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सब्जियों के दामों में आया भारी उछाल, गृहणियों का बिगड़ा रसोई का बजट 20-51-42
Updated Fri, 20 Jul 2018 01:24 AM IST
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आसमान को छू रहे सब्जियों के दाम, गृहिणियों का बिगड़ा रसोई का बजट
- जून माह से नहीं मिल पा रही सब्जियों के भावों में राहत
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र/इस्माईलाबाद। बारिश का सीजन जहां धान के किसानों के चेहरे पर मुस्कान लाया है, पर आम से लेकर खास वर्ग के लोगों की रसोई पर इसका उल्टा असर हुआ है। बारिश के कारण सब्जियों के भाव आसमान छू रहे हैं। कई सब्जियों के रेट दो गुने तक पहुंच चुके हैं। ऐसे में गृहिणियों के लिए बजट मैनेज करना मुश्किल भरा हो गया है।
हरियाणा के साथ-साथ विभिन्न राज्यों में सब्जियों की फसलों को बारिश से भारी नुकसान हुआ है। बारिश से सब्जी की आवक बेहद कम होने लगी है तो वहीं सब्जी बड़ी मात्रा में खराब होने का भी दावा किया जा रहा है। इन कारणों से सब्जियों के रेट मंडियों में लगातार बढ़ते जा रहे हैं। पहले जून में तेज गर्मी व पेट्रोल-डीजल के आसमान छूते भावों के चलते सब्जियों के दामों ने हिसाब बिगाड़ा था और अब बारिश ने। जून में महंगी हुई सब्जियों के दाम बारिश के चलते और भी बढ़ गए हैं। गृहिणी तेजो देवी थांदडो, गीता रानी, सरला शर्मा, अलका, सुंदरी देवी, लीना भारद्वाज ने बताया कि जो सब्जियां आज से पंद्रह दिन पहले ठीक दामों में मिल रही थी अब उन सब्जियों के दाम आसमान को छू रहे हैं। जो घीया पहले 15 रुपये किलो थी, अब 30 रुपये के हिसाब से मंडी में बिक रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सरकार सब्जी के दाम निर्धारित करे तथा इसके लिए सरकारी दुकानों पर सही दरों पर सब्जी उपलब्ध करवाए ताकि आम आदमी पौष्टिक आहर ले सके।
गरीब गृहिणी सब्जी खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा सकती : ज्योति
पिपली वासी गृहिणी ज्योति खनगवाल का कहना है कि सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं, जिसके चलते गरीब व सामान्य गृहिणी दिन में एक समय के खाने के लिए भी सब्जी खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा सकती। अन्य हर रोज की जरूरत की वस्तुओं के दामों के साथ-साथ सब्जियों के लगातार बढ़ रहे दामों से हर वर्ग की महिलाओं का रसोई बजट बिगड़ चुका है। रिटेल में सब्जी खरीदना तो बेहद मुश्किल हो चुका है।
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बरसात में सब्जियां खराब होने से बढ़ जाते हैं भाव
सब्जी विक्रेता अरुण आहूजा, जुगूनू, पम्मा आदि ने कहा कि बरसात के समय हर वर्ष सब्जियों के भाव में उछाल आता है। बरसात का मौसम आते ही स्थानीय किसानों की सब्जियां खराब हो जाती हैं। फसल पर नया फल नहीं आता। मंडी में ज्यादातर सब्जियां दूसरे प्रदेशों से आ रही हैं, जिस कारण सब्जी के दामों में उछाल है। उन्होंने कहा कि सब्जी महंगी होने से सब्जी कम बिकती है, जिससे दुकानदारों की आमदन भी प्रभावित होती है।
बारिश की वजह से महंगी हुईं सब्जियां : गुलाटी
सब्जी विक्रेता बताते हैं कि बारिश के सीजन के चलते सब्जियों की फसल खराब होने लगती है, जिसके चलते आपूर्ति कम रह जाती है। यही वजह है कि पिछले करीब 15 दिनों से शुरू हुए बारिश के सीजन में सब्जियों के भाव तेज हुए हैं। हर वर्ष बारिश से सीजन में सब्जियों के भावों में उछाल आता है।
रिटेल में अधिक महंगी बिक रहीं सब्जियां : मेहंदीरत्ता
कुरुक्षेत्र सब्जी मंडी में होलसेल विक्रेता राजेंद्र मेहंदीरत्ता का कहना है कि हालांकि सब्जियों का भाव बढ़ा है, लेकिन होलसेल में सब्जियां उतनी मंहगी नहीं, जितनी रिटेल में बेची जा रही हैं। कुरुक्षेत्र में जिला भर के किसानों के अलावा अन्य जिलों व दिल्ली, उत्तरप्रदेश व शिमला से सब्जियों की आपूर्ति हो रही है। हर सीजन में बारिश का कुछ असर तो पड़ ही जाता है।
हिमाचल प्रदेश में आई सब्जी की नई फसल ने दी राहत
सब्जी विक्रेता विजय अरोड़ा का कहना है कि इन दिनों हिमाचल प्रदेश में आलू, बैंगन, अरबी, कद्दू की नई सब्जी आ जाती है, जिससे इनकी आपूर्ति बढ़ जाती है। इससे इन सब्जियों के भावों में कुछ राहत हो जाती है, जिसका फायदा उपभोक्ताओं को मिलता है। अन्य सब्जियां मंहगी होने के चलते उपभोक्ताओं में इन सब्जियों की मांग बढ़ जाती है।
बारिश से सब्जियों को नुकसान : कर्मचंद
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद का कहना है कि बारिश का जहां धान की फसल में बड़ा फायदा हो रहा है वहीं सब्जियां खराब हो रही है। बारिश से सब्जी उत्पादक किसानों को नुकसान पहुंच रहा है तो सब्जियों की आवक भी कम हो गई है। इसी के चलते ही सब्जियों के भावों में उछाल आ रहा है।
सब्जियों के रेट तय करने के निर्देश नहीं : सचिव
मार्केट कमेटी थानेसर के सचिव राहुल मियों का कहना है कि सरकार की ओर से सब्जियों के रेट तय नहीं है, जिसके चलते उनका इनके भावों पर नियंत्रण नहीं कर पा रहे। मंडियों में किसान, सब्जी विक्रेता से लेकर उपभोक्ता के पास भी सब्जी बेचने व खरीदने का विकल्प होता है। आज तक उनके पास कोई शिकायत भी नहीं आई है, जिसके चलते कोई कार्रवाई भी नहीं की जा सकी।
एक सप्ताह में सब्जियों के ये हुए भाव
सब्जी पहले अब
मटर 80 100
शिमला मिर्च 60 80
घीया 25 40
टमाटर 30 60
बंद गोभी 15 20
तोरी 30 35
करेला 20 25
नींबू 40 50
इन सब्जियों के भावों में मिली राहत
कद्दू 25 20
बैंगन 40 30
प्याज 30 25
आलू 20 20
भिंडी 40 40
अरबी 40 40
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आसमान को छू रहे सब्जियों के दाम, गृहिणियों का बिगड़ा रसोई का बजट
- जून माह से नहीं मिल पा रही सब्जियों के भावों में राहत
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र/इस्माईलाबाद। बारिश का सीजन जहां धान के किसानों के चेहरे पर मुस्कान लाया है, पर आम से लेकर खास वर्ग के लोगों की रसोई पर इसका उल्टा असर हुआ है। बारिश के कारण सब्जियों के भाव आसमान छू रहे हैं। कई सब्जियों के रेट दो गुने तक पहुंच चुके हैं। ऐसे में गृहिणियों के लिए बजट मैनेज करना मुश्किल भरा हो गया है।
हरियाणा के साथ-साथ विभिन्न राज्यों में सब्जियों की फसलों को बारिश से भारी नुकसान हुआ है। बारिश से सब्जी की आवक बेहद कम होने लगी है तो वहीं सब्जी बड़ी मात्रा में खराब होने का भी दावा किया जा रहा है। इन कारणों से सब्जियों के रेट मंडियों में लगातार बढ़ते जा रहे हैं। पहले जून में तेज गर्मी व पेट्रोल-डीजल के आसमान छूते भावों के चलते सब्जियों के दामों ने हिसाब बिगाड़ा था और अब बारिश ने। जून में महंगी हुई सब्जियों के दाम बारिश के चलते और भी बढ़ गए हैं। गृहिणी तेजो देवी थांदडो, गीता रानी, सरला शर्मा, अलका, सुंदरी देवी, लीना भारद्वाज ने बताया कि जो सब्जियां आज से पंद्रह दिन पहले ठीक दामों में मिल रही थी अब उन सब्जियों के दाम आसमान को छू रहे हैं। जो घीया पहले 15 रुपये किलो थी, अब 30 रुपये के हिसाब से मंडी में बिक रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सरकार सब्जी के दाम निर्धारित करे तथा इसके लिए सरकारी दुकानों पर सही दरों पर सब्जी उपलब्ध करवाए ताकि आम आदमी पौष्टिक आहर ले सके।
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गरीब गृहिणी सब्जी खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा सकती : ज्योति
पिपली वासी गृहिणी ज्योति खनगवाल का कहना है कि सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं, जिसके चलते गरीब व सामान्य गृहिणी दिन में एक समय के खाने के लिए भी सब्जी खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा सकती। अन्य हर रोज की जरूरत की वस्तुओं के दामों के साथ-साथ सब्जियों के लगातार बढ़ रहे दामों से हर वर्ग की महिलाओं का रसोई बजट बिगड़ चुका है। रिटेल में सब्जी खरीदना तो बेहद मुश्किल हो चुका है।
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बरसात में सब्जियां खराब होने से बढ़ जाते हैं भाव
सब्जी विक्रेता अरुण आहूजा, जुगूनू, पम्मा आदि ने कहा कि बरसात के समय हर वर्ष सब्जियों के भाव में उछाल आता है। बरसात का मौसम आते ही स्थानीय किसानों की सब्जियां खराब हो जाती हैं। फसल पर नया फल नहीं आता। मंडी में ज्यादातर सब्जियां दूसरे प्रदेशों से आ रही हैं, जिस कारण सब्जी के दामों में उछाल है। उन्होंने कहा कि सब्जी महंगी होने से सब्जी कम बिकती है, जिससे दुकानदारों की आमदन भी प्रभावित होती है।
बारिश की वजह से महंगी हुईं सब्जियां : गुलाटी
सब्जी विक्रेता बताते हैं कि बारिश के सीजन के चलते सब्जियों की फसल खराब होने लगती है, जिसके चलते आपूर्ति कम रह जाती है। यही वजह है कि पिछले करीब 15 दिनों से शुरू हुए बारिश के सीजन में सब्जियों के भाव तेज हुए हैं। हर वर्ष बारिश से सीजन में सब्जियों के भावों में उछाल आता है।
रिटेल में अधिक महंगी बिक रहीं सब्जियां : मेहंदीरत्ता
कुरुक्षेत्र सब्जी मंडी में होलसेल विक्रेता राजेंद्र मेहंदीरत्ता का कहना है कि हालांकि सब्जियों का भाव बढ़ा है, लेकिन होलसेल में सब्जियां उतनी मंहगी नहीं, जितनी रिटेल में बेची जा रही हैं। कुरुक्षेत्र में जिला भर के किसानों के अलावा अन्य जिलों व दिल्ली, उत्तरप्रदेश व शिमला से सब्जियों की आपूर्ति हो रही है। हर सीजन में बारिश का कुछ असर तो पड़ ही जाता है।
हिमाचल प्रदेश में आई सब्जी की नई फसल ने दी राहत
सब्जी विक्रेता विजय अरोड़ा का कहना है कि इन दिनों हिमाचल प्रदेश में आलू, बैंगन, अरबी, कद्दू की नई सब्जी आ जाती है, जिससे इनकी आपूर्ति बढ़ जाती है। इससे इन सब्जियों के भावों में कुछ राहत हो जाती है, जिसका फायदा उपभोक्ताओं को मिलता है। अन्य सब्जियां मंहगी होने के चलते उपभोक्ताओं में इन सब्जियों की मांग बढ़ जाती है।
बारिश से सब्जियों को नुकसान : कर्मचंद
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद का कहना है कि बारिश का जहां धान की फसल में बड़ा फायदा हो रहा है वहीं सब्जियां खराब हो रही है। बारिश से सब्जी उत्पादक किसानों को नुकसान पहुंच रहा है तो सब्जियों की आवक भी कम हो गई है। इसी के चलते ही सब्जियों के भावों में उछाल आ रहा है।
सब्जियों के रेट तय करने के निर्देश नहीं : सचिव
मार्केट कमेटी थानेसर के सचिव राहुल मियों का कहना है कि सरकार की ओर से सब्जियों के रेट तय नहीं है, जिसके चलते उनका इनके भावों पर नियंत्रण नहीं कर पा रहे। मंडियों में किसान, सब्जी विक्रेता से लेकर उपभोक्ता के पास भी सब्जी बेचने व खरीदने का विकल्प होता है। आज तक उनके पास कोई शिकायत भी नहीं आई है, जिसके चलते कोई कार्रवाई भी नहीं की जा सकी।
एक सप्ताह में सब्जियों के ये हुए भाव
सब्जी पहले अब
मटर 80 100
शिमला मिर्च 60 80
घीया 25 40
टमाटर 30 60
बंद गोभी 15 20
तोरी 30 35
करेला 20 25
नींबू 40 50
इन सब्जियों के भावों में मिली राहत
कद्दू 25 20
बैंगन 40 30
प्याज 30 25
आलू 20 20
भिंडी 40 40
अरबी 40 40