खुलेआम नियमों के विपरीत चल रहा ट्यूशन का खेल
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सीएम सिटी के छात्रों का भविष्य प्राइवेट स्कूल शिक्षकों के जकड़न में है। शिक्षक निजी स्कूल संचालकों के साथ मिलकर खुलेआम ट्यूशन का अवैध खेल खेल रहे हैं। इन शिक्षकों के शिकंजे में शहर के हजारों परिजन फंसे है, जिनसे हर माह हजारों रुपये ट्यूशन फीस के नाम पर ऐंठा जा रहा है। यह जबरन वसूली शिक्षक अपने ही क्लास में पढ़ने वाले छात्रों से कर रहे हैं, लेकिन मजबूर परिजन शिक्षकों द्वारा किये जा रहे इस शोषण का किसी से शिकायत तक नहीं करा पा रहे। ट्यूशन का यह अवैध बाजार शहर में हर जगह गर्म है। इसमें छोटे निजी स्कूल से लेकर बड़े स्कूल, सभी शामिल हैं। बस फर्क इतना है कि कुछ गुपचुप तरीके से अपने घरों पर छात्रों को बुलाकर ट्यूशन पढ़ाते हैं, तो वहीं कुछ खुलेआम ट्यूशन केंद्र खोलकर परिजनों से पैसे ऐंठ रहे हैं।
सीएम सिटी में शिक्षा के नाम पर छात्र व उनके परिजनों से किया जा रहा यह भ्रष्टाचार अब अपने चरमसीमा पर पहुंच गया है। परिजन शिक्षक और स्कूल संचालकों के इस खेल के बीच बुरी तरह से पिस रहे हैं। हालात यह है कि, निजी स्कूलों में एडमिशन लेते ही शिक्षकों की तरफ से यह फरमान आ जाता है कि आप का बच्चा पढ़ाई में कमजोर है, इसे ट्यूशन के लिए भेज दो। अगर परिजन ना-नुकार करता है तो शिक्षकों द्वारा परिजनों को उनके बच्चे को फेल कर देने का खौफ तक दिखाया जाता है।
परिजनों को भी डर रहता है कि अगर वे अपने बच्चों को ट्यूशन के लिए न भेजे तो शिक्षक खुन्नस में कहीं उनके बच्चे को फेल न कर दे। इसलिए मजबूरन परिजन अपने बच्चों को स्कूल के बाद ट्यूशन के लिए शिक्षकों के पास भेजते हैं। शिक्षकों द्वारा किए जा रहे इस शोषण को परिजन कई बार दबी जुबान में प्रशासन के सामने भी उठा चुके हैं, लेकिन अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए वे इसका खुला विरोध नहीं कर पा रहे। शिक्षक भी परिजनों की इस मजबूरी का जमकर फायदा उठा रहे। इस मामले को लेकर कई बार अभिभावक मंच की ओर से शिकायत भी दर्ज कराई गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हो पाई।
मैथ, फिजिक्स और अंग्रेजी विषय में ट्यूशन लगभग अनिवार्य
निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के कुछ परिजनों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मैथ, फिजिक्स और अंग्रेजी विषय में ट्यूशन लगभग अनिवार्य हो गया है। क्लास शुरू होते ही इन विषयों के शिक्षकों द्वारा कह दिया जाता है कि अगर अच्छे मार्क लाने हैं, तो उन्हें स्कूल के बाद अतिरिक्त ट्यूशन लेना होगा। जो छात्र इन विषयों में अपने शिक्षक से ट्यूशन नहीं लेता वह क्लास में सबसे फिसड्डी गिना जाता है और एग्जाम में उसके मार्क भी सबसे कम आते हैं। वहीं ट्यूशन लेने वाले बच्चे बोर्ड एग्जाम में भले ही कम मार्क लाए, लेकिन स्कूल की परिक्षाओं में सबसे अच्छे नंबरों से पास होते हैं। इसलिए परिजन मजबूरन अपने बच्चों को ट्यूशन लेने के लिए शिक्षकों के पास भेजते हैं। परिजनों में स्कूल और शिक्षकों के प्रति इतना खौफ है कि, वे खुल कर ऐसे शिक्षकों की शिकायत भी नहीं कर पा रहे हैं।
500 से 3000 हजार तक है ट्यूशन फीस
करनाल में ट्यूशन फीस का रेट पांच सौ से तीन हजार तक है, जो विषय, छात्रों की संख्या और शिक्षक के रेप्यूटेशन पर निर्धारित होती है। अगर किसी शिक्षक ट्यूशन केंद्र खोल रखा है जहां पर वह बहुत सारे छात्रों को एक साथ सिर्फ एक विषय पढ़ाता है तो 500 रुपये फीस लेता है। वहीं शिक्षक अगर अपने या स्टूडेंट के घर जाकर ट्यूशन पढ़ाता है तो वह विषय के अनुसार एक हजार से तीन हजार रुपये तक फीस लेता है। ट्यूशन फीस का यह रेट पढ़ाई का नया सत्र शुरू होने से पहले बढ़ जाता है।
आदेश मिलने के बाद ही कर सकते हैं कार्रवाई
स्कूल संचालकों और शिक्षकों द्वारा ऐसा नहीं करना चाहिए। अगर ऐसा है तो शिकायत मिलने या हेड ऑफिस से आदेश आने के बाद ही हम ऐसे स्कूलों और शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- सुरेश गौरिया, जिला शिक्षा अधिकारी
परिजन करें शिकायत, स्कूल की होगी मान्यता रद्द
अगर शिक्षक और स्कूल ऐसा कर रहे हैं तो यह शोषण है। अगर परिजन विभाग में शिकायत दर्ज कराते हैं तो स्कूलों को मान्यता देने वाले शिक्षा बोर्ड के उप नियम के तहत ऐसे स्कूलों की मान्यता तक रद्द की जा सकती है। परिजन बिना किसी डर के शिकायत दर्ज करायें।
-सरोज बाला गुर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
जानकारी मिलने पर करेंगे कार्रवाई
शिक्षकों द्वारा अगर ऐसा किया जा रहा है तो यह उस स्कूल की मिलीभगत है। परिजन खुलकर ऐसे स्कूलों की शिकायत करें। अगर शिकायत सही पाई गई तो ऐसे स्कूलों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. राजन लांबा, जिला प्रधान सहोदया