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Karnal News: समागम स्थल पर दिखा आनंदपुर साहिब सा नजारा... प्रवेश द्वार से लेकर कीर्तन दरबार तक हूबहू

Wed, 26 Nov 2025 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Wed, 26 Nov 2025 01:41 AM IST
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The scene at the gathering spot resembled Anandpur Sahib... from the entrance to the Kirtan Darbar.
गगन तलवार
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कुरुक्षेत्र। नौवें गुरु श्री तेग बहादुर जी की स्थली आनंदपुर साहिब का नजारा हरियाणा की संगत को मंगलवार को कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर में देखने को मिला। गुरु के 350वें शहीदी दिवस समागम स्थल को विशेष तौर पर गुरु की ओर से नामित चक्क नानकी की तरह तैयार कराया गया। प्रवेश द्वार से लेकर कीर्तन दरबार और लंगर हॉल तक सब हूबहू दिखाई दिया। सेवा कार्य और समागम में गूंजते शबद कीर्तन से यहां पहुंची संगत को आनंदपुर साहिब के गुरुद्वारे में पहुंचने का एहसास हुआ।

इस विशेष आयोजन के लिए सरकार की ओर से करीब 175 एकड़ जगह पर जर्मन हैंगर टेंट में पंडाल सजाया गया था। पूरे क्षेत्र को दूधिया पत्थर जैसे दिखने वाले प्लास्टिक शीट और सफेद व पीले कपड़े से सजाया गया था। इसके अलावा दूधिया लाइटों की रोशनी में नहाए सिख किले नुमा गुरुद्वारे ने भी सभी को अपनी ओर आकर्षित किया।
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ऊंचे पंडाल और प्रवेश द्वार की शोभा भी ऐसी कि करीब दो किलोमीटर दूर से ही दिखाई पड़ना शुरू हो जाए। ऐसे में श्रद्धालुओं को पहली बार धर्मनगरी में तख्त साहिब जैसे गुरुघर के दर्शन हुए। प्रवेश द्वार से अंदर आने के बाद सभी ने सबसे पहले रुमाले से सिर ढके, इसके बाद जोड़ाघर (जूता) में जूते-चप्पल जमा कराए, इसके बाद विशेष तौर पर सिख शैली में तैयार किए चहबच्चे में पैर धोने के बाद सिर ढककर पंडाल में प्रवेश किया। मंच पर विशेष तौर पर दरबार साहिब को भी गुरुद्वारे की शैली में सजाकर तैयार किया गया था, जहां पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम नायब सैनी और श्रद्धालुओं ने नतमस्तक होकर गुरु का आशीर्वाद लिया। ब्यूरो
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गुरुद्वारे की तरह जमीन पर ही बैठे पीएम और संगत

समागम स्थल पर 25 एकड़ में मुख्य कीर्तन हॉल, 45 एकड़ में पार्किंग, 20-20 एकड़ में दो लंगर हॉल, एक प्रदर्शनी हॉल, मीडिया सेंटर, एक जोड़ा घर और सेवा कार्यों के लिए 30 से ज्यादा छोटे कैंप बनाए गए। जोड़ा घर में जूते जमा कराने के लिए महिला और पुरुषों के लिए 35-35 काउंटर रहे। मुख्य द्वार के बाद जांच करके प्रवेश देने के लिए महिला और पुरुषों के लिए 17-17 एंट्री पाइंट बनाए गए। पीएम से लेकर श्रद्धालुओं तक सभी गुरु साहिब की हजूरी में जमीन पर ही बैठे।



सिर्फ जमीन के लिए खर्च किए 1.07 करोड़ रुपये

सरकार ने करीब 175 एकड़ जमीन पर समागम आयोजित करने के लिए किसानों से किराये पर लिया है। जिला प्रशासन के अनुसार, 61 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से किसानों को भुगतान किया गया है। ऐसे में करीब 1.07 करोड़ रुपये सिर्फ जगह लेने के लिए खर्च किए गए हैं। इसके अलावा पंडाल बनाने, साज-सज्जा का खर्च इससे करीब तीन गुना तक ज्यादा है।




आध्यात्मिक शांति और सैन्य गढ़ का गवाह है आनंदपुर साहिब

आनंदपुर साहिब की स्थापना 1665 में नौवें गुरु श्री तेग बहादुर जी ने की थी, जिसका नाम उन्होंने अपनी माता के नाम पर चक्क नानकी रखा। गुरु जी ने यह स्थल आध्यात्मिक शांति और चिंतन के लिए बनाया था। जो बाद में दसवें गुरु श्री गोबिंद सिंह जी के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण धार्मिक और सैन्य गढ़ बन गया। यहां 1699 में खालसा पंथ की स्थापना हुई। यहां सिखों के पांच तख्तों में से एक श्री केसगढ़ साहिब है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1689 में श्री आनंदगढ़ साहिब किले का निर्माण कराया। आनंदपुर साहिब के गुरुद्वारे सिख वास्तुकला शैली पर बने हैं, जो अक्सर किलों जैसी संरचनाओं और पारंपरिक गुरुद्वारा वास्तुकला का मिश्रण हैं। इनमें अष्टकोणीय गुंबददार इमारतों और ऐतिहासिक महत्व वाली वास्तुकला की झलक दिखती है।

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