक्षी बने वट वृक्षों के प्लेट फार्म पर जानवर सो रहे हैं। हालांकि, तीर्थ यात्री यहां दर्शन करने पहुंच रहे हैं।
केडीबी के गीता जन्मस्थली पर कार्यक्रम का आयोजन न करने के बारे में जानकारी नहीं है। यदि गीता जन्मस्थली की ही अनदेखी की गई है, तो यह गलत है। इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। जिला प्रशासन और सरकार को गीता जन्मस्थली पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए। गीता जयंती समारोह में हर वर्ष वहां कार्यक्रम किया जाता था।
अशोक अरोड़ा, पूर्व विधायक एवं इनेलो प्रदेश अध्यक्ष।
गीता जन्मस्थली ज्योतिसर तीर्थ की उपेक्षा ठीक नहीं है। वहां कार्यक्रम क्यों आयोजित नहीं किए जा रहे हैं, इसके बारे में केडीबी की सीईओ से बात करूंगा। इस पर संज्ञान लिया जाएगा। वहां पर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
सुभाष सुधा, विधायक, थानेसर।
विज्ञापन
सरी ओर गीता की जन्मस्थली की पूरी तरह उपेक्षा कर दी गई। केडीबी ने यहां न तो सफाई करवाई और न ही गीता जयंती के होर्डिंग ही लगवाए। केडीबी के ज्योतिसर तीर्थ की अनदेखी करने से ज्योतिसर के निवासी ही नहीं, बल्कि शहर की कई धार्मिक संस्थाएं अपने को आहत महसूस कर रही हैं।
विज्ञापन
ब्रह्मसरोवर पर दो दिन से राज्यस्तरीय कुरुक्षेत्र उत्सव गीता जयंती समारोह चल रहा है। इसको लेकर जिला प्रशासन, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड और भाजपा सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए थे। दावों के बीच आयोजकों ने गीता की जन्मस्थली ज्योतिसर तीर्थ की पूरी तरह से उपेक्षा कर दी।
विज्ञापन
ब्रह्मसरोवर से महज 5.5 किमी. की दूरी पर स्थित गीता का उपदेश भगवान श्री कृष्ण ने ज्योतिसर की भूमि पर ही दिया था। इस स्थान पर गीता उपदेश के साक्षी बने वट वृक्ष भी हैं। दावा किया जाता है कि इनकी आयु साढ़े पांच हजार वर्ष से अधिक हो चुकी है।
इतना महत्व रखने के बाद भपी इस तीर्थ पर न तो केडीबी ने और न ही जिला प्रशासन ने ध्यान दिया। आयोजकों ने यहां कोई कार्यक्रम तक नहीं रखा। यहां की सफाई तक नहीं करवाई गई। यहां के पवित्र सरोवर के जल से दुर्गंध आ रही है। गीता साक्षी बने वट वृक्षों के प्लेट फार्म पर जानवर सो रहे हैं। हालांकि, तीर्थ यात्री यहां दर्शन करने पहुंच रहे हैं।
केडीबी के गीता जन्मस्थली पर कार्यक्रम का आयोजन न करने के बारे में जानकारी नहीं है। यदि गीता जन्मस्थली की ही अनदेखी की गई है, तो यह गलत है। इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। जिला प्रशासन और सरकार को गीता जन्मस्थली पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए। गीता जयंती समारोह में हर वर्ष वहां कार्यक्रम किया जाता था।
अशोक अरोड़ा, पूर्व विधायक एवं इनेलो प्रदेश अध्यक्ष।
गीता जन्मस्थली ज्योतिसर तीर्थ की उपेक्षा ठीक नहीं है। वहां कार्यक्रम क्यों आयोजित नहीं किए जा रहे हैं, इसके बारे में केडीबी की सीईओ से बात करूंगा। इस पर संज्ञान लिया जाएगा। वहां पर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
सुभाष सुधा, विधायक, थानेसर।