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मारकंडा नदी में आया साढे 19 हजार क्यूसिक पानी
Updated Mon, 30 Jul 2018 12:44 AM IST
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इधर... मारकंडा नदी में आया साढ़े 19 हजार क्यूसिक पानी
गांवों, डेरों, मंदिर व चौपालों में घुसा पानी, प्रशासन ने किए सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध
अमर उजाला ब्यूरो
शाहाबाद। रविवार तड़के मारकंडा नदी में साढ़े 19 हजार क्यूसिक पानी आ गया। नदी का पानी साथ लगते गांवों, डेरों, खेतों, गौशालाओं व चौपालों में भी घुस गया।
नदी में अचानक इतना पानी आने से पानी की मार गांव कलसाना के काली माता मंदिर, हरिजन कॉलोनी व चौपालों में हुई। पानी के कारण सामान को नुकसान हुआ, लेकिन जानमाल का किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। गांव कलसाना में पानी की निकासी को पाइप लगाए हुए थे, लेकिन पानी ज्यादा आने के कारण पाइप में पानी बैक मार गया और गांव के कई स्थानों पर पानी घुस गया। वहीं गांव कठवा, मारकंडा कालोनी व डेरों पर पानी की मार हुई। मारकंडा कॉलोनी बिल्कुल नदी के साथ सटी है इसलिए वहां पानी की मार ज्यादा रही। इसलिए वहां झोपड़ पट्टी में रहने वाले लोगों ऊंचे स्थानों पर आ गए और कुछ ने मारकंडा मंदिर में शरण ली। समाचार लिखे जाने तक करीब 15 हजार क्यूसिक पानी नदी में बह रहा था।
पंपों से निकाल रहे पानी
वहीं गांव के मंदिर, चौपालों व कालोनी में घुसे पानी को पंप द्वारा बाहर निकाला जा रहा है, ताकि पानी के कारण किसी को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे और अगर रात्रि के समय पानी की मात्रा बढ़ती है तो उससे भी बचाव किया जा सके।
मंदिर में बनाया कंट्रोल रूम
वहीं मारकंडा नदी में आए उफान को देखते हुए प्रशासन ने ऋषि मारकण्डेय मंदिर में कंट्रोल रूम स्थापित किया है। पटवारियों की ड्यूटियां नदी पर लगाई है। नदी के साथ लगते डेरों से लोगों को पहले से ही बाहर निकाल लिया गया है।
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प्रशासन ने नहीं पूछा हाल : सरपंच अमरेंद्र
वहीं गांव कठवा के सरपंच अमरेंद्र सिंह प्रशासन की व्यवस्था से नाखुश हैं। उन्होंने कहा कि गांव में नदी के पानी की मार हुई है ,लेकिन कोई भी प्रशासनिक अधिकारी गांव हाल जानने के लिए नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को तुरंत प्रभाव से राहत व्यवस्था करनी चाहि,। क्योंकि अगर पानी बढ़ता है तो इससे कोई भी नुकसान हो सकता है।
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इधर... मारकंडा नदी में आया साढ़े 19 हजार क्यूसिक पानी
गांवों, डेरों, मंदिर व चौपालों में घुसा पानी, प्रशासन ने किए सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध
अमर उजाला ब्यूरो
शाहाबाद। रविवार तड़के मारकंडा नदी में साढ़े 19 हजार क्यूसिक पानी आ गया। नदी का पानी साथ लगते गांवों, डेरों, खेतों, गौशालाओं व चौपालों में भी घुस गया।
नदी में अचानक इतना पानी आने से पानी की मार गांव कलसाना के काली माता मंदिर, हरिजन कॉलोनी व चौपालों में हुई। पानी के कारण सामान को नुकसान हुआ, लेकिन जानमाल का किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। गांव कलसाना में पानी की निकासी को पाइप लगाए हुए थे, लेकिन पानी ज्यादा आने के कारण पाइप में पानी बैक मार गया और गांव के कई स्थानों पर पानी घुस गया। वहीं गांव कठवा, मारकंडा कालोनी व डेरों पर पानी की मार हुई। मारकंडा कॉलोनी बिल्कुल नदी के साथ सटी है इसलिए वहां पानी की मार ज्यादा रही। इसलिए वहां झोपड़ पट्टी में रहने वाले लोगों ऊंचे स्थानों पर आ गए और कुछ ने मारकंडा मंदिर में शरण ली। समाचार लिखे जाने तक करीब 15 हजार क्यूसिक पानी नदी में बह रहा था।
पंपों से निकाल रहे पानी
वहीं गांव के मंदिर, चौपालों व कालोनी में घुसे पानी को पंप द्वारा बाहर निकाला जा रहा है, ताकि पानी के कारण किसी को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे और अगर रात्रि के समय पानी की मात्रा बढ़ती है तो उससे भी बचाव किया जा सके।
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मंदिर में बनाया कंट्रोल रूम
वहीं मारकंडा नदी में आए उफान को देखते हुए प्रशासन ने ऋषि मारकण्डेय मंदिर में कंट्रोल रूम स्थापित किया है। पटवारियों की ड्यूटियां नदी पर लगाई है। नदी के साथ लगते डेरों से लोगों को पहले से ही बाहर निकाल लिया गया है।
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प्रशासन ने नहीं पूछा हाल : सरपंच अमरेंद्र
वहीं गांव कठवा के सरपंच अमरेंद्र सिंह प्रशासन की व्यवस्था से नाखुश हैं। उन्होंने कहा कि गांव में नदी के पानी की मार हुई है ,लेकिन कोई भी प्रशासनिक अधिकारी गांव हाल जानने के लिए नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को तुरंत प्रभाव से राहत व्यवस्था करनी चाहि,। क्योंकि अगर पानी बढ़ता है तो इससे कोई भी नुकसान हो सकता है।