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इंद्री के छह गांवों में यमुना से तबाही का खतरा
अमर उजाला/ब्यूरो, करनाल
Updated Fri, 08 Aug 2014 12:32 AM IST
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यमुनानगर के हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया करीब एक लाख 14 हजार क्यूसेक
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पानी इंद्री पहुंच गया है। यमुना में पानी आने की सूचना मिलने पर क्षेत्र
के लोगों में हड़कंप मच गया।
इससे उपमंडल के अधिकारी चौकन्ने हो गए हैं। इस पानी से ज्यादा नुकसान आसपास के खेतों को होगा, जिसमें भूमि कटाव शुरू हो गया है। वीरवार सुबह करीब चार बजे यमुनानगर के हथिनीकुंड बैराज से करीब 1 लाख 14 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यह पानी करीब 2 बजे इंद्री क्षेत्र को क्रास कर गया।
इस पानी से यमुना क्षेत्र में लगी सब्जियों, पशु चारा तथा फसलों को नुकसान पहुंचा है। यमुना में छोड़े गए पानी से भूमि कटाव का खतरा बढ़ गया है। किसान ओमपाल मंढाण ने बताया कि जितना कम पानी होगा उतना ही भूमि कटाव का खतरा बढ़ जाता है। भूमि कटाव होने से क्षेत्र की भूमि यमुना में समा रही है।
सिंचाई विभाग की ओर से भूमि कटाव रोकने के लिए कारगर उपाय नहीं किए जा रहे हैं, वहीं पिछले वर्ष आई बाढ़ के कारण क्षेत्र के दर्जनों गांवों के किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। इस बाढ़ में फसलें पूरी तरह तबाह हो चुकी थी। तबाही के इस मंजर को क्षेत्र के लोग भूले नहीं हैं। एक वर्ष बीतने के बाद भी तबाही की यादें ताजा हैं। बाढ़ के कारण खेतों में काम कर रहे अधिकतर लोग बह गए थे और कई किसानों ने पेड़ों पर चढ़कर कई दिन और रातें गुजारनी पड़ी थीं। क्षेत्र के गांव चंद्राव, चौगांवा, हंसुमाजरा, मखाला, मखाली, गढीबीरबल ,गढपुर खालसा, जपती छपरा, कलसोरा, डबकौली कलां सहित दर्जनाें गांवों की गलियों में पानी पहुंच गया था।
प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी थी, परंतु सरकार ने कोई मदद नहीं भेजी। गौरतलब है कि इस सीजन में एक लाख क्यूसेक से अधिक दूसरा पानी छोड़ा गया है। करीब 20 दिन पूर्व आए इस पानी ने यमुना के किनारों को तोड़ दिया था।
इससे उपमंडल के अधिकारी चौकन्ने हो गए हैं। इस पानी से ज्यादा नुकसान आसपास के खेतों को होगा, जिसमें भूमि कटाव शुरू हो गया है। वीरवार सुबह करीब चार बजे यमुनानगर के हथिनीकुंड बैराज से करीब 1 लाख 14 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यह पानी करीब 2 बजे इंद्री क्षेत्र को क्रास कर गया।
इस पानी से यमुना क्षेत्र में लगी सब्जियों, पशु चारा तथा फसलों को नुकसान पहुंचा है। यमुना में छोड़े गए पानी से भूमि कटाव का खतरा बढ़ गया है। किसान ओमपाल मंढाण ने बताया कि जितना कम पानी होगा उतना ही भूमि कटाव का खतरा बढ़ जाता है। भूमि कटाव होने से क्षेत्र की भूमि यमुना में समा रही है।
सिंचाई विभाग की ओर से भूमि कटाव रोकने के लिए कारगर उपाय नहीं किए जा रहे हैं, वहीं पिछले वर्ष आई बाढ़ के कारण क्षेत्र के दर्जनों गांवों के किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। इस बाढ़ में फसलें पूरी तरह तबाह हो चुकी थी। तबाही के इस मंजर को क्षेत्र के लोग भूले नहीं हैं। एक वर्ष बीतने के बाद भी तबाही की यादें ताजा हैं। बाढ़ के कारण खेतों में काम कर रहे अधिकतर लोग बह गए थे और कई किसानों ने पेड़ों पर चढ़कर कई दिन और रातें गुजारनी पड़ी थीं। क्षेत्र के गांव चंद्राव, चौगांवा, हंसुमाजरा, मखाला, मखाली, गढीबीरबल ,गढपुर खालसा, जपती छपरा, कलसोरा, डबकौली कलां सहित दर्जनाें गांवों की गलियों में पानी पहुंच गया था।
प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी थी, परंतु सरकार ने कोई मदद नहीं भेजी। गौरतलब है कि इस सीजन में एक लाख क्यूसेक से अधिक दूसरा पानी छोड़ा गया है। करीब 20 दिन पूर्व आए इस पानी ने यमुना के किनारों को तोड़ दिया था।