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चावल स्टाक की तीन जांच, तीनों पर उठे सवाल
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
Updated Tue, 24 Nov 2015 12:54 AM IST
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कुंजपुरा स्थित राइस मिल में स्टाक को लेकर चल रही जांच में सोमवार को एक नया मोड़ आ गया। डीएफएससी निशांत राठी के नेतृत्व में नौ सदस्यीय जांच टीम ने स्टाक को सही बताते हुए ओके रिपोर्ट दी है। अहम बात यह है कि पिछली जांच में कम मिला 14 हजार क्विंटल धान और 360 क्विंटल चावल जांच टीम ने पूरा बताया है। करीब छह घंटे तक चली जांच ने एक बार फिर से पहली जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारी इस जांच पर सवाल उठा रहे हैं।
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स्टाक कम और पूरे के इस खेल का सच का खुलासा अभी होना बाकी है। वैसे, डीएफएससी मंगलवार को अपनी जांच रिपोर्ट डीसी को सौंपेंगे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह खेल क्या है और कौन इसे खेल रहा है? जांच कौन सी सही है, स्टाक कम है या पूरा ऐसे दर्जनभर सवाल जनता के जहन में दौड़ रहे हैं। उधर, डीएफएससी की जांच ने मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों के पसीने जरूर छुड़ा दिए हैं।
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बता दें कि मैसर्ज जय बजरंग बली राइस मिल में 29 अक्टूबर को कुरुक्षेत्र के डीएमईओ के नेतृत्व में टीम ने निरीक्षण किया। टीम ने स्टाक को ओके रिपोर्ट दे दी, लेकिन इसके बाद फिर से 6 नवंबर को जींद के डीएमएईओ रामप्रताप के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम ने राइस मिल में छापेमारी की। कई घंटे तक चली जांच में संबधित टीम ने मिल में 14 हजार क्विंटल धान और 360 क्विंटल चावल का स्टाक कम दिखाया था।
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मिलर्स सुभाष गुप्ता ने आरोप लगाया कि इसके बाद सात नवंबर को एक व्यापारी के माध्यम से स्टाक पूरा करने के नाम पर पांच लाख रुपये मांगे गए। इस पर सुभाष गुप्ता ने पूरा मामला प्रदेश के प्रभारी अनिल जैन के सामने लिखित रूप मेें दिया। गुप्ता ने आरोप लगाया था कि स्टाक के नाम पर बोर्ड और कमेटी के अधिकारी खेल कर रहे हैं। इस मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया।
ऐसे में जिला प्रशासन ने डीएफएससी निशांत राठी के नेतृत्व में सोमवार को टीम का गठन करके राइस मिल में स्टाक चेक करने भेजे। टीम ने करीब छह घंटे तक स्टाक का मिलान किया और टीम ने स्टाक पूरा होने की बात कही है। पूरी जांच की वीडियोग्राफी कराई गई। टीम ने कहा कि विभाग का जितना चावल और जितना धान होना चाहिए था, वो पूरा है। ऐसे में सवाल यह है तीनों में से कौन सी जांच को सही माना जाए।
मार्केटिंग बोर्ड की फ्लाइंग टीम की, जिसने 14 हजार क्लिंटल स्टाक कम दिखाया, या फिर डीएफएससी व कुरुक्षेत्र के डीएमईओ की, जिन्होंने स्टाक पूरा होने की बात कही है? हालांकि, अभी तीनों ही जांचों को संदेह के घेरे में देखा जा रहा है। तीनों ही जांचों पर सभी के अलग अलग तर्क और तथ्य हैं? सवाल वही है कि आखिर जांच रिपोर्ट कौन सी सही है?
ये रहे टीम में शामिल
डीएफएससी निशांत राठी, डीएम वेयर हाउस सतबीर सिंह, एग्रो हरियामा के डीएम सुरेश सिंह, हैफेड की ओर से कर्मबीर, डीएफएससी विभाग के मुख्य विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह, सेक्शन आफिसर सुशील कांबोज, इंस्पेक्टर सुरेश कुंडू व मार्केट कमेटी कुंजपुरा के सचिव नरेश मान शामिल रहे। टीम ने पूरे राइस मिल की जांच की और सभी जगहों पर वीडियोग्राफी की, ताकि जांच प्रभावी और तथ्यों से पूरक हो। टीम ने सभी खरीद एजेसियों के अधिकारी और विशेषज्ञ अधिकारी भी शामिल रहे।
जांच के बाद उठ रहे हैं ये सवाल
1. स्टाक डीएफएससी का है, लेकिन दो बार जांच विपणन बोर्ड की टीम ने की, लेकिन एक बार भी डीएफएससी विभाग का सदस्य साथ नहीं लिया?
2. मिलर ने लाइसेंस निलंबित होने के बाद ही भ्रष्टाचार के आरोप क्यों लगाए?
3. छह नवंबर और 23 नवंबर के बीच 17 दिन का अंतर है, कहीं बाद में राइस मिल में स्टाक तो पूरा नहीं किया गया?
4. अगर मिलर सही तो फिर उन्होंने मार्केट कमेटी में 51 हजार मार्केट फीस क्यों भरी?
5. मार्केट कमेटी सचिव ने किस आधार पर स्टाक कम दिखाते हुए मिलर का लाइसेंस निलंबित किया?
6. कुंजपुरा के मार्केट कमेटी सचिव पहली जांच मेें भी शामिल रहे और इसमें भी, लेकिन दोनों में सहमत रहे।
टीम ने स्टाक पूरा पाया है : राठी
इस बारे में डीएफएसी निशांत राठी का कहना है कि टीम ने जांच में राइस मिल का स्टाक लगभग पूरा पाया है। पहले की गई जांचों के बारे में वे कुछ नहीं कह सकते। हमने बाकायदा वीडियोग्राफी कराकर सारी जांच और स्टाक मिलान कराया है। राइस मिलर ने कुल 50720 क्विंटल धान खरीदा था, दो प्रतिशत सूखे के बाद जो स्टाक होना चाहिए, वह पूरा है। राठी ने कहा कि जिन राइस मिलरों को नवंबर तक चावल वापस देने के जितने टारगेट दिए गए हैं, अगर उनका समय पर चावल वापस नहीं आया तो उनकी जांच कराई जाएगी।