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Karnal News: बिना गुरुजी की पढ़ाई, कैसे पास होंगे परीक्षा
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गगन तलवार
करनाल। बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम को सुधारते हुए 10 प्रतिशत तक बढ़ाने का विभाग ने लक्ष्य राजकीय स्कूलों को दिया है। वहीं स्कूलों में विद्यार्थियों का बिना गुरु जी के विषयों का ज्ञान अधूरा रहा गया है। ऐसे में परिणाम बढ़ना तो विद्यार्थियों का पास होना मुश्किल दिखाई दे रहा है। हालांकि विभाग का दावा है कि वैकल्पिक व्यवस्था से पाठ्यक्रम सभी स्कूलों में पूरा कराया है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो हर स्कूल में औसतन तीस प्रतिशत पद रिक्त हैं। जिले में कक्षा नौवीं से 12वीं तक पढ़ाई वाले 178 विद्यालय हैं, जहां पीजीटी के कुल 683 पद रिक्त हैं। यानी प्रत्येक स्कूल में औसतन चार शिक्षकों की कमी है। ऐसे में जिन विषयों के पद रिक्त हैं, उस विषय के पीरियड में या तो विद्यार्थी कक्षाओं में खाली बैठते हैं या फिर स्कूल मुखिया की मेहरबानी से दूसरे विषय के शिक्षक से पढ़ने को मजबूर हैं।
कुल 2111 पदों में से 1429 पद भरे हैं, जबकि 98 पर अतिथि अध्यापकों से काम चलाया जा रहा है। सर्वाधिक कंप्यूटर साइंस के 116 में से 98 पद रिक्त हैं। वहीं शारीरिक शिक्षा के शिक्षक की स्थिति देखें तो 63 में से 57 पद खाली हैं। इसके अलावा फाइन आर्ट के 53 में से 45 पद रिक्त हैं। ये वे विषय हैं जिनका चुनाव विद्यार्थी अपनी रुचि से करते हैं पर शिक्षकों के अभाव में वे पढ़ाई नहीं कर पाते।
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इन 178 राजकीय विद्यालयों में कक्षा नौवीं से 12वीं तक के करीब 48 हजार विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। इन कक्षाओं की पढ़ाई विद्यार्थियों के भविष्य की राह तय करती है। यही वो चरण होता है, जब दसवीं की पढ़ाई के बाद विद्यार्थी विशेष संकाय (कला, वाणिज्य, मेडिकल या नॉन मेडिकल) चुनता है लेकिन यहां पढ़ाने के लिए विद्यालयों में पर्याप्त विषय विशेषज्ञ ही नहीं हैं।
विज्ञान वाला गणित, हिंदी शिक्षक पढ़ा रहा संस्कृत
178 स्कूलों में से ज्यादातर के हालात यह हैं कि जहां विज्ञान का पीजीटी है, वहां गणित शिक्षक का पद खाली है और जहां गणित का है तो वहां विज्ञान की किसी इकाई की सीट खाली है। इसी तरह हिंदी शिक्षक होने पर संस्कृत व अंग्रेजी शिक्षक होने पर सामाजिक विज्ञान का पद खाली है। ऐसे में विभाग की वैकल्पिक व्यवस्था के तहत विज्ञान शिक्षक गणित पढ़ाने और हिंदी शिक्षक संस्कृत पढ़ा रहा है।
घरौंडा-इंद्री में फाइन आर्ट, संगीत शिक्षक का पद ही नहीं
स्थिति यह है कि घरौंडा और इंद्री खंड में शिक्षकों की कमी ज्यादा है। यहां फाइन आर्ट, संगीत शिक्षक और होम साइंस का एक भी शिक्षक नहीं है। इसके अलावा निसिंग में कंप्यूटर साइंस का महज एक व शारीरिक शिक्षक और संगीत का एक भी शिक्षक नहीं है। इसके अलावा कई स्कूल ऐसे हैं, जहां मुख्य विषयों का शिक्षक नहीं है, इन विषयों को पढ़ाने के लिए पास के स्कूल से शिक्षक को बुलाया गया।
सरकार की ओर से रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। पीटीजी समेत अन्य शिक्षकों के पदों को एचकेआरएन के माध्यम से भी भरा जा रहा है। नए सत्र से पहले शिक्षकों की कमी को पूरा कर लिया जाएगा। - राजपाल चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी।
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करनाल। बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम को सुधारते हुए 10 प्रतिशत तक बढ़ाने का विभाग ने लक्ष्य राजकीय स्कूलों को दिया है। वहीं स्कूलों में विद्यार्थियों का बिना गुरु जी के विषयों का ज्ञान अधूरा रहा गया है। ऐसे में परिणाम बढ़ना तो विद्यार्थियों का पास होना मुश्किल दिखाई दे रहा है। हालांकि विभाग का दावा है कि वैकल्पिक व्यवस्था से पाठ्यक्रम सभी स्कूलों में पूरा कराया है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो हर स्कूल में औसतन तीस प्रतिशत पद रिक्त हैं। जिले में कक्षा नौवीं से 12वीं तक पढ़ाई वाले 178 विद्यालय हैं, जहां पीजीटी के कुल 683 पद रिक्त हैं। यानी प्रत्येक स्कूल में औसतन चार शिक्षकों की कमी है। ऐसे में जिन विषयों के पद रिक्त हैं, उस विषय के पीरियड में या तो विद्यार्थी कक्षाओं में खाली बैठते हैं या फिर स्कूल मुखिया की मेहरबानी से दूसरे विषय के शिक्षक से पढ़ने को मजबूर हैं।
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कुल 2111 पदों में से 1429 पद भरे हैं, जबकि 98 पर अतिथि अध्यापकों से काम चलाया जा रहा है। सर्वाधिक कंप्यूटर साइंस के 116 में से 98 पद रिक्त हैं। वहीं शारीरिक शिक्षा के शिक्षक की स्थिति देखें तो 63 में से 57 पद खाली हैं। इसके अलावा फाइन आर्ट के 53 में से 45 पद रिक्त हैं। ये वे विषय हैं जिनका चुनाव विद्यार्थी अपनी रुचि से करते हैं पर शिक्षकों के अभाव में वे पढ़ाई नहीं कर पाते।
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इन 178 राजकीय विद्यालयों में कक्षा नौवीं से 12वीं तक के करीब 48 हजार विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। इन कक्षाओं की पढ़ाई विद्यार्थियों के भविष्य की राह तय करती है। यही वो चरण होता है, जब दसवीं की पढ़ाई के बाद विद्यार्थी विशेष संकाय (कला, वाणिज्य, मेडिकल या नॉन मेडिकल) चुनता है लेकिन यहां पढ़ाने के लिए विद्यालयों में पर्याप्त विषय विशेषज्ञ ही नहीं हैं।
विज्ञान वाला गणित, हिंदी शिक्षक पढ़ा रहा संस्कृत
178 स्कूलों में से ज्यादातर के हालात यह हैं कि जहां विज्ञान का पीजीटी है, वहां गणित शिक्षक का पद खाली है और जहां गणित का है तो वहां विज्ञान की किसी इकाई की सीट खाली है। इसी तरह हिंदी शिक्षक होने पर संस्कृत व अंग्रेजी शिक्षक होने पर सामाजिक विज्ञान का पद खाली है। ऐसे में विभाग की वैकल्पिक व्यवस्था के तहत विज्ञान शिक्षक गणित पढ़ाने और हिंदी शिक्षक संस्कृत पढ़ा रहा है।
घरौंडा-इंद्री में फाइन आर्ट, संगीत शिक्षक का पद ही नहीं
स्थिति यह है कि घरौंडा और इंद्री खंड में शिक्षकों की कमी ज्यादा है। यहां फाइन आर्ट, संगीत शिक्षक और होम साइंस का एक भी शिक्षक नहीं है। इसके अलावा निसिंग में कंप्यूटर साइंस का महज एक व शारीरिक शिक्षक और संगीत का एक भी शिक्षक नहीं है। इसके अलावा कई स्कूल ऐसे हैं, जहां मुख्य विषयों का शिक्षक नहीं है, इन विषयों को पढ़ाने के लिए पास के स्कूल से शिक्षक को बुलाया गया।
सरकार की ओर से रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। पीटीजी समेत अन्य शिक्षकों के पदों को एचकेआरएन के माध्यम से भी भरा जा रहा है। नए सत्र से पहले शिक्षकों की कमी को पूरा कर लिया जाएगा। - राजपाल चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी।