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श्मशान घाट बनाने के लिए सरपंच ने दी अपनी जमीन ं
Updated Wed, 22 Nov 2017 12:14 AM IST
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श्मशान घाट बनाने के लिए सरपंच ने दी अपनी जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
लाडवा।
गांव बीड सौंटी में आज तक शमशान घाट नहीं है। श्मशान घाट न होने से लोगों को अपने किसी प्रियजन की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार करने के लिए बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लोगों की परेशानी देखते हुए गांव के मौजूदा सरपंच ने गांव में अपनी निजी जमीन से ग्राम पंचायत को शमशानघाट के लिए जमीन दान देकर एक मिसाल पेश की है। सरपंच द्वारा दी गई जमीन पर अब श्मशान घाट बनाने का कार्य चल रहा है। पहले भी गांव में एक श्मशान घाट बना हुआ था, जोकि गांव के एक किसान के खेतों में बना हुआ था। साल भर से इस किसान ने अपने खेतों में बने शमशानघाट में अंतिम संस्कार करने से रोका हुआ है। श्मशान घाट न होने से पिछले दिनों गांव में एक व्यक्ति की मृत्यु होने पर मृतक के परिजनों को अपनी जमीन में मृतक का अंतिम संस्कार करना पड़ा। गांव के सरपंच चानना राम ने बताया कि गांव में आज तक पंचायती व सरकारी जमीन पर एक भी शमशानघाट नहीं था और न ही गांव में ग्राम पंचायत के नाम कोई जमीन है, जिस पर शमशानघाट बनाया जा सके। गांव में किसी की मृत्यु होन पर मृतक के परिजनों को अंतिम संस्कार करने के लिए या तो दूसरे गांव के शमशानघाट का सहारा लेना पड़ता है या फिर अपनी जमीन में अंतिम संस्कार किया जाता है। गांववासियों की इस गंभीर समस्या का समाधान निकालने के लिए हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला तो उन्होंने अपनी निजी जमीन से ग्राम पंचायत के नाम शमशानघाट के नाम जमीन दान की तथा पंचायत के नाम रजिस्ट्री करवाई गई।
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अमर उजाला ब्यूरो
लाडवा।
गांव बीड सौंटी में आज तक शमशान घाट नहीं है। श्मशान घाट न होने से लोगों को अपने किसी प्रियजन की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार करने के लिए बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लोगों की परेशानी देखते हुए गांव के मौजूदा सरपंच ने गांव में अपनी निजी जमीन से ग्राम पंचायत को शमशानघाट के लिए जमीन दान देकर एक मिसाल पेश की है। सरपंच द्वारा दी गई जमीन पर अब श्मशान घाट बनाने का कार्य चल रहा है। पहले भी गांव में एक श्मशान घाट बना हुआ था, जोकि गांव के एक किसान के खेतों में बना हुआ था। साल भर से इस किसान ने अपने खेतों में बने शमशानघाट में अंतिम संस्कार करने से रोका हुआ है। श्मशान घाट न होने से पिछले दिनों गांव में एक व्यक्ति की मृत्यु होने पर मृतक के परिजनों को अपनी जमीन में मृतक का अंतिम संस्कार करना पड़ा। गांव के सरपंच चानना राम ने बताया कि गांव में आज तक पंचायती व सरकारी जमीन पर एक भी शमशानघाट नहीं था और न ही गांव में ग्राम पंचायत के नाम कोई जमीन है, जिस पर शमशानघाट बनाया जा सके। गांव में किसी की मृत्यु होन पर मृतक के परिजनों को अंतिम संस्कार करने के लिए या तो दूसरे गांव के शमशानघाट का सहारा लेना पड़ता है या फिर अपनी जमीन में अंतिम संस्कार किया जाता है। गांववासियों की इस गंभीर समस्या का समाधान निकालने के लिए हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला तो उन्होंने अपनी निजी जमीन से ग्राम पंचायत के नाम शमशानघाट के नाम जमीन दान की तथा पंचायत के नाम रजिस्ट्री करवाई गई।