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Kurukshetra News: शिविर में क्लबफुट से प्रभावित 20 बच्चों की हुई जांच
Sat, 08 Jun 2024 05:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 08 Jun 2024 05:44 AM IST
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कुरुक्षेत्र। एलएनजेपी अस्पताल में विश्व क्लब फुट सप्ताह के तहत शुक्रवार को शिविर लगाया गया। शिविर में क्लब फुट से प्रभावित 20 बच्चों की जांच की गई। इसमें से दो बच्चों को पोंसेटी पद्धति के मुताबिक प्लास्टर चढ़ाया गया।
जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र प्रबंधक सुमित शर्मा ने बताया कि डिप्टी सिविल सर्जन डाॅ. करुणा ढींगड़ा के मार्गदर्शन में यह शिविर लगाया गया। अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ डाॅ. अनूप मेहता और डाॅ. मन्नू सोनी दोनों इस बीमारी से प्रभावित बच्चों का इलाज करते हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से जन्मजात बीमारियों के साथ पैदा होने वाले बच्चों का निशुल्क इलाज किया जाता है।
वहीं, फिजियोथेरेपिस्ट डाॅ. सुधा ने कहा कि शिविर में क्लब फुट बीमारी से ग्रसित बच्चों के माता-पिता को पांच साल तक इलाज पूरा करने बारे जागरूक किया गया। क्लब फुट से प्रभावित बच्चों का पोंसेटी विधि द्वारा तीन चरणों में बहुत आसानी से इलाज किया जाता है। इसमें प्रथम चरण कास्टिग का रहता है।
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क्लब फुट के बच्चों को लगातार चार से आठ सप्ताह तक हर हफ्ते कास्ट (प्लास्टर) चढ़ाया जाता है। दूसरे चरण में टेनोटोमी। तीसरा चरण ब्रेसिंग का रहता है जोकि तीन से पांच सालों तक चलता है। पिछले साल 18 बच्चों की जांच की गई थी।
पोंसेटी पद्धति से 99 फीसदी बच्चे हो रहे ठीक : डाॅ. अनूप
हड्डी रोग विशेषज्ञ डाॅ. अनूप मेहता ने बताया कि क्लब फुट की कोई खास वजह नहीं है। गर्भावस्था के दौरान ही अल्ट्रासाउंड में यह स्पष्ट हो जाता है। इस बीमारी में बच्चे के दोनों पैर अंदर की ओर मुड़ना शुरू हो जाते हैं। डॉ. इग्नासियो पोंसेटी ने इस पद्धति को विकसित किया था। तीन जून को उनके जन्मदिवस को क्लब फुट डे के रूप में मनाया जाता है।
इस वर्ष इस पूरे सप्ताह में यह जागरुक दिवस मनाया जा रहा है। पोंसेटी पद्धति में बच्चे को बिना ऑपरेशन किए ही उपचार किया जाता है। बच्चों को क्लब फुट जूते और ब्रेस दिए जाते हैं। हर सप्ताह बच्चे को प्लास्टर चढ़ाया जाता है। इससे 99 फीसदी बच्चे ठीक हो जाते हैं।
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जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र प्रबंधक सुमित शर्मा ने बताया कि डिप्टी सिविल सर्जन डाॅ. करुणा ढींगड़ा के मार्गदर्शन में यह शिविर लगाया गया। अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ डाॅ. अनूप मेहता और डाॅ. मन्नू सोनी दोनों इस बीमारी से प्रभावित बच्चों का इलाज करते हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से जन्मजात बीमारियों के साथ पैदा होने वाले बच्चों का निशुल्क इलाज किया जाता है।
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वहीं, फिजियोथेरेपिस्ट डाॅ. सुधा ने कहा कि शिविर में क्लब फुट बीमारी से ग्रसित बच्चों के माता-पिता को पांच साल तक इलाज पूरा करने बारे जागरूक किया गया। क्लब फुट से प्रभावित बच्चों का पोंसेटी विधि द्वारा तीन चरणों में बहुत आसानी से इलाज किया जाता है। इसमें प्रथम चरण कास्टिग का रहता है।
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क्लब फुट के बच्चों को लगातार चार से आठ सप्ताह तक हर हफ्ते कास्ट (प्लास्टर) चढ़ाया जाता है। दूसरे चरण में टेनोटोमी। तीसरा चरण ब्रेसिंग का रहता है जोकि तीन से पांच सालों तक चलता है। पिछले साल 18 बच्चों की जांच की गई थी।
पोंसेटी पद्धति से 99 फीसदी बच्चे हो रहे ठीक : डाॅ. अनूप
हड्डी रोग विशेषज्ञ डाॅ. अनूप मेहता ने बताया कि क्लब फुट की कोई खास वजह नहीं है। गर्भावस्था के दौरान ही अल्ट्रासाउंड में यह स्पष्ट हो जाता है। इस बीमारी में बच्चे के दोनों पैर अंदर की ओर मुड़ना शुरू हो जाते हैं। डॉ. इग्नासियो पोंसेटी ने इस पद्धति को विकसित किया था। तीन जून को उनके जन्मदिवस को क्लब फुट डे के रूप में मनाया जाता है।
इस वर्ष इस पूरे सप्ताह में यह जागरुक दिवस मनाया जा रहा है। पोंसेटी पद्धति में बच्चे को बिना ऑपरेशन किए ही उपचार किया जाता है। बच्चों को क्लब फुट जूते और ब्रेस दिए जाते हैं। हर सप्ताह बच्चे को प्लास्टर चढ़ाया जाता है। इससे 99 फीसदी बच्चे ठीक हो जाते हैं।