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Karnal News: फिजा में जहर, अफसर बेपरवाह
Sat, 26 Oct 2024 04:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 26 Oct 2024 04:14 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल/निसिंग/चिड़ाव/जुंडला। किसान कल्याण विभाग की पराली जलने की निगरानी करने वाली सेटेलाइट पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। पिछले तीन दिनों से एक भी एक्टिव फायर लोकेशन नहीं देख सकी है। वहीं शाम होते ही हर तरफ पराली धधकने लगती है।
आलम ये है कि ग्रामीण रास्तों पर धुआं के गुबार के कारण निकलना भी दूभर हो जाता है। इससे जिले का एक्यूआई 264 यानी खराब स्थिति में पहुंच गया है। लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत महसूस होने लगी है, लोगों के गले खराब होने लगे हैं।
चिड़ाव, निसिंग खंड के अंतर्गत आने वाले दर्जनों भर गांवों में किसान बेखौफ होकर पराली जलाने में लगे हैं। खास बात तो ये है कि हाईवे के किनारे भी किसान पराली जलाते दिख रहे हैं। अधिकारियों की निगरानी कहां और कैसे हो रही है, इस पर सवाल उठ रहे हैं। बढते वायु प्रदूषण एवं का एक्यूआई के स्तर के कारण बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बढ़ता जा
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रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर जिला उपायुक्त द्वारा सभी कर्मचारियों एवं अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के बावजूद भी क्षेत्र में पराली को बेखोफ जलाया जा रहा है। सरकार ने किसानों को पराली न जलाने के संदर्भ में जागरूक करने के लिए दिशा-निर्देश दिए हैं। अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ओर से किसानों को लगातार जागरूक भी किया जा रहा है। पराली प्रबंधन के उपकरणों के लिए सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी का किसान लाभ उठाएं और पराली ना जलाकर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग दें।
घरौंडा थाने में दो किसानों पर एफआईआर ः करनाल। उपायुक्त के निर्देश पर शुक्रवार को घरौंडा थाने में पराली जलाने के मामले में दो किसान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। बताते हैं कि पराली की निगरानी के लिए उपायुक्त के निर्देश पर ग्राम स्तरीय संयुक्त टीम ( एग्रीकल्चर,पटवारी व ग्राम सचिव ) का गठन किया गया। इसी टीम ने 20 अक्तूबर को पुंडरी गांव का निरीक्षण किया तो किसान सतीश कुमार व मदन लाल को खेत में फसल अवशेष जलाते पाया गया।
फसल अवशेषों का करें प्रबंधन : हाकम
प्रगतिशील किसान हाकम सिंह राणा औंगद निवासी का कहना है कि किसान कृषि यंत्रों के माध्यम से फसल अवशेषों का प्रबंधन करना चाहिए। इससे न केवल धरती की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है, बल्कि भूमि में मित्र कीट व पोषक तत्वों को भी कोई नुकसान नहीं होता है। किसान पराली की गांठ बनाकर प्रोत्साहन से अपनी आमदनी भी बढ़ा सकते हैं।
पराली का धुआं होता जहरीला : डॉ. सारिका
डॉ. सारिका अग्रवाल का कहना है कि पराली में आग लगाने से जहरीला धुआं निकलता है, जोकि सांस लेने में दिक्कत करता हैं। धुआं युक्त वातावरण में बच्चों, बुजुगों व मरीजों को सांस लेने में कठिनाई होती है। ऐसी परिस्थिति में क्षेत्र वासियों को पर्यावरण प्रदूषण होने पर धूल मिट्टी वाले स्थान पर काम करते समय काले चश्मे का प्रयोग करें। आंखों में एलर्जी की दिक्कत होने पर डॉक्टर की सलाह लेकर इलाज लें।
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करनाल/निसिंग/चिड़ाव/जुंडला। किसान कल्याण विभाग की पराली जलने की निगरानी करने वाली सेटेलाइट पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। पिछले तीन दिनों से एक भी एक्टिव फायर लोकेशन नहीं देख सकी है। वहीं शाम होते ही हर तरफ पराली धधकने लगती है।
आलम ये है कि ग्रामीण रास्तों पर धुआं के गुबार के कारण निकलना भी दूभर हो जाता है। इससे जिले का एक्यूआई 264 यानी खराब स्थिति में पहुंच गया है। लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत महसूस होने लगी है, लोगों के गले खराब होने लगे हैं।
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चिड़ाव, निसिंग खंड के अंतर्गत आने वाले दर्जनों भर गांवों में किसान बेखौफ होकर पराली जलाने में लगे हैं। खास बात तो ये है कि हाईवे के किनारे भी किसान पराली जलाते दिख रहे हैं। अधिकारियों की निगरानी कहां और कैसे हो रही है, इस पर सवाल उठ रहे हैं। बढते वायु प्रदूषण एवं का एक्यूआई के स्तर के कारण बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बढ़ता जा
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रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर जिला उपायुक्त द्वारा सभी कर्मचारियों एवं अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के बावजूद भी क्षेत्र में पराली को बेखोफ जलाया जा रहा है। सरकार ने किसानों को पराली न जलाने के संदर्भ में जागरूक करने के लिए दिशा-निर्देश दिए हैं। अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ओर से किसानों को लगातार जागरूक भी किया जा रहा है। पराली प्रबंधन के उपकरणों के लिए सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी का किसान लाभ उठाएं और पराली ना जलाकर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग दें।
घरौंडा थाने में दो किसानों पर एफआईआर ः करनाल। उपायुक्त के निर्देश पर शुक्रवार को घरौंडा थाने में पराली जलाने के मामले में दो किसान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। बताते हैं कि पराली की निगरानी के लिए उपायुक्त के निर्देश पर ग्राम स्तरीय संयुक्त टीम ( एग्रीकल्चर,पटवारी व ग्राम सचिव ) का गठन किया गया। इसी टीम ने 20 अक्तूबर को पुंडरी गांव का निरीक्षण किया तो किसान सतीश कुमार व मदन लाल को खेत में फसल अवशेष जलाते पाया गया।
फसल अवशेषों का करें प्रबंधन : हाकम
प्रगतिशील किसान हाकम सिंह राणा औंगद निवासी का कहना है कि किसान कृषि यंत्रों के माध्यम से फसल अवशेषों का प्रबंधन करना चाहिए। इससे न केवल धरती की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है, बल्कि भूमि में मित्र कीट व पोषक तत्वों को भी कोई नुकसान नहीं होता है। किसान पराली की गांठ बनाकर प्रोत्साहन से अपनी आमदनी भी बढ़ा सकते हैं।
पराली का धुआं होता जहरीला : डॉ. सारिका
डॉ. सारिका अग्रवाल का कहना है कि पराली में आग लगाने से जहरीला धुआं निकलता है, जोकि सांस लेने में दिक्कत करता हैं। धुआं युक्त वातावरण में बच्चों, बुजुगों व मरीजों को सांस लेने में कठिनाई होती है। ऐसी परिस्थिति में क्षेत्र वासियों को पर्यावरण प्रदूषण होने पर धूल मिट्टी वाले स्थान पर काम करते समय काले चश्मे का प्रयोग करें। आंखों में एलर्जी की दिक्कत होने पर डॉक्टर की सलाह लेकर इलाज लें।