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युवा सांसदों ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर जताई चिंता
Updated Thu, 18 Oct 2018 01:04 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए रचनात्मक एवं ऊर्जा से भरे जनप्रतिनिधियों का होना जरूरी है। जनप्रतिनिधि समाज एवं देश के बारे में जागरूक रहते हैं तो देश तेज गति के साथ विकास करता है। भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के कारण ही आज भारत दुनिया में बड़ी तेज गति के साथ विकास कर रहा है। इस व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए युवा पीढ़ी की अधिक से अधिक राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है। ये बातें राज्यसभा सदस्य डॉ. डीपी वत्स ने कहीं। वे बुधवार को युवा संसद कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। कहा कि सांसद लोगों के जनप्रतिनिधि होते हैं। जो सांसद संसद के बाहर-अंदर अनुशासन में रहते हैं, जनता के हित में कार्य करें, वे श्रेष्ठ सांसद होते हैं।
अंबाला से सांसद रत्नलाल कटारिया ने कहा कि संसद में जाने से पहले विपक्ष एवं सरकार के मंत्रियों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। होमवर्क करने के बाद ही एक अच्छा सांसद संसद की बहस में शामिल होता है। भारतीय संसद के इतिहास में ऐसे हजारों उदाहरण हैं जिसमें संसद में होने वाली बहस व चर्चा में इसकी श्रेष्ठता व गुणवत्ता को साबित किया है। उन्होंने एक सांसद के रूप में अपने अनुभवों को विद्यार्थियों के साथ सांझा किया। इसके साथ ही वर्तमान संसद की विभिन्न गतिविधियों के बारे में विद्यार्थियों को अवगत कराया। सभी विद्यार्थियों से अपील में कहा कि वे अपने जीवन में ईमानदारी के साथ मेहनत करते जाएं। सफलता निश्चित रूप से एक दिन उन्हें जरूर मिलेगी। उन्होंने अंधविश्वास को रोकने के लिए राष्ट्रीय युवा संसद में बिल पास किया। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने संसद में जनसंख्या नियंत्रण के लिए बच्चे दो ही अच्छे विषय पर प्रस्ताव भी रखा। संसद में युवा सांसदों ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ आपराधिक घटनाओं पर जताई चिंता, पंजाब हरियाणा में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण सहित विभिन्न विषयों पर गंभीर चर्चा में विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉॅ. कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा हो जाए तो लोगों की नजर में संसद व सांसद दोनों की गरिमा बढ़ेगी। शिवाजी यूनिवर्सिटी कोल्हापुर के डॉ. प्रह्लाद मारुति माणे एवं पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रो. सविंद्र सिंह का उन्होंने आभार जताया। युवा संसद में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के 53 विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने लोकसभा सभापति, प्रधानमंत्री, महिला एवं बाल कल्याण मंत्री, विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, विपक्ष की भूमिका को बड़े अच्छे तरीके से निभाया। सांसद सहित निर्णायक मंडल के सभी सदस्यों ने विद्यार्थियों की खूब सराहना की। छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. पवन शर्मा ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्रालय की ओर से छात्र संसद का उद्देश्य विद्यार्थियों को संसदीय परंपराओं का ज्ञान कराना है। सह-संयोजक डा. नीरज बातिश ने बताया कि प्रतियोगिता में प्रियंका वर्मा प्रथम, मोनिका ने द्वितीय एवं विजेता ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। साहिल, अनन्या व युवराज को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर कुलपति डा. कैलाशचंद्र शर्मा, कुलसचिव डा. नीता खन्ना, डा. मंजूषा शर्मा, रवि थापा एवं नरेंद्र निम्मा सहित अन्य मौजूद रहे।
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कुरुक्षेत्र। एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए रचनात्मक एवं ऊर्जा से भरे जनप्रतिनिधियों का होना जरूरी है। जनप्रतिनिधि समाज एवं देश के बारे में जागरूक रहते हैं तो देश तेज गति के साथ विकास करता है। भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के कारण ही आज भारत दुनिया में बड़ी तेज गति के साथ विकास कर रहा है। इस व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए युवा पीढ़ी की अधिक से अधिक राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है। ये बातें राज्यसभा सदस्य डॉ. डीपी वत्स ने कहीं। वे बुधवार को युवा संसद कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। कहा कि सांसद लोगों के जनप्रतिनिधि होते हैं। जो सांसद संसद के बाहर-अंदर अनुशासन में रहते हैं, जनता के हित में कार्य करें, वे श्रेष्ठ सांसद होते हैं।
अंबाला से सांसद रत्नलाल कटारिया ने कहा कि संसद में जाने से पहले विपक्ष एवं सरकार के मंत्रियों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। होमवर्क करने के बाद ही एक अच्छा सांसद संसद की बहस में शामिल होता है। भारतीय संसद के इतिहास में ऐसे हजारों उदाहरण हैं जिसमें संसद में होने वाली बहस व चर्चा में इसकी श्रेष्ठता व गुणवत्ता को साबित किया है। उन्होंने एक सांसद के रूप में अपने अनुभवों को विद्यार्थियों के साथ सांझा किया। इसके साथ ही वर्तमान संसद की विभिन्न गतिविधियों के बारे में विद्यार्थियों को अवगत कराया। सभी विद्यार्थियों से अपील में कहा कि वे अपने जीवन में ईमानदारी के साथ मेहनत करते जाएं। सफलता निश्चित रूप से एक दिन उन्हें जरूर मिलेगी। उन्होंने अंधविश्वास को रोकने के लिए राष्ट्रीय युवा संसद में बिल पास किया। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने संसद में जनसंख्या नियंत्रण के लिए बच्चे दो ही अच्छे विषय पर प्रस्ताव भी रखा। संसद में युवा सांसदों ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ आपराधिक घटनाओं पर जताई चिंता, पंजाब हरियाणा में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण सहित विभिन्न विषयों पर गंभीर चर्चा में विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉॅ. कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा हो जाए तो लोगों की नजर में संसद व सांसद दोनों की गरिमा बढ़ेगी। शिवाजी यूनिवर्सिटी कोल्हापुर के डॉ. प्रह्लाद मारुति माणे एवं पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रो. सविंद्र सिंह का उन्होंने आभार जताया। युवा संसद में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के 53 विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने लोकसभा सभापति, प्रधानमंत्री, महिला एवं बाल कल्याण मंत्री, विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, विपक्ष की भूमिका को बड़े अच्छे तरीके से निभाया। सांसद सहित निर्णायक मंडल के सभी सदस्यों ने विद्यार्थियों की खूब सराहना की। छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. पवन शर्मा ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्रालय की ओर से छात्र संसद का उद्देश्य विद्यार्थियों को संसदीय परंपराओं का ज्ञान कराना है। सह-संयोजक डा. नीरज बातिश ने बताया कि प्रतियोगिता में प्रियंका वर्मा प्रथम, मोनिका ने द्वितीय एवं विजेता ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। साहिल, अनन्या व युवराज को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर कुलपति डा. कैलाशचंद्र शर्मा, कुलसचिव डा. नीता खन्ना, डा. मंजूषा शर्मा, रवि थापा एवं नरेंद्र निम्मा सहित अन्य मौजूद रहे।
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