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Kurukshetra News: अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में दिखा लोक संस्कृति का बेजोड़ संगम
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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में मंगलवार को शिल्प मेले में 100 स्टॉल बंद होने के चल
- फोटो : Samvad
कुरुक्षेत्र। पावन ब्रह्मसरोवर तट पर चल रहे अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में देश की लोक संस्कृति का बेजोड़ संगम देखने को मिल रहा है। महोत्सव के 10वें दिन ब्रह्मसरोवर के घाट रंग-बिरंगी वेशभूषा, लोकगीतों की मधुर धुन और पारंपरिक नृत्यों की थाप से दिनभर गुंजायमान रहे। जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, राजस्थान और उत्तराखंड से आए कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।
महोत्सव के मुख्य मंचों पर कलाकारों ने अपने प्रदेश की लोक विरासत को नृत्य और संगीत के माध्यम से सजीव किया। वहीं दूसरी ओर ब्रह्मसरोवर के किनारे घूमते लोक कलाकारों ने वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनियों से वातावरण को और अधिक रमणीय बनाया। सपेरा बीन पार्टी ने अपनी पारंपरिक बीन, ढोल और तुंबे की मनमोहक लय से हर किसी को आकर्षित किया। बुजुर्ग कलाकारों की अद्भुत कला को देखकर लोग न केवल मंत्रमुग्ध हुए बल्कि उनके साथ थिरकने को भी मजबूर हो गए। ये कलाकार अपनी प्रस्तुति इटली और दुबई जैसे देशों में भी दे चुके हैं और वर्षों से गीता महोत्सव का हिस्सा रहे हैं। सुरक्षा की दृष्टि से पुरुषोत्तमपुरा बाग की ओर जाने वाला रास्ता बंद रहा। इसके चलते पर्यटक हरियाणा पैवेलियन, मध्यप्रदेश पैवेलियन और मां कात्यायनी मंदिर, द्रौपदी कूप के दर्शन नहीं कर पाए।
शिल्प और सरस मेले में रही रौनक
महोत्सव के सरस और शिल्प मेले ने भी देश की कला, संस्कृति और ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों की अनूठी झलक प्रस्तुत की। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केंद्र की ओर से बुलाए गए शिल्पकारों के साथ-साथ हरियाणा के सभी जिलों से आए सेल्फ हेल्प ग्रुप के उत्पादों ने लोगों की खूब वाहवाही बटोरी। मिट्टी, बांस, लकड़ी, कपड़े और धातु से बने हस्तशिल्पों की खरीदारी के लिए सुबह से ही भीड़ उमड़ी। प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए सुरक्षा कारणों से पुरुषोत्तमपुरा बाग रोड के साथ लगती शिल्प व सरस मेले की सभी स्टॉल शाम के समय बंद रहीं। दिन के समय नंबर एक से 100 स्टॉल बंद रहीं।
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महोत्सव के मुख्य मंचों पर कलाकारों ने अपने प्रदेश की लोक विरासत को नृत्य और संगीत के माध्यम से सजीव किया। वहीं दूसरी ओर ब्रह्मसरोवर के किनारे घूमते लोक कलाकारों ने वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनियों से वातावरण को और अधिक रमणीय बनाया। सपेरा बीन पार्टी ने अपनी पारंपरिक बीन, ढोल और तुंबे की मनमोहक लय से हर किसी को आकर्षित किया। बुजुर्ग कलाकारों की अद्भुत कला को देखकर लोग न केवल मंत्रमुग्ध हुए बल्कि उनके साथ थिरकने को भी मजबूर हो गए। ये कलाकार अपनी प्रस्तुति इटली और दुबई जैसे देशों में भी दे चुके हैं और वर्षों से गीता महोत्सव का हिस्सा रहे हैं। सुरक्षा की दृष्टि से पुरुषोत्तमपुरा बाग की ओर जाने वाला रास्ता बंद रहा। इसके चलते पर्यटक हरियाणा पैवेलियन, मध्यप्रदेश पैवेलियन और मां कात्यायनी मंदिर, द्रौपदी कूप के दर्शन नहीं कर पाए।
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शिल्प और सरस मेले में रही रौनक
महोत्सव के सरस और शिल्प मेले ने भी देश की कला, संस्कृति और ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों की अनूठी झलक प्रस्तुत की। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केंद्र की ओर से बुलाए गए शिल्पकारों के साथ-साथ हरियाणा के सभी जिलों से आए सेल्फ हेल्प ग्रुप के उत्पादों ने लोगों की खूब वाहवाही बटोरी। मिट्टी, बांस, लकड़ी, कपड़े और धातु से बने हस्तशिल्पों की खरीदारी के लिए सुबह से ही भीड़ उमड़ी। प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए सुरक्षा कारणों से पुरुषोत्तमपुरा बाग रोड के साथ लगती शिल्प व सरस मेले की सभी स्टॉल शाम के समय बंद रहीं। दिन के समय नंबर एक से 100 स्टॉल बंद रहीं।
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