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बसों की कमी से बिगड़ी परिवहन व्यवस्था, करना पड़ा इंतजार
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पुराने बस स्टैंड पर बस के इंतजार में भटकते रहे यात्री। संवाद
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। भैया दूज के पर्व पर रोडवेज बसों की कमी से परिवहन व्यवस्था बिगड़ गई। बस स्टैंड हो या राजमार्ग, बसों के लिए यात्री भटकते और इंतजार करते रहे। हालांकि रोडवेज के साथ निजी बसों ने भी भाई-बहनों को सफर कराया, लेकिन बसें ओवरलोड चलने से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
आबादी के हिसाब से करनाल रोडवेज के बेड़े में 250 बसें होनी चाहिए। लेकिन डिपो के पास महज 103 बसें हैं। भैया दूज का पर्व दो दिन होने से 110 निजी बसें मिलाकर कुल 213 बसें ऑन रूट रही। लेकिन भीड़ के कारण कई मार्गों पर काफी दिक्कत रही। इधर, रोडवेज के ड्यूटी इंस्पेक्टर गुलाब ने बताया कि दो दिनों में डिपो की सभी बसों ने पांच हजार किलोमीटर अतिरिक्त सफर किया है। ताकि व्यवस्था बनी रहे। बावजूद इसके यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कोई बस के इंतजार में अड्डे या हाईवे के चौक पर घंटों खड़ा रहा तो किसी को कई किलोमीटर बस में खड़े होकर या लटककर सफर करना पड़ा। जिले की आबादी 15 लाख है, ऐसे में नियम के अनुसार, डिपो में 250 बसें होना जरूरी हैं। लेकिन विभाग आधी से भी कम बसों में ही काम चला रहा है। जिसका खामियाजा त्योहार के दिनों में यात्रियों को भुगतना पड़ता है।
टैक्सियों के बढ़े रेट, दो गुना वसूला किराया
बसों में भीड़ के कारण टैक्सी चालकों ने मनमर्जी का किराया वसूला। अमूमन 200 रुपये प्रति सवारी पर चलने वाली टैक्सी ने भी लोगों से किराये के रूप में 400 रुपये तक वसूले। हाईवे से अंबाला व दिल्ली की तरफ दिनभर कई टैक्सी चलती हैं। पानीपत जाने वाली ललिता, जगदीश तुली, विवेक ने बताया कि उन्हें आधे घंटे इंतजार के बाद निर्मल कुटिया चौक से टैक्सी मिली। उसमें भी 60 रुपये सवारी के हिसाब से किराया वसूला। जबकि बस का किराया कम है। बसों और टैक्सी में भी भीड़ है।
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छठ पर्व और दिवाली के कारण ट्रेनों में भी भीड़
भैया दूज के दिन ट्रेनों में भी महिलाओं को सुरक्षित सफर नहीं मिला। महिलाओं के लिए आरक्षित कोचों में पुरुष सफर करते दिखाई दिए। वहीं इससे पहले टिकट लेने के लिए भी महिला सवारियों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। दिवाली का त्योहार मानने के लिए दूर अपने घरों में गए कामकाजी लोग भी वापस आने लगे हैं। वहीं छठ पर्व नजदीक होने से यूपी और बिहार के लोग भी रेल से अपने घरों की ओर जा रहे हैं। ऐसे में ट्रेनों में भी इन दिनों भीड़ है। सुबह के समय दिल्ली से अंबाला व कुरुक्षेत्र तक व अंबाला से दिल्ली तक जाने वाली पैसेंजर ट्रेन में भी काफी भीड़ रही।
निजी वाहन बढ़ने से रही जाम की स्थिति
त्योहार पर सार्वजनिक वाहनों में भीड़ को देखते हुए लोगों ने अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए निजी वाहनों का सहारा लिया। सार्वजनिक वाहनों में लोग खिड़कियों पर लटके दिखे। जीटी रोड, कैथल रोड, असंध रोड, इंद्री रोड, मेरठ रोड व काछवा रोड सहित कई मार्गों पर अन्य दिनों के मुकाबले ज्यादा वाहना दौड़ते दिखाई दिए। इसके अलावा शहर के मुख्य मार्गों पर भी काफी भीड़ रही। कई जगह जाम की स्थिति भी पनपी। जिसे ट्रैफिक पुलिस ने साथ के साथ ही व्यवस्थित किया।
साढ़े छह लाख रुपये बढ़ा कैश
बुधवार और वीरवार को सभी 103 बसें ऑन रूट रही। अमूमन बसें 28 हजार किलोमीटर चलती हैं और 9 लाख रुपये का टिकट से कैश आता है। पर दोनों दिन में बसें कुल 61 हजार किलोमीटर चलीं और साढ़े 24 लाख रुपये टिकट से कैश आया। बुधवार दोपहर बाद से भीड़ बढ़ गई थी। वीरवार को कुल 31 हजार किलोमीटर चली बसों से साढ़े 13 लाख रुपये कैश जमा हुआ।
- कुलदीप सिंह, जीएम, रोडवेज
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करनाल। भैया दूज के पर्व पर रोडवेज बसों की कमी से परिवहन व्यवस्था बिगड़ गई। बस स्टैंड हो या राजमार्ग, बसों के लिए यात्री भटकते और इंतजार करते रहे। हालांकि रोडवेज के साथ निजी बसों ने भी भाई-बहनों को सफर कराया, लेकिन बसें ओवरलोड चलने से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
आबादी के हिसाब से करनाल रोडवेज के बेड़े में 250 बसें होनी चाहिए। लेकिन डिपो के पास महज 103 बसें हैं। भैया दूज का पर्व दो दिन होने से 110 निजी बसें मिलाकर कुल 213 बसें ऑन रूट रही। लेकिन भीड़ के कारण कई मार्गों पर काफी दिक्कत रही। इधर, रोडवेज के ड्यूटी इंस्पेक्टर गुलाब ने बताया कि दो दिनों में डिपो की सभी बसों ने पांच हजार किलोमीटर अतिरिक्त सफर किया है। ताकि व्यवस्था बनी रहे। बावजूद इसके यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कोई बस के इंतजार में अड्डे या हाईवे के चौक पर घंटों खड़ा रहा तो किसी को कई किलोमीटर बस में खड़े होकर या लटककर सफर करना पड़ा। जिले की आबादी 15 लाख है, ऐसे में नियम के अनुसार, डिपो में 250 बसें होना जरूरी हैं। लेकिन विभाग आधी से भी कम बसों में ही काम चला रहा है। जिसका खामियाजा त्योहार के दिनों में यात्रियों को भुगतना पड़ता है।
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टैक्सियों के बढ़े रेट, दो गुना वसूला किराया
बसों में भीड़ के कारण टैक्सी चालकों ने मनमर्जी का किराया वसूला। अमूमन 200 रुपये प्रति सवारी पर चलने वाली टैक्सी ने भी लोगों से किराये के रूप में 400 रुपये तक वसूले। हाईवे से अंबाला व दिल्ली की तरफ दिनभर कई टैक्सी चलती हैं। पानीपत जाने वाली ललिता, जगदीश तुली, विवेक ने बताया कि उन्हें आधे घंटे इंतजार के बाद निर्मल कुटिया चौक से टैक्सी मिली। उसमें भी 60 रुपये सवारी के हिसाब से किराया वसूला। जबकि बस का किराया कम है। बसों और टैक्सी में भी भीड़ है।
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छठ पर्व और दिवाली के कारण ट्रेनों में भी भीड़
भैया दूज के दिन ट्रेनों में भी महिलाओं को सुरक्षित सफर नहीं मिला। महिलाओं के लिए आरक्षित कोचों में पुरुष सफर करते दिखाई दिए। वहीं इससे पहले टिकट लेने के लिए भी महिला सवारियों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। दिवाली का त्योहार मानने के लिए दूर अपने घरों में गए कामकाजी लोग भी वापस आने लगे हैं। वहीं छठ पर्व नजदीक होने से यूपी और बिहार के लोग भी रेल से अपने घरों की ओर जा रहे हैं। ऐसे में ट्रेनों में भी इन दिनों भीड़ है। सुबह के समय दिल्ली से अंबाला व कुरुक्षेत्र तक व अंबाला से दिल्ली तक जाने वाली पैसेंजर ट्रेन में भी काफी भीड़ रही।
निजी वाहन बढ़ने से रही जाम की स्थिति
त्योहार पर सार्वजनिक वाहनों में भीड़ को देखते हुए लोगों ने अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए निजी वाहनों का सहारा लिया। सार्वजनिक वाहनों में लोग खिड़कियों पर लटके दिखे। जीटी रोड, कैथल रोड, असंध रोड, इंद्री रोड, मेरठ रोड व काछवा रोड सहित कई मार्गों पर अन्य दिनों के मुकाबले ज्यादा वाहना दौड़ते दिखाई दिए। इसके अलावा शहर के मुख्य मार्गों पर भी काफी भीड़ रही। कई जगह जाम की स्थिति भी पनपी। जिसे ट्रैफिक पुलिस ने साथ के साथ ही व्यवस्थित किया।
साढ़े छह लाख रुपये बढ़ा कैश
बुधवार और वीरवार को सभी 103 बसें ऑन रूट रही। अमूमन बसें 28 हजार किलोमीटर चलती हैं और 9 लाख रुपये का टिकट से कैश आता है। पर दोनों दिन में बसें कुल 61 हजार किलोमीटर चलीं और साढ़े 24 लाख रुपये टिकट से कैश आया। बुधवार दोपहर बाद से भीड़ बढ़ गई थी। वीरवार को कुल 31 हजार किलोमीटर चली बसों से साढ़े 13 लाख रुपये कैश जमा हुआ।
- कुलदीप सिंह, जीएम, रोडवेज