{"_id":"5cd72757bdec22074d53b65e","slug":"181557604183-kurukshetra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"निजी बस संचालकों की मनमानी का शिकार हो रहे यात्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निजी बस संचालकों की मनमानी का शिकार हो रहे यात्री
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। परिवहन विभाग के अधिकारियों की अंदेखी के चलते यात्रियों को निजी बस संचालकों की मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है। इन बसों के चालक-परिचालक यात्रियों से टिकट के पैसे वसूल कर कहीं पर भी उतार देते है, जिससे उनका पैसा व समय दोनों बर्बाद होते है तो वहीं भारी परेेशानी भी झेलनी पड़ती है। ऐसा ही मामला शनिवार को उस समय हुआ जब ठसका मीरांजी ट्रांसपोर्ट कंपनी की बस अंबाला से करनाल के लिए सायं करीब साढ़े छह बजे रवाना हुई। बस में सवार दर्जनों यात्रियों से करनाल के लिए टिकट के पैसे वूसल किए और जब बस पिपली पहुंची तो चालक-परिचालक ने दूसरी बस करनाल जाने का हवाला देते हुए उसमें बैठने की सलाह दी।
यात्री आशीष सिंघल, राजकुमार, प्रदीप, राजेश कुुमार आदि ने बताया कि वे चालक-परिचालक के कहे अनुसार दूसरी बस में सवार हो गए तो इस बस परिचालक ने फिर से करनाल के लिए टिकट लेने को कहा। पहली बस की टिकट दिखाते हुए उन्होंने पैसे वसूल किए जाने की बात कही तो चालक ने मानने से इंकार कर दिया। इस पर यात्री बस से उतरकर वापस उसी बस चालक-परिचालक के पास पहुंचे तो वह बस लेकर लाडवा की ओर से फरार हो गए। मजबूरी के चलते यात्रियों को फिर से टिकट के पैसे देकर दूसरी बस में सवार होना पड़ा। यात्रियों को कहना है कि यह सब परिवहन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही व अंदेखी तथा निजी बस संचालकों की मनमानी के चलते हो रहा है। जहां विभाग सरकारी बसें पर्याप्त संख्या में रूटों पर नहीं चला पा रहा है वहीं निजी बसें लगातार बढ़ रही है, लेकिन इनके संचालकों की मनमानी पर कोई लगाम नहीं लगाई जा रही है।
वहीं, जीएम रविंद्र पाठक का कहना है कि निजी बस संचालकों की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी। कोई बस संचालक व अन्य कर्मी यात्रियों से टिकट के पैसे वसूल करने पर भी तय रूट पर नहीं पहुंचाता तो ऐसी बस को इंपाउंड किया जाएगा। वे खुद ऐसी बसों की जांच के लिए टीम उतारेंगे तो वहीं एडीसी कम आरटीए को भी पत्र लिखेंगे, ताकि उनकी ओर से भी ऐसी बसों की जांच हो सके और यात्रियों को परेशानी न झेलनी पड़े।
यात्री आशीष सिंघल, राजकुमार, प्रदीप, राजेश कुुमार आदि ने बताया कि वे चालक-परिचालक के कहे अनुसार दूसरी बस में सवार हो गए तो इस बस परिचालक ने फिर से करनाल के लिए टिकट लेने को कहा। पहली बस की टिकट दिखाते हुए उन्होंने पैसे वसूल किए जाने की बात कही तो चालक ने मानने से इंकार कर दिया। इस पर यात्री बस से उतरकर वापस उसी बस चालक-परिचालक के पास पहुंचे तो वह बस लेकर लाडवा की ओर से फरार हो गए। मजबूरी के चलते यात्रियों को फिर से टिकट के पैसे देकर दूसरी बस में सवार होना पड़ा। यात्रियों को कहना है कि यह सब परिवहन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही व अंदेखी तथा निजी बस संचालकों की मनमानी के चलते हो रहा है। जहां विभाग सरकारी बसें पर्याप्त संख्या में रूटों पर नहीं चला पा रहा है वहीं निजी बसें लगातार बढ़ रही है, लेकिन इनके संचालकों की मनमानी पर कोई लगाम नहीं लगाई जा रही है।
विज्ञापन
वहीं, जीएम रविंद्र पाठक का कहना है कि निजी बस संचालकों की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी। कोई बस संचालक व अन्य कर्मी यात्रियों से टिकट के पैसे वसूल करने पर भी तय रूट पर नहीं पहुंचाता तो ऐसी बस को इंपाउंड किया जाएगा। वे खुद ऐसी बसों की जांच के लिए टीम उतारेंगे तो वहीं एडीसी कम आरटीए को भी पत्र लिखेंगे, ताकि उनकी ओर से भी ऐसी बसों की जांच हो सके और यात्रियों को परेशानी न झेलनी पड़े।
विज्ञापन