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धर्मनगरी में तीन हजार से ज्यादा ऑटो उगल रहे जहरीला धुआं
Updated Fri, 14 Jul 2017 12:04 AM IST
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सेहत को खटारा बना रहे शहर में चलने वाले ऑटो
धर्मनगरी में तीन हजार से ज्यादा ऑटो उगल रहे जहरीला धुआं
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। शहर में चल रहे करीब 3 हजार से ज्यादा ऑटो जहरीला धुआं फेंककर वातावरण को प्रदूषित कर रहा है। इनमें से अधिकतर नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं तो वहीं सैकड़ों नौसिखिये चालक भी नियमों की धड़ल्ले से सड़कों पर ऑटो दौड़ा रहे हैं। ऐसे चालकों को न नियमों की परवाह है और न ही पुलिस का डर है, यहां तक कि पुलिस द्वारा समय-समय पर पढ़ाए जा रहे नियमों के पाठ का भी इन पर कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है।
शहर में हर रोज करीब तीन हजार ऑटो सुबह पांच बजे से लेकर रात के 10 बजे तक शहर की सड़कों पर जहरीला धुआं उगलते हैं तो दर्जनों वाहन रात भर भी सड़कों पर दौड़ते हैं। इनसे निकलने वाला धुआं जहां वातावरण को प्रदूषित कर रहा है वहीं अधिकतर खटारा हो चुके आटो की तेज आवाज से ध्वनि प्रदूषण भी फैल रहा है। अब ये ऑटो शहरवासियों को ही नहीं बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों को भी चुभने लगे हैं। शहर के गुलजारी लाल नंदा मार्ग , पिपली चौक, नया बस अडा, बिरला मंदिर चौक, झांसा रोड, रेलवे रोड पर पर जहां इन ऑटो की भीड़ हर समय जुटी रहती है तो वहीं शहर की दूसरी सड़कों पर भी दिन भर दौड़ते हुए दिखाई देते हैं। शहर के थर्ड ग्रेट से पिपली तक जाने मेें ही करीब 25-30 मिनट लग जाते हैं। सड़कों पर पूरा दिन ऑटो चालको की मनमानी के चलते जाम लगा रहता है तो हर रोज हादसे भी हो रहे हैं। जाम लगने के कारण सड़कों पर धुआं रहने लगा है। वायु प्रदूषण के बढ़ने के कारण लोगों में बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। लोग इसी जहरीली हवा में सांस लेते हैं। इसमें कार्बन-डाइऑक्साइड ,मोनोऑकसाइड आदि मौजूद होते हैं। वायु प्रदूषण बढ़ने के कारण हवा में कार्बन की मात्रा अधिक होने लगी है जिससे कि लोगों में फेफड़ों से संबंधित बीमारियां भी आम हो गई है। एक रिपोर्ट पर विश्वास करें तो पिछले 10 सालों मेें वायु प्रदूषण में लगभग 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है , जिसकी वजह से तापमान में बढ़ोतरी हो रही है।
गरीबी के चलते खटारा ऑटो चलाने को मजबूर
ऑटो चालक विजय कुमार, प्रदीप, अजय व सतवीर सिंह का कहना है कि ऑटो चालकों में अधिकतर की आर्थिक हालत कमजोर ही है और इसी के चलते ही वे न तो नए ऑटो ले सकते और न हीं पुराने ऑटो की इतनी रिपेयर आदि करवा पाते। इन ऑटो चालकों के परिवार का पोषण इन्हीं से ही हो रहा है।
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वायु प्रदूषण के नुकसान
-सांस लेने में तकलीफ होना
-बेचैनी होना
-हृदय में दर्द महसूस होना
- फेफड़ों का कमजोर हो जाना
- कैंसर से ग्रस्त हो जाना
-एलर्जी हो जाना
ट्रैफिक पुलिस के पाठ से भी नहीं सुधरे हालात
ट्रैफिक पुलिस की ओर से समय-समय पर ऑटो चालकों के साथ मीटिंग की जाती रही तो वहीं पुलिस की ओर से उन्हें नियमों के पालन को लेकर सख्त हिदायतें भी दी जाती रहीं। इसके बावजूद हालात नहीं सुधर पाए हैं। अब ट्रैफिक पुलिस ही अनदेखी करने लगी है, जिससे ऐसे ऑटो चालकों का हौसला बढ़ता जा रहा है।
जानलेवा साबित होता जा रहा है धुआं : ललित
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. ललित गुप्ता ने बताया कि शहर में बढ़ते धुएं व वायु प्रदूषण के कारण शहरवासियों में सांस से संबंधित बीमारियों में बढ़ोतरी हो रही है। वायु प्रदूषण के कारण मनुष्य के दिमाग की नसें कमजोर होती जा रही है। इसके कारण लोग मानसिक बीमारियों से भी ग्रस्त हो रहे हैं। वही वायु प्रदूषण से कैंसर, अस्थमा जैसी बीमारियां भी हो जाती हैं। इससे बचने के लिए लोगों को घर से बाहर निकलते समय अपने मुंह को ढांप कर जाना चाहिए। वायु प्रदूषण का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों व बुजुर्गों पर पड़ रहा है।
150 से अधिक के काटे चालान, अब करेंगे सख्ती : देवेंद्र
ट्रैफिक एसएचओ देवेंद्र कुमार का कहना है कि आज भी शहर में काफी संख्या में ऑटो चालक नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। पहले सभी ऑटो चालकों को नियमों की पालना करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब सख्ती बरती जाएगी। इसी के चलते ही पिछले माह करीब 150 ऑटो के चालान किए गए। इनमें करीब 60 ऑटो पर नंबर प्लेट ही नहीं थी तो कई चालक ओवर स्पीड में ऑटो चला रहे थे। अब नियमों की अनदेखी की तो ऐसे ऑटो चालकों को बख्शा नहीं जाएगा।
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सेहत को खटारा बना रहे शहर में चलने वाले ऑटो
धर्मनगरी में तीन हजार से ज्यादा ऑटो उगल रहे जहरीला धुआं
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। शहर में चल रहे करीब 3 हजार से ज्यादा ऑटो जहरीला धुआं फेंककर वातावरण को प्रदूषित कर रहा है। इनमें से अधिकतर नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं तो वहीं सैकड़ों नौसिखिये चालक भी नियमों की धड़ल्ले से सड़कों पर ऑटो दौड़ा रहे हैं। ऐसे चालकों को न नियमों की परवाह है और न ही पुलिस का डर है, यहां तक कि पुलिस द्वारा समय-समय पर पढ़ाए जा रहे नियमों के पाठ का भी इन पर कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है।
शहर में हर रोज करीब तीन हजार ऑटो सुबह पांच बजे से लेकर रात के 10 बजे तक शहर की सड़कों पर जहरीला धुआं उगलते हैं तो दर्जनों वाहन रात भर भी सड़कों पर दौड़ते हैं। इनसे निकलने वाला धुआं जहां वातावरण को प्रदूषित कर रहा है वहीं अधिकतर खटारा हो चुके आटो की तेज आवाज से ध्वनि प्रदूषण भी फैल रहा है। अब ये ऑटो शहरवासियों को ही नहीं बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों को भी चुभने लगे हैं। शहर के गुलजारी लाल नंदा मार्ग , पिपली चौक, नया बस अडा, बिरला मंदिर चौक, झांसा रोड, रेलवे रोड पर पर जहां इन ऑटो की भीड़ हर समय जुटी रहती है तो वहीं शहर की दूसरी सड़कों पर भी दिन भर दौड़ते हुए दिखाई देते हैं। शहर के थर्ड ग्रेट से पिपली तक जाने मेें ही करीब 25-30 मिनट लग जाते हैं। सड़कों पर पूरा दिन ऑटो चालको की मनमानी के चलते जाम लगा रहता है तो हर रोज हादसे भी हो रहे हैं। जाम लगने के कारण सड़कों पर धुआं रहने लगा है। वायु प्रदूषण के बढ़ने के कारण लोगों में बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। लोग इसी जहरीली हवा में सांस लेते हैं। इसमें कार्बन-डाइऑक्साइड ,मोनोऑकसाइड आदि मौजूद होते हैं। वायु प्रदूषण बढ़ने के कारण हवा में कार्बन की मात्रा अधिक होने लगी है जिससे कि लोगों में फेफड़ों से संबंधित बीमारियां भी आम हो गई है। एक रिपोर्ट पर विश्वास करें तो पिछले 10 सालों मेें वायु प्रदूषण में लगभग 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है , जिसकी वजह से तापमान में बढ़ोतरी हो रही है।
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गरीबी के चलते खटारा ऑटो चलाने को मजबूर
ऑटो चालक विजय कुमार, प्रदीप, अजय व सतवीर सिंह का कहना है कि ऑटो चालकों में अधिकतर की आर्थिक हालत कमजोर ही है और इसी के चलते ही वे न तो नए ऑटो ले सकते और न हीं पुराने ऑटो की इतनी रिपेयर आदि करवा पाते। इन ऑटो चालकों के परिवार का पोषण इन्हीं से ही हो रहा है।
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वायु प्रदूषण के नुकसान
-सांस लेने में तकलीफ होना
-बेचैनी होना
-हृदय में दर्द महसूस होना
- फेफड़ों का कमजोर हो जाना
- कैंसर से ग्रस्त हो जाना
-एलर्जी हो जाना
ट्रैफिक पुलिस के पाठ से भी नहीं सुधरे हालात
ट्रैफिक पुलिस की ओर से समय-समय पर ऑटो चालकों के साथ मीटिंग की जाती रही तो वहीं पुलिस की ओर से उन्हें नियमों के पालन को लेकर सख्त हिदायतें भी दी जाती रहीं। इसके बावजूद हालात नहीं सुधर पाए हैं। अब ट्रैफिक पुलिस ही अनदेखी करने लगी है, जिससे ऐसे ऑटो चालकों का हौसला बढ़ता जा रहा है।
जानलेवा साबित होता जा रहा है धुआं : ललित
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. ललित गुप्ता ने बताया कि शहर में बढ़ते धुएं व वायु प्रदूषण के कारण शहरवासियों में सांस से संबंधित बीमारियों में बढ़ोतरी हो रही है। वायु प्रदूषण के कारण मनुष्य के दिमाग की नसें कमजोर होती जा रही है। इसके कारण लोग मानसिक बीमारियों से भी ग्रस्त हो रहे हैं। वही वायु प्रदूषण से कैंसर, अस्थमा जैसी बीमारियां भी हो जाती हैं। इससे बचने के लिए लोगों को घर से बाहर निकलते समय अपने मुंह को ढांप कर जाना चाहिए। वायु प्रदूषण का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों व बुजुर्गों पर पड़ रहा है।
150 से अधिक के काटे चालान, अब करेंगे सख्ती : देवेंद्र
ट्रैफिक एसएचओ देवेंद्र कुमार का कहना है कि आज भी शहर में काफी संख्या में ऑटो चालक नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। पहले सभी ऑटो चालकों को नियमों की पालना करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब सख्ती बरती जाएगी। इसी के चलते ही पिछले माह करीब 150 ऑटो के चालान किए गए। इनमें करीब 60 ऑटो पर नंबर प्लेट ही नहीं थी तो कई चालक ओवर स्पीड में ऑटो चला रहे थे। अब नियमों की अनदेखी की तो ऐसे ऑटो चालकों को बख्शा नहीं जाएगा।