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जेलों में बंद सिखों की रिहाई के लिए गुरबख्श सिंह खालसा ने 75 फीट उंची पानी की टंकी से लगाई छलांग
Updated Wed, 21 Mar 2018 12:44 AM IST
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सजा पूरी कर चुके जेलों में बंद सिखों की रिहाई के लिए दोपहर में शुरू किया आमरण अनशन, रात में 75 फीट ऊंची टंकी से कूदे गुरबख्श, मौत
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र/इस्माईलाबाद। देश की विभिन्न जेलों में बंद सिखों की रिहाई की मांग कर रहे गांव ठसका अली वासी गुरबख्श सिंह खालसा गांव में ही स्थित करीब 75 फीट की उंची पानी की टंकी से कूद गए। पुलिस ने उन्हें गंभीर हालत में उपचार के लिए एलएनजेपी अस्पताल पहुंचाया। रात नौ बजे के करीब वहां उनकी उपचार के दौरान मौत हो गई। इससे पहले प्रशासन और पुलिस के अधिकारी करीब छह घंटे से उन्हें टंकी से नीचे उतारने का प्रयास कर रहे थे। इस्माईलाबाद थाने के प्रभारी दिनेश चौहाने बताया कि गुरबख्श के शव का पोस्टमार्टम बुधवार को कराया जाएगा।
सिखों की रिहाई की मांग को लेकर पहले भी संघर्ष कर चुके गुरबख्श सिंह मंगलवार को दोपहर करीब एक बजे पानी की टंकी पर चढ़ गए और अमरण अनशन शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर पिहोवा डीएसपी धीरज कुमार, इस्माईलाबाद थाना प्रभारी दिनेश चौहान, झांसा थाना प्रभारी दलीप कुमार मौके पर पहुंचे और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी मौके पर मंगवाई गई। पुलिस अधिकारी गुरबख्श से टंकी से नीचे उतरने के लिए अपील करते रहे, लेकिन वे सिख बंदियों की रिहाई करने की मांग पर अड़े रहे। बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने टंकी पर चढ़ने के लिए टंकी के प्रवेश द्वार पर लगे ताले को तोड़ने का भी प्रयास किया। इस पर गुरबख्श सिंह ने टंकी से पेट्रोल की दो बोतल और एक कैप्सूल दिखा कर चेतावनी दी कि उनके पास सायनाइड है। यदि उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की गई, तो फिर वे कैप्सूल खा लेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अपने पास रखी पेट्रोल की दो बोतल दिखाते हुए आत्मदाह की चेतावनी भी प्रशासन को दी। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सहम गए और टंकी पर चढ़े गुरबख्श को मानाने का प्रयास करते रहे। इसी दौरान देर शाम करीब सात बजे उन्होंने टंकी से छलांग लगा दी। इसमें उनका सिर दीवार से भी टकरा गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। नीचे गिरते ही वह बेहोश हो गए। पुलिस ने उन्हें तत्काल एलएनजेपी सिविल अस्पताल पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने उन्हें उपचार के दौरान मृत घोषित कर दिया।
टंकी पर चिपकाए पोस्टर, लिखा मेरे साथ कुछ हुआ तो सरकार और प्रशासन होगा जिम्मेदार
कुरुक्षेत्र/इस्माईलाबाद। गुरबख्श सिंह ने पहले टंकी पर दो पोस्टर चिपकाए थे। एक पोस्टर में जगतार सिंह हवारा को नाजायज तौर पर तिहाड़ जेल दिल्ली में रखने पर सवाल किया गया था। साथ ही उसे पंजाब तबदील करने की मांग भी की गई थी। इसी पोस्टर में कानून की तरफ से दी गई सजा भुगत चुके बंदी सिख कैदियों को तुरंत छोड़ने और श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग भी की गई थी। इस पोस्टर के अंत में आर-पार की लड़ाई मरणव्रत 20 मार्च 2018 लिखा गया था। दूसरे पोस्टर पर लिखा गया था कि मेरे शांतिपूर्वक संघर्ष के दौरान मेरे या मेरे साथियों के साथ कुछ गलत किया गया, तो उसका जिम्मेदार हिंदुस्तान सरकार और प्रशासन होगा। मेरा बेटा जुझार सिंह मेरी जायदाद का मालिक रहेगा, लेकिन मेरे जज्बातों का नहीं है। मेरे परिवार की ओर से किसी भी दिए गए बयान का मेरे साथ कोई वास्ता नहीं है।
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एक साल से बंद पड़ी थी टंकी : खंडूजा
जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सइएन अशोक खंडूजा का कहना है कि यहां पानी का ट्यूबवेल करीब एक वर्ष से ठप हो गया था। इसके चलते यह टंकी भी बंद पड़ी थी।
गुरबख्श ने वर्ष 2013 में की थी भूख हड़ताल
बता दें कि बंदी सिखों की रिहाई के लिए गुरबख्श ने 13 नवंबर 2013 को गुरुद्वारा अंब साहिब मोहाली में भूख हड़ताल शुरू की थी। 44 दिन बाद श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी गुरबचन सिंह ने इन सिखों की जल्दी रिहाई का भरोसा देने के बाद भूख हड़ताल खत्म कर दी थी। करीब एक साल के लंबे इंतजार करने के बाद भी जब सजा भुगत चुके, किसी भी बंदी सिख को रिहा नहीं किया गया, तो दोबारा उन्होंने 13 नवंबर 2014 को गुरुद्वारा साहिब पातशाही 10वीं श्री लखनौर साहिब अंबाला में भूख हड़ताल शुरू की थी। करीब 65 दिन तक लगातार भूख हड़ताल करने के दौरान उन पर हर तरफ से सरकार और प्रशासन द्वारा दबाव बनाया गया। साथ ही बार-बार यह भरोसा दिया गया कि बंदी सिख रिहा किए जा रहे हैं। इस भरोसे के बाद एक बार फिर उन्होंने भूख हड़ताल स्थगित कर दी थी। करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी जब बंदी सिखों की रिहाई के लिए कोई ठोस प्रबंध नहीं हुआ। मंगलवार को अपने पैतृक गांव ठसका अली में बनी पानी की टंकी पर चढ़ कर आमरण अनशन पर बैठ गया। करीब छह घंटे बाद उसने छलांग लगा दी।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र/इस्माईलाबाद। देश की विभिन्न जेलों में बंद सिखों की रिहाई की मांग कर रहे गांव ठसका अली वासी गुरबख्श सिंह खालसा गांव में ही स्थित करीब 75 फीट की उंची पानी की टंकी से कूद गए। पुलिस ने उन्हें गंभीर हालत में उपचार के लिए एलएनजेपी अस्पताल पहुंचाया। रात नौ बजे के करीब वहां उनकी उपचार के दौरान मौत हो गई। इससे पहले प्रशासन और पुलिस के अधिकारी करीब छह घंटे से उन्हें टंकी से नीचे उतारने का प्रयास कर रहे थे। इस्माईलाबाद थाने के प्रभारी दिनेश चौहाने बताया कि गुरबख्श के शव का पोस्टमार्टम बुधवार को कराया जाएगा।
सिखों की रिहाई की मांग को लेकर पहले भी संघर्ष कर चुके गुरबख्श सिंह मंगलवार को दोपहर करीब एक बजे पानी की टंकी पर चढ़ गए और अमरण अनशन शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर पिहोवा डीएसपी धीरज कुमार, इस्माईलाबाद थाना प्रभारी दिनेश चौहान, झांसा थाना प्रभारी दलीप कुमार मौके पर पहुंचे और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी मौके पर मंगवाई गई। पुलिस अधिकारी गुरबख्श से टंकी से नीचे उतरने के लिए अपील करते रहे, लेकिन वे सिख बंदियों की रिहाई करने की मांग पर अड़े रहे। बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने टंकी पर चढ़ने के लिए टंकी के प्रवेश द्वार पर लगे ताले को तोड़ने का भी प्रयास किया। इस पर गुरबख्श सिंह ने टंकी से पेट्रोल की दो बोतल और एक कैप्सूल दिखा कर चेतावनी दी कि उनके पास सायनाइड है। यदि उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की गई, तो फिर वे कैप्सूल खा लेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अपने पास रखी पेट्रोल की दो बोतल दिखाते हुए आत्मदाह की चेतावनी भी प्रशासन को दी। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सहम गए और टंकी पर चढ़े गुरबख्श को मानाने का प्रयास करते रहे। इसी दौरान देर शाम करीब सात बजे उन्होंने टंकी से छलांग लगा दी। इसमें उनका सिर दीवार से भी टकरा गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। नीचे गिरते ही वह बेहोश हो गए। पुलिस ने उन्हें तत्काल एलएनजेपी सिविल अस्पताल पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने उन्हें उपचार के दौरान मृत घोषित कर दिया।
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टंकी पर चिपकाए पोस्टर, लिखा मेरे साथ कुछ हुआ तो सरकार और प्रशासन होगा जिम्मेदार
कुरुक्षेत्र/इस्माईलाबाद। गुरबख्श सिंह ने पहले टंकी पर दो पोस्टर चिपकाए थे। एक पोस्टर में जगतार सिंह हवारा को नाजायज तौर पर तिहाड़ जेल दिल्ली में रखने पर सवाल किया गया था। साथ ही उसे पंजाब तबदील करने की मांग भी की गई थी। इसी पोस्टर में कानून की तरफ से दी गई सजा भुगत चुके बंदी सिख कैदियों को तुरंत छोड़ने और श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग भी की गई थी। इस पोस्टर के अंत में आर-पार की लड़ाई मरणव्रत 20 मार्च 2018 लिखा गया था। दूसरे पोस्टर पर लिखा गया था कि मेरे शांतिपूर्वक संघर्ष के दौरान मेरे या मेरे साथियों के साथ कुछ गलत किया गया, तो उसका जिम्मेदार हिंदुस्तान सरकार और प्रशासन होगा। मेरा बेटा जुझार सिंह मेरी जायदाद का मालिक रहेगा, लेकिन मेरे जज्बातों का नहीं है। मेरे परिवार की ओर से किसी भी दिए गए बयान का मेरे साथ कोई वास्ता नहीं है।
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एक साल से बंद पड़ी थी टंकी : खंडूजा
जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सइएन अशोक खंडूजा का कहना है कि यहां पानी का ट्यूबवेल करीब एक वर्ष से ठप हो गया था। इसके चलते यह टंकी भी बंद पड़ी थी।
गुरबख्श ने वर्ष 2013 में की थी भूख हड़ताल
बता दें कि बंदी सिखों की रिहाई के लिए गुरबख्श ने 13 नवंबर 2013 को गुरुद्वारा अंब साहिब मोहाली में भूख हड़ताल शुरू की थी। 44 दिन बाद श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी गुरबचन सिंह ने इन सिखों की जल्दी रिहाई का भरोसा देने के बाद भूख हड़ताल खत्म कर दी थी। करीब एक साल के लंबे इंतजार करने के बाद भी जब सजा भुगत चुके, किसी भी बंदी सिख को रिहा नहीं किया गया, तो दोबारा उन्होंने 13 नवंबर 2014 को गुरुद्वारा साहिब पातशाही 10वीं श्री लखनौर साहिब अंबाला में भूख हड़ताल शुरू की थी। करीब 65 दिन तक लगातार भूख हड़ताल करने के दौरान उन पर हर तरफ से सरकार और प्रशासन द्वारा दबाव बनाया गया। साथ ही बार-बार यह भरोसा दिया गया कि बंदी सिख रिहा किए जा रहे हैं। इस भरोसे के बाद एक बार फिर उन्होंने भूख हड़ताल स्थगित कर दी थी। करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी जब बंदी सिखों की रिहाई के लिए कोई ठोस प्रबंध नहीं हुआ। मंगलवार को अपने पैतृक गांव ठसका अली में बनी पानी की टंकी पर चढ़ कर आमरण अनशन पर बैठ गया। करीब छह घंटे बाद उसने छलांग लगा दी।