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भावांतर भरपाई योजना से सब्जी उत्पादक किसान होंगे जोखिम मुक्त
Updated Wed, 03 Jan 2018 12:05 AM IST
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भावांतर भरपाई योजना से सब्जी उत्पादक किसान होंगे जोखिम मुक्त
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
सब्जी काश्तकारों को जोखिम मुक्त करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने भावांतर भरपाई योजना की शुरुआत की हैं। जिले में इस योजना को सुचारु ढंग से लागू करने के लिए संबंधित विभागों ने कार्य शुरू कर दिया हैं। डीसी सुमेधा कटारिया ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य सब्जी काश्तकारों को जोखिम मुक्त करना है। इसके तहत यदि किसान की फसल तय एमएसपी से कम दाम पर बिकती है तो उसकी भरपाई राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। इस योजना में टमाटर और आलू के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल, प्याज और फूल गोभी के लिए 500 रुपये प्रति क्विंटल संरक्षित मूल्य तय किया गया है।
भावांतर योजना की शुरुआत मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने करनाल के गांगर गांव से 30 दिसंबर को भावांतर भरपाई ई-पोर्टल लांच करके की थी। इस योजना से किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। फसलों के विविधीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। जिला बागवानी अधिकारी जोगिंद्र बिसला ने बताया कि किसानों को इस योजना का लाभ लेने के लिए बिजाई के समय ही मार्केटिंग बोर्ड की वेबसाइट पर बागवानी भावांतर योजना पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण करवाना होगा। उद्यान विभाग के अधिकारी किसान के क्षेत्र का निरीक्षण करेंगे। पंजीकरण बिल्कुल नि:शुल्क होगा। पंजीकरण होने के बाद किसान के पास एसएमएस के माध्यम से सूचना आएगी। किसान को अपनी फसल जे-फार्म के माध्यम से बेचनी होगी। बिक्री का विवरण बीबीवाई पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इसकी सुविधा सभी मार्केट कमेटियों में उपलब्ध होगी। बिक्री के तय समय में किसान को तय रेट से कम भाव मिलता है तो वह भरपाई के लिए पात्र होगा। भरपाई की राशि किसान के बैंक खाते में 15 दिन के अंदर जमा करवाने का प्रावधान रहेगा। किसानों की सुविधा के लिए थानेसर मंडी में हेल्प डेस्क सेंटर भी स्थापित किया गया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
सब्जी काश्तकारों को जोखिम मुक्त करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने भावांतर भरपाई योजना की शुरुआत की हैं। जिले में इस योजना को सुचारु ढंग से लागू करने के लिए संबंधित विभागों ने कार्य शुरू कर दिया हैं। डीसी सुमेधा कटारिया ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य सब्जी काश्तकारों को जोखिम मुक्त करना है। इसके तहत यदि किसान की फसल तय एमएसपी से कम दाम पर बिकती है तो उसकी भरपाई राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। इस योजना में टमाटर और आलू के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल, प्याज और फूल गोभी के लिए 500 रुपये प्रति क्विंटल संरक्षित मूल्य तय किया गया है।
भावांतर योजना की शुरुआत मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने करनाल के गांगर गांव से 30 दिसंबर को भावांतर भरपाई ई-पोर्टल लांच करके की थी। इस योजना से किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। फसलों के विविधीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। जिला बागवानी अधिकारी जोगिंद्र बिसला ने बताया कि किसानों को इस योजना का लाभ लेने के लिए बिजाई के समय ही मार्केटिंग बोर्ड की वेबसाइट पर बागवानी भावांतर योजना पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण करवाना होगा। उद्यान विभाग के अधिकारी किसान के क्षेत्र का निरीक्षण करेंगे। पंजीकरण बिल्कुल नि:शुल्क होगा। पंजीकरण होने के बाद किसान के पास एसएमएस के माध्यम से सूचना आएगी। किसान को अपनी फसल जे-फार्म के माध्यम से बेचनी होगी। बिक्री का विवरण बीबीवाई पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इसकी सुविधा सभी मार्केट कमेटियों में उपलब्ध होगी। बिक्री के तय समय में किसान को तय रेट से कम भाव मिलता है तो वह भरपाई के लिए पात्र होगा। भरपाई की राशि किसान के बैंक खाते में 15 दिन के अंदर जमा करवाने का प्रावधान रहेगा। किसानों की सुविधा के लिए थानेसर मंडी में हेल्प डेस्क सेंटर भी स्थापित किया गया है।
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