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कहर बरपा सकती है भाखड़ा व एसवाईएल नहर
Updated Mon, 30 Jul 2018 12:44 AM IST
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भाखड़ा और एसवाईएल नहरें बरपा सकती हैं कहर
बाढ़ आपदा प्रबंधन का सच: तटबंध जर्जर, साफ- सफाई के नाम पर खानापूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। बारिश के सीजन में खतरा बन चुकी यमुना नदी में बाढ़ के खतरे के चलते जहां प्रदेश सरकार अलर्ट पर आ गई है। वहीं भाखड़ा व एसवाईएल नहर कुरुक्षेत्र में कहर बरपा सकती हैं।
सिंचाई विभाग हर साल बाढ़ आपदा प्रबंधों पर करीब 60 लाख रुपये खर्च करता है। पर इन दोनों नहरों के खस्ताहाल तटबंध व लचर सफाई व्यवस्था इन प्रबंधों की पोल खोल रहे हैं। डीसी सहित अधिकारियों की टीमें नहरों का दो बार अवलोकन कर चुकी हैं।
अमर उजाला टीम ने नहरों का करीब पांच किलोमीटर दूरी तक दौरा किया। टीम ने देखा कि सिंचाई विभाग के कार्यालय से महज कुछ दूर एसवाईएल गंदगी, घास व कबाड़ से अटी है। पिहोवा रोड व ढांड रोड पुल से कुछ ही दूरी पर भाखड़ा नहर के तटबंध खस्ताहाल हैं। एसवाईएल नहर की भी ऐसी ही स्थिति है, जिसे सफाई की दरकार है तो सिंचाई विभाग के कार्यालय के समीप ही इस नहर के किनारे भी जर्जर हैं।
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76 गांव संवेदनशील चिह्नित
जिला प्रशासन ने भारी बारिश के बीच बाढ़ के खतरे से 76 गांव संवेदनशील चिह्नित किए हैं। ज्योतिसर, मुर्तजापुर, इंदबड़ी, गढ़ी रोडान, दबखेड़ी, टकोरन, बीबीपुर, शाहाबाद, मुमटी, रोहटी, मलिकपुर, झांसा, नलवी, दयालनगर, रूप नगर, बबकपुर, ठसका मीराजीं, टबरा, जलबेहड़ा, खंजरपुर, नैसी, लौटनी व समसपुर अति संवेदनशील हैं।
वर्ष 2010 में एसवाईएल ने बरपाया था कहर
वर्ष 2010 में एसवाईएल नहर ने कुरुक्षेत्र में कहर बरपाया था। गांव दबखेड़ी के समीप टूटी नहर को प्रशासन संभाल भी नहीं पाया था और सेना को मोर्चा संभालना पड़ा था। तब तक बाढ़ से हजारों लोग प्रभावित हो चुके थे। बाढ़ ने शहर में भी भारी मार की थी। इसके बावजूद भी हर वर्ष प्रशासन की ओर से वास्तविकता में पुख्ता प्रबंध नहीं किए जाते जबकि लोग उस समय बाढ़ के झेल चुके कहर को भुला नहीं पा रहे हैं।
खुद किया मुआयना, प्रबंध पूरे : डीआरओ
डीआरओ चांदी राम का कहना है कि जिले भर में बाढ़ का फिलहाल कहीं खतरा नहीं है। खुद नहरों का मुआयना किया है और सभी प्रबंध पुख्ता हैं। नहरों के तटबंध खस्ताहाल होने के लिए सिंचाई विभाग जिम्मेदार है। ऐसे हालात में पानी अधिक आने पर बाढ़ की स्थिति बनी तो वही अधिकारी जिम्मेदार होंगे। वहीं सिंचाई विभाग के एससईएन कृष्ण कुमार ने दो दिन पहले ही जॉइन किया है और छुट्टी के चलते उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के नबंर 1077 पर दे सकते सूचना
डीसी डॉ. एसएस फुलिया ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति की जानकारी हेल्पलाइन नंबर 1077 या राज्य बाढ़ राहत नियंत्रण कक्ष के नबंर 0172-2545938 पर दें। एसडीएम शाहाबाद सतबीर कुंडू ने कहा कि शाहाबाद उपमंडल में बाढ़ से संबंधित सूचना 01744-240555 पर दी जा सकती है।
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भाखड़ा और एसवाईएल नहरें बरपा सकती हैं कहर
बाढ़ आपदा प्रबंधन का सच: तटबंध जर्जर, साफ- सफाई के नाम पर खानापूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। बारिश के सीजन में खतरा बन चुकी यमुना नदी में बाढ़ के खतरे के चलते जहां प्रदेश सरकार अलर्ट पर आ गई है। वहीं भाखड़ा व एसवाईएल नहर कुरुक्षेत्र में कहर बरपा सकती हैं।
सिंचाई विभाग हर साल बाढ़ आपदा प्रबंधों पर करीब 60 लाख रुपये खर्च करता है। पर इन दोनों नहरों के खस्ताहाल तटबंध व लचर सफाई व्यवस्था इन प्रबंधों की पोल खोल रहे हैं। डीसी सहित अधिकारियों की टीमें नहरों का दो बार अवलोकन कर चुकी हैं।
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अमर उजाला टीम ने नहरों का करीब पांच किलोमीटर दूरी तक दौरा किया। टीम ने देखा कि सिंचाई विभाग के कार्यालय से महज कुछ दूर एसवाईएल गंदगी, घास व कबाड़ से अटी है। पिहोवा रोड व ढांड रोड पुल से कुछ ही दूरी पर भाखड़ा नहर के तटबंध खस्ताहाल हैं। एसवाईएल नहर की भी ऐसी ही स्थिति है, जिसे सफाई की दरकार है तो सिंचाई विभाग के कार्यालय के समीप ही इस नहर के किनारे भी जर्जर हैं।
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76 गांव संवेदनशील चिह्नित
जिला प्रशासन ने भारी बारिश के बीच बाढ़ के खतरे से 76 गांव संवेदनशील चिह्नित किए हैं। ज्योतिसर, मुर्तजापुर, इंदबड़ी, गढ़ी रोडान, दबखेड़ी, टकोरन, बीबीपुर, शाहाबाद, मुमटी, रोहटी, मलिकपुर, झांसा, नलवी, दयालनगर, रूप नगर, बबकपुर, ठसका मीराजीं, टबरा, जलबेहड़ा, खंजरपुर, नैसी, लौटनी व समसपुर अति संवेदनशील हैं।
वर्ष 2010 में एसवाईएल ने बरपाया था कहर
वर्ष 2010 में एसवाईएल नहर ने कुरुक्षेत्र में कहर बरपाया था। गांव दबखेड़ी के समीप टूटी नहर को प्रशासन संभाल भी नहीं पाया था और सेना को मोर्चा संभालना पड़ा था। तब तक बाढ़ से हजारों लोग प्रभावित हो चुके थे। बाढ़ ने शहर में भी भारी मार की थी। इसके बावजूद भी हर वर्ष प्रशासन की ओर से वास्तविकता में पुख्ता प्रबंध नहीं किए जाते जबकि लोग उस समय बाढ़ के झेल चुके कहर को भुला नहीं पा रहे हैं।
खुद किया मुआयना, प्रबंध पूरे : डीआरओ
डीआरओ चांदी राम का कहना है कि जिले भर में बाढ़ का फिलहाल कहीं खतरा नहीं है। खुद नहरों का मुआयना किया है और सभी प्रबंध पुख्ता हैं। नहरों के तटबंध खस्ताहाल होने के लिए सिंचाई विभाग जिम्मेदार है। ऐसे हालात में पानी अधिक आने पर बाढ़ की स्थिति बनी तो वही अधिकारी जिम्मेदार होंगे। वहीं सिंचाई विभाग के एससईएन कृष्ण कुमार ने दो दिन पहले ही जॉइन किया है और छुट्टी के चलते उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के नबंर 1077 पर दे सकते सूचना
डीसी डॉ. एसएस फुलिया ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति की जानकारी हेल्पलाइन नंबर 1077 या राज्य बाढ़ राहत नियंत्रण कक्ष के नबंर 0172-2545938 पर दें। एसडीएम शाहाबाद सतबीर कुंडू ने कहा कि शाहाबाद उपमंडल में बाढ़ से संबंधित सूचना 01744-240555 पर दी जा सकती है।