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जुनून की हद :दुर्लभ धार्मिक ग्रंथ, सिक्के, बोतलें व माचिस का संग्रह करने को बेच दी करोड़ों की पुश्तैनी जमीन
Updated Sun, 16 Dec 2018 12:59 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। कहा जाता है शौक का कोई मूल्य नहीं होता और यह जुनून बन जाए तो मनुष्य बड़ी से बड़ी मंजिल भी छू सकता है। ऐसी ही जुनून की हद लुधियाना के रहने वाले नरेंद्रपाल सिंह में देखने को मिली। उन्होंने इंजीनियरिंग का पेशा छोड़ देश- विदेश से दुर्लभ धार्मिक ग्रंथ से लेकर प्राचीन व ऐतिहासिक सिक्के, बोतलें, माचिस तक का विशाल संग्रह कर लिया। इसके लिए करोड़ों की पुश्तैनी जमीन तक बेच डाली। यही नहीं, अपना घर तोड़कर ही अकाल सहाय म्यूजियम बनाना शुरू कर दिया।
नरेंद्रपाल सिंह की संग्रह की गई 27 दुर्लभ वस्तुओं की प्रदर्शनी हरियाणा पैवेलियन में लगाई गई है। मैकेनिकल इंजीनियर नरेंद्रपाल सिंह ने बताया कि जब वह 14 वर्ष के थे तो उनके परदादा ने उन्हें अपने जमाने के सिक्के दिखाए थे। इसके बाद उन्हें सिक्के संग्रह करने का शौक जगा। 33 वर्षों से वह दुर्लभ चीजें संग्रह कर रहे हैं। उन्होंने 15 हजार व्हिस्की की बोतलें, 15 हजार लिम्का की बोतलें एकत्रित कीं। 1996 में उनका नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ, जो आज तक बरकरार है। यहीं नहीं सामाजिक संस्थाएं भी 200 बार तक उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। और अब तक वे स्कूल, कॉलेज से लेकर ऐसे मेलों में 200 प्रदर्शनी लगा चुके हैं।
गुरमुखी लिपि में जुटाए 300 साल तक के पुराने ग्रंथ
नरेंद्रपाल सिंह के अनुसार उन्होंने गुरमुखी लिपि में राइस मेड कागज पर हस्त लिखित करीब 300 साल पुराने धार्मिक ग्रंथों का संग्रह किया। इनमें भगवदगीता, श्रीरामचरितमानस, हनुमान नाटक, गीता सार, महारामायण, विवेक संग्रह व भक्तमाल सहित अन्य ग्रंथ शामिल हैं। ये ग्रंथ लाहौर, रावलपिंडी से निर्मित कागज पर लिखे गए हैं। 360 प्रकार के दर्लभ शंखों का भी संग्रह किया है।
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दो हजार दुर्लभ सिक्के संग्रह में शामिल
प्रदर्शनी में विभिन्न कालों के चमड़े, सोने-चांदी व अन्य धातु से लेकर प्लास्टिक तक के 2 हजार सिक्के सामिल हैं। इन सिक्कों में 1947 से लेकर आज तक केंद्र सरकार की ओर से गलत छपाई के चलते बैन किए गए सिक्के भी संग्रहीत किए हैं।
एक लाख 72 हजार जुटाई माचिस
नरेंद्र पाल ने एक लाख 72 हजार अलग-अलग प्रकार की माचिस भी जुटाई हैं। इनमें से 80 फीसदी विदेशी हैं। यहीं नहीं, वर्ष 1935 से लेकर आज तक के कैमरे व दुर्लभ डाक टिकटें व अति प्राचीन मिट्टी के बर्तन भी जुटाए हैं।
नई पीढ़ी में जिज्ञासा बढ़ाने का प्रयास : नरेंद्रपाल
नरेंद्रपाल सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य नई पीढ़ी में प्राचीन सभ्यता के प्रति जिज्ञासा बढ़ाना है ताकि उन्हें अपने पूर्वजों के रहन-सहन से लेकर शास्त्र व शस्त्रों का भी ज्ञान हो सके। इन वस्तुओं को देखने का युवाओं में भारी उत्साह दिखाई दे रहा है। करीब तीन हजार पर्यटक यहां भी हर रोज इन्हें देखने आ रहे हैं।
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कुरुक्षेत्र। कहा जाता है शौक का कोई मूल्य नहीं होता और यह जुनून बन जाए तो मनुष्य बड़ी से बड़ी मंजिल भी छू सकता है। ऐसी ही जुनून की हद लुधियाना के रहने वाले नरेंद्रपाल सिंह में देखने को मिली। उन्होंने इंजीनियरिंग का पेशा छोड़ देश- विदेश से दुर्लभ धार्मिक ग्रंथ से लेकर प्राचीन व ऐतिहासिक सिक्के, बोतलें, माचिस तक का विशाल संग्रह कर लिया। इसके लिए करोड़ों की पुश्तैनी जमीन तक बेच डाली। यही नहीं, अपना घर तोड़कर ही अकाल सहाय म्यूजियम बनाना शुरू कर दिया।
नरेंद्रपाल सिंह की संग्रह की गई 27 दुर्लभ वस्तुओं की प्रदर्शनी हरियाणा पैवेलियन में लगाई गई है। मैकेनिकल इंजीनियर नरेंद्रपाल सिंह ने बताया कि जब वह 14 वर्ष के थे तो उनके परदादा ने उन्हें अपने जमाने के सिक्के दिखाए थे। इसके बाद उन्हें सिक्के संग्रह करने का शौक जगा। 33 वर्षों से वह दुर्लभ चीजें संग्रह कर रहे हैं। उन्होंने 15 हजार व्हिस्की की बोतलें, 15 हजार लिम्का की बोतलें एकत्रित कीं। 1996 में उनका नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ, जो आज तक बरकरार है। यहीं नहीं सामाजिक संस्थाएं भी 200 बार तक उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। और अब तक वे स्कूल, कॉलेज से लेकर ऐसे मेलों में 200 प्रदर्शनी लगा चुके हैं।
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गुरमुखी लिपि में जुटाए 300 साल तक के पुराने ग्रंथ
नरेंद्रपाल सिंह के अनुसार उन्होंने गुरमुखी लिपि में राइस मेड कागज पर हस्त लिखित करीब 300 साल पुराने धार्मिक ग्रंथों का संग्रह किया। इनमें भगवदगीता, श्रीरामचरितमानस, हनुमान नाटक, गीता सार, महारामायण, विवेक संग्रह व भक्तमाल सहित अन्य ग्रंथ शामिल हैं। ये ग्रंथ लाहौर, रावलपिंडी से निर्मित कागज पर लिखे गए हैं। 360 प्रकार के दर्लभ शंखों का भी संग्रह किया है।
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दो हजार दुर्लभ सिक्के संग्रह में शामिल
प्रदर्शनी में विभिन्न कालों के चमड़े, सोने-चांदी व अन्य धातु से लेकर प्लास्टिक तक के 2 हजार सिक्के सामिल हैं। इन सिक्कों में 1947 से लेकर आज तक केंद्र सरकार की ओर से गलत छपाई के चलते बैन किए गए सिक्के भी संग्रहीत किए हैं।
एक लाख 72 हजार जुटाई माचिस
नरेंद्र पाल ने एक लाख 72 हजार अलग-अलग प्रकार की माचिस भी जुटाई हैं। इनमें से 80 फीसदी विदेशी हैं। यहीं नहीं, वर्ष 1935 से लेकर आज तक के कैमरे व दुर्लभ डाक टिकटें व अति प्राचीन मिट्टी के बर्तन भी जुटाए हैं।
नई पीढ़ी में जिज्ञासा बढ़ाने का प्रयास : नरेंद्रपाल
नरेंद्रपाल सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य नई पीढ़ी में प्राचीन सभ्यता के प्रति जिज्ञासा बढ़ाना है ताकि उन्हें अपने पूर्वजों के रहन-सहन से लेकर शास्त्र व शस्त्रों का भी ज्ञान हो सके। इन वस्तुओं को देखने का युवाओं में भारी उत्साह दिखाई दे रहा है। करीब तीन हजार पर्यटक यहां भी हर रोज इन्हें देखने आ रहे हैं।