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जिलें में हुई बारिश के बाद 12 से अधिक मामले सामने आ चुके है मलेरिया के

Fri, 14 Jul 2017 11:39 PM IST
Updated Fri, 14 Jul 2017 11:39 PM IST
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जिलें में हुई बारिश के बाद 12 से अधिक मामले सामने आ चुके है मलेरिया के
अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र।
मानसून की दस्तक के साथ ही मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप शुरू हो गया है। शहर में बुधवार को हुई बारिश से जहां एक तरफ लोगों को गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी तरफ शहर में कई जगह जलभराव से डेंगू, मलेरिया के मरीजों में इजाफा होने लगा है। दिन प्रतिदिन अस्पताल में डेंगू व मलेरिया के मरीजों आना लगा रहता है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले भर में हो रही बारिश के बाद मलेरिया के करीब 12 मामले सामने आ चुके हैं। खाली प्लॉटों में पानी भरने से लार्वा पनप रहा है जो इन बीमारियों का कारण है।
जिला स्वास्थ्य विभाग को शहर के कई इलाकों में लाखों की संख्या में मलेरिया का लारवा मिल चुका है। हालांकि जिला स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि पंजाबी धर्मशाला के आसपास, शहर के मुख्य बाजार, चक्रवर्ती मोहल्ले में मिले लारवा को खत्म कर दिया गया है, लेकिन नगर परिषद के लगभग सभी वार्डों में खाली प्लॅाटों में काफी संख्या में लारवा पनप चुका है। ऐसी ही स्थिति सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं मेें भी है। शहर के सिविल अस्पताल में भी मच्छरों ने डेरा जमाया हुआ है। अस्पताल में सफाई समय पर न होने से वहां पर मच्छरों की भरमार लगी हुई है। अस्पताल में लोग जहां पर पानी पीने के लिए आते है वहां पर पानी खड़ा हुआ है वहीं पर मच्छर का आतंक सबसे ज्यादा है ऐसे में वहां पर इलाज कराने आने वाले मरीज मलेरिया जैसी बीमारी से ग्रस्त हो सकते है। शहर में ऐसी कई कॉलोनियां हैं, जहां निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है।
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मच्छरजनित डेंगू व मलेरिया जैसे रोगों को पनपने में सबसे बड़ी भूमिका शहर के वे खाली प्लाट निभाते है, जिनमें या तो पानी भरा है, या टायर, खाली बोतलें और डिब्बे एवं ऐसी सामग्री बिखरी पड़ी है, जिनमें लारवा पैदा होता है। जाहिर है कि बारिश के बाद खाली पड़े प्लांटों में पानी इकट्ठा हो जाता है और इस पानी में जानलेवा मच्छर पलते है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर परिषद को शहर में पड़े खाली प्लाटों के मालिकों को सख्त नोटिस भेजना चाहिए, ताकि ऐसी खतरनाक बीमारियां शहर मेें न फैल पाए।
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मलेरिया विभाग रो रहा है मैनपावर का रोना
जिला स्वास्थ्य विभाग के सामने लारवा बनने से रोकना बड़ी चुनौती है। वहीं मलेरिया विभाग मैन पावर की समस्या से जूझ रहा है। इन हालात में एक ही सप्ताह में सभी क्षेत्रों को फिर से कवर करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। इस वक्त जहां भी लारवा बचा है वहां एक साथ सैकड़ों मच्छर पहली उड़ान के साथ लोगों को डेंगू और मलेरिया डंक मार सकते हैं।
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पिछले साल भेजे थे इस बार नहीं भेजे नोटिस
पिछले वर्ष हाई अलर्ट के दौरान कुछ खास इलाकों में विभाग द्वारा नोटिस भेजे गए थे, लेकिन इस बार घरों, दुकानदारों, खाली पड़े प्लॉटों में लारवा पनपने के जिम्मेदार लोगों को अब तक नोटिस नही भेजे गए। बता दें कि पिछले वर्ष जिले में 139 मलेरिया के और 62 डेंगू के मामले सामने आए थे। जबकि अकेले चक्रवर्ती मोहल्ला में दो मामले दिमागी बुखार के सामने आए थे।

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प्रतिदिन बढ़ रहा है जिले में मलेरिया
लोकनायक जयप्रकाश सिविल अस्पताल के मलेरिया अधिकारी सुदेश कुमार ने बताया कि बारिश होने के बाद जिले में मच्छरजनित बीमारियां मलेरिया व डेंगू के मरीजों में बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में मरीजों के इलाज की पुख्ता व्यवस्था की जा रही है। जिला मलेरिया अधिकारी ने लोगों से अपील की कि वे अपने आसपास पानी जमा न होने दें, सफाई का विशेष ध्यान रखें।
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