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महान क्रांतिकारी लेखक ओजस्वी वक्ता व दूरदर्शी राजनेता थे वीर सावरकर
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। अमर शहीद विनायक दमोदर सावरकर उन क्रांतिकारियों में थे, जिनसे अंग्रेजी सरकार भयभीत रहती थी। आजीवन कारावास की दो-दो बार सजा सुनाए जाने के बाद इस क्रांतिकारी के कारनामों से अंग्रेजी हुकूमत लगातार परेशान रहती थी। देश की आजादी के लिए इन शहीदों ने अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया पर इनकी जिंदगी के कई अनछुए पहलू लोगों के सामने नहीं आ पाए। शहीदी दिवस के मौके पर जसबीर मथाना के लिखित एवं निर्देशित इस नाटक ने दर्शकों को भारत मां के इस बहादुर पुत्र के कारनामों एवं जीवन वृत्त को बड़े ही मनोरंजक ढंग से सामने रखा।
उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला और हरियाणा कला परिषद के मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर (मैक) के संयुक्त तत्वावधान में नटरंग नाट्य संस्था द्वारा शहीदी दिवस पर भरतमुनि रंगशाला में नाटक वीर सावरकर का मंचन किया गया। इसमें दिखाया गया कि स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर वीर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को गांव भागुर, जिला नासिक मुंबई प्रांत में हुआ था। विनायक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रिम पंक्ति सेनानी और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे। उन्होंने समाज में फैले जाति-पाति का कड़ा विरोध किया। वह महान क्रांतिकारी लेखक ओजस्वी वक्ता व दूरदर्शी राजनेता थे। कॉलेज के दिनों में भी वे राष्ट्र भक्ति से ओत-प्रोत ओजस्वी भाषण देते थे। 1904 में उन्होनें अभिनव भारत नामक क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की थी। आगे की पढ़ाई करने के लिए वीर सावरकर लंदन पहुंचते हैं। उनके लंदन में पढ़ने की सारी व्यवस्था तिलक करते हैं, लेकिन सावरकर के लंदन पहुंचते ही अंग्रेजी सरकार में हलचल मच जाती है। अंग्रेजों के जुल्मों के बावजूद वीर सावरकर ने हार नही मानी। 13 मई 1910 को लंदन में उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है। 7 जुलाई 1907 को एक मोरिया नामक जहाज से भारत ले जाते समय सावरकर सीवर हॉल के रास्ते से भाग निकलते हैं पर कामयाब नहीं हो पाते। 24 दिसंबर 1910 को आजीवन कारावास की सजा दी गई। इसके बाद 31 जनवरी 1911 को इन्हें दोबारा आजीवन कारावास की सजा दी गई।
मंचन से पूर्व मुख्यातिथि के रूप में बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक सोहन सिंह सोलंकी व विशिष्ठ अतिथि महिला एवं बाल विकास विभाग के चेयरमैन कृष्ण पांचाल रहे। सोलंकी ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में होते रहने चाहिए। इससे युवाओं में देशभक्तों के जीवन को जानने का मौका मिलता है।
कुरुक्षेत्र। अमर शहीद विनायक दमोदर सावरकर उन क्रांतिकारियों में थे, जिनसे अंग्रेजी सरकार भयभीत रहती थी। आजीवन कारावास की दो-दो बार सजा सुनाए जाने के बाद इस क्रांतिकारी के कारनामों से अंग्रेजी हुकूमत लगातार परेशान रहती थी। देश की आजादी के लिए इन शहीदों ने अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया पर इनकी जिंदगी के कई अनछुए पहलू लोगों के सामने नहीं आ पाए। शहीदी दिवस के मौके पर जसबीर मथाना के लिखित एवं निर्देशित इस नाटक ने दर्शकों को भारत मां के इस बहादुर पुत्र के कारनामों एवं जीवन वृत्त को बड़े ही मनोरंजक ढंग से सामने रखा।
उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला और हरियाणा कला परिषद के मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर (मैक) के संयुक्त तत्वावधान में नटरंग नाट्य संस्था द्वारा शहीदी दिवस पर भरतमुनि रंगशाला में नाटक वीर सावरकर का मंचन किया गया। इसमें दिखाया गया कि स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर वीर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को गांव भागुर, जिला नासिक मुंबई प्रांत में हुआ था। विनायक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रिम पंक्ति सेनानी और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे। उन्होंने समाज में फैले जाति-पाति का कड़ा विरोध किया। वह महान क्रांतिकारी लेखक ओजस्वी वक्ता व दूरदर्शी राजनेता थे। कॉलेज के दिनों में भी वे राष्ट्र भक्ति से ओत-प्रोत ओजस्वी भाषण देते थे। 1904 में उन्होनें अभिनव भारत नामक क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की थी। आगे की पढ़ाई करने के लिए वीर सावरकर लंदन पहुंचते हैं। उनके लंदन में पढ़ने की सारी व्यवस्था तिलक करते हैं, लेकिन सावरकर के लंदन पहुंचते ही अंग्रेजी सरकार में हलचल मच जाती है। अंग्रेजों के जुल्मों के बावजूद वीर सावरकर ने हार नही मानी। 13 मई 1910 को लंदन में उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है। 7 जुलाई 1907 को एक मोरिया नामक जहाज से भारत ले जाते समय सावरकर सीवर हॉल के रास्ते से भाग निकलते हैं पर कामयाब नहीं हो पाते। 24 दिसंबर 1910 को आजीवन कारावास की सजा दी गई। इसके बाद 31 जनवरी 1911 को इन्हें दोबारा आजीवन कारावास की सजा दी गई।
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मंचन से पूर्व मुख्यातिथि के रूप में बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक सोहन सिंह सोलंकी व विशिष्ठ अतिथि महिला एवं बाल विकास विभाग के चेयरमैन कृष्ण पांचाल रहे। सोलंकी ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में होते रहने चाहिए। इससे युवाओं में देशभक्तों के जीवन को जानने का मौका मिलता है।
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