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बीबीपुर झील में नहर का पानी छोडने से किसानों के फसल लगे सैकड़ो एकड़ खेत हुए जलमग्न
Updated Fri, 30 Jun 2017 12:11 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
पिहोवा।
गांव बीबीपुर झील के खेतों में सिंचाई विभाग द्वारा छोड़े गए बरसाती पानी से सैकड़ों एकड़ धान की फसल पर खतरा मंडरा रहा है। इसको लेकर किसानों में सरकार व सिंचाई विभाग के खिलाफ रोष है। किसानों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन की चेतावनी दी है। किसानों का प्रतिनिधिमंडल ज्योतिसर में सिंचाई विभाग के अधिकारियों से भी मिला था। जिसके बाद यहां एक जेसीबी मशीन जलकुंभी निकालने के लिए लगाई गई।
गांव मुर्तजापुर के किसान अमजेर सिंह, नरेश, गुरलाल, छतरपाल, रति राम, रामकुमार, रवि सहित कई किसानों ने बताया कि गत रात्रि सिंचाई विभाग ने ज्योतिसर हेड से पानी को झील के खेतों में छोड़ दिया था। जिससे गांव मुकीमपुरा, बीबीपुर, मुर्तजापुर, भौर सैयदां, टकोरन सहित कई अन्य गांवों की सैकड़ों एकड़ फसल पानी की चपेट में आ गई और फसल बर्बाद हो गई। किसानों ने बैंकों व सहकारी समितियों से कर्ज लेकर फसल लगाई थी। आरोप है कि सिंचाई विभाग ने समय रहते नहरों की सफाई नहीं की। किसानों ने कहना है कि पुलों की जगह पाइप डालकर छोटी-छोटी पुलियां बनाई हुई हैं जो पानी की निकासी में सबसे बड़ी बाधा उत्पन्न कर रही हैं। अब किसान अपने स्तर पर जीसीबी मशीनें लगाकर जलकुंभी निकल कर रहे हैं। किसान अजमेर का आरोप है कि धान की फसल में डाली गई पेस्टीसाइड, यूरिया व डीएपी खाद बाढ़ के पानी में बह गए और तेज बहाव फसलों को भी अपने साथ उखाड़ कर ले गया।
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आगे नहरों के टूटने का खतरा था, इसलिए यहां छोड़ा गया पानी: विनोद
सिंचाई विभाग के एसडीओ विनोद कुमार ने बताया कि कैनाल में आगे की नहरों में क्षमतानुसार पानी पहले से ही था। यदि ऐसे में और पानी छोड़ दिया जाता तो बाढ़ व नहरों के टूटने का खतरा हो सकता था। जिसको देखते हुए यहां पानी छोड़ा गया है। फिलहाल यहां 300 क्यूसिक पानी छोड़ा गया है जबकि इसकी क्षमता 2400 क्यूसिक की है। उन्होंने बताया कि इससे किसानों की फसल बर्बाद नहीं होगी। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से नहरों की सफाई करवाई गई थी।
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पिहोवा।
गांव बीबीपुर झील के खेतों में सिंचाई विभाग द्वारा छोड़े गए बरसाती पानी से सैकड़ों एकड़ धान की फसल पर खतरा मंडरा रहा है। इसको लेकर किसानों में सरकार व सिंचाई विभाग के खिलाफ रोष है। किसानों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन की चेतावनी दी है। किसानों का प्रतिनिधिमंडल ज्योतिसर में सिंचाई विभाग के अधिकारियों से भी मिला था। जिसके बाद यहां एक जेसीबी मशीन जलकुंभी निकालने के लिए लगाई गई।
गांव मुर्तजापुर के किसान अमजेर सिंह, नरेश, गुरलाल, छतरपाल, रति राम, रामकुमार, रवि सहित कई किसानों ने बताया कि गत रात्रि सिंचाई विभाग ने ज्योतिसर हेड से पानी को झील के खेतों में छोड़ दिया था। जिससे गांव मुकीमपुरा, बीबीपुर, मुर्तजापुर, भौर सैयदां, टकोरन सहित कई अन्य गांवों की सैकड़ों एकड़ फसल पानी की चपेट में आ गई और फसल बर्बाद हो गई। किसानों ने बैंकों व सहकारी समितियों से कर्ज लेकर फसल लगाई थी। आरोप है कि सिंचाई विभाग ने समय रहते नहरों की सफाई नहीं की। किसानों ने कहना है कि पुलों की जगह पाइप डालकर छोटी-छोटी पुलियां बनाई हुई हैं जो पानी की निकासी में सबसे बड़ी बाधा उत्पन्न कर रही हैं। अब किसान अपने स्तर पर जीसीबी मशीनें लगाकर जलकुंभी निकल कर रहे हैं। किसान अजमेर का आरोप है कि धान की फसल में डाली गई पेस्टीसाइड, यूरिया व डीएपी खाद बाढ़ के पानी में बह गए और तेज बहाव फसलों को भी अपने साथ उखाड़ कर ले गया।
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आगे नहरों के टूटने का खतरा था, इसलिए यहां छोड़ा गया पानी: विनोद
सिंचाई विभाग के एसडीओ विनोद कुमार ने बताया कि कैनाल में आगे की नहरों में क्षमतानुसार पानी पहले से ही था। यदि ऐसे में और पानी छोड़ दिया जाता तो बाढ़ व नहरों के टूटने का खतरा हो सकता था। जिसको देखते हुए यहां पानी छोड़ा गया है। फिलहाल यहां 300 क्यूसिक पानी छोड़ा गया है जबकि इसकी क्षमता 2400 क्यूसिक की है। उन्होंने बताया कि इससे किसानों की फसल बर्बाद नहीं होगी। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से नहरों की सफाई करवाई गई थी।
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