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Karnal News: देव की मौत पहली नहीं, गड्ढे निगल रहे जिंदगियां... हादसों के बाद भी नहीं जागे जिम्मेदार
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करनाल। इंद्री के फाजिलपुर में 12 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में गिरकर सात वर्षीय देव की मौत कोई पहला हादसा नहीं है। पिछले एक साल में जिले में सड़क किनारे खुले नालों, निर्माणाधीन नालों और गड्ढों से जुड़े कई हादसे सामने आ चुके हैं। कहीं खेत में पानी निकासी के लिए खोदा गया गड्ढा मासूम की जिंदगी लील गया तो कहीं सड़क के गड्ढे और खुले नाले लोगों की मौत का कारण बने। इन घटनाओं के बावजूद खतरनाक स्थानों को सुरक्षित करने और हादसे रोकने के इंतजामों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
16 अक्तूबर को फाजिलपुर में देव अपने भाइयों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान वह खेत में बारिश का पानी निकालने के लिए खोदे गए गड्ढे में गिर गया। गड्ढा पानी से भरा था और उसकी गहराई करीब 12 फीट थी। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया कि खुले और गहरे गड्ढों के आसपास सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए जाते। यदि ऐसे स्थानों पर बैरिकेडिंग या चेतावनी के संकेत लगाए जाएं तो लोगों को खतरे से आगाह किया जा सकता है।
यह समस्या केवल खेतों तक सीमित नहीं है। शहरों और हाईवे पर खुले नाले तथा खराब सड़कों के गड्ढे भी जानलेवा साबित हुए हैं। हादसों के बाद जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही और समय रहते सुरक्षा इंतजाम करने की जरूरत पर सवाल उठते रहे हैं।
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एक साल में छह हादसे, कई परिवारों ने अपनों को खोया
फाजिलपुर, इंद्री, 16 अक्तूबर 2026: खेत में बारिश का पानी निकालने के लिए खोदे गए करीब 12 फीट गहरे गड्ढे में गिरकर सात वर्षीय देव की मौत।
काछवा-बहलोलपुर रोड, 12 अगस्त 2026: सड़क की खराब हालत और गड्ढे के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉली का संतुलन बिगड़ा। हादसे में अबरार, खालिद और फजरू की मौत।
तरावड़ी, एनएच-44, 21 मार्च 2026: खुले नाले में बाइक सवार दो युवक गिर गए, जिनमें से एक की मौत हो गई। उस समय कोहंड से समानाबाहू तक 150 से अधिक स्थानों पर नाले खुले मिले थे।
नीलोखेड़ी, दिसंबर 2025: वार्ड-1 निवासी 60 वर्षीय अमरजीत की निर्माणाधीन खुले नाले में गिरने से मौत। नाले पर कई जगह स्लैब नहीं थे।
नलीकलां-कुंजपुरा सड़क, अक्तूबर 2025: सड़क के गड्ढे में बाइक जाने से संतुलन बिगड़ा। चौरा निवासी विनोद की मौत हुई, जबकि प्रवीन गंभीर रूप से घायल हुआ।
एनएच-44, झिलमिल ढाबे के पास, 12 दिसंबर 2025: सड़क के गड्ढे में बाइक का टायर फंसने से नई दिल्ली निवासी राजीव गिर गए। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई।
सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सड़क गड्ढों पर अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई भी होगी। - डॉ. आनंद शर्मा, डीसी करनाल
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16 अक्तूबर को फाजिलपुर में देव अपने भाइयों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान वह खेत में बारिश का पानी निकालने के लिए खोदे गए गड्ढे में गिर गया। गड्ढा पानी से भरा था और उसकी गहराई करीब 12 फीट थी। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया कि खुले और गहरे गड्ढों के आसपास सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए जाते। यदि ऐसे स्थानों पर बैरिकेडिंग या चेतावनी के संकेत लगाए जाएं तो लोगों को खतरे से आगाह किया जा सकता है।
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यह समस्या केवल खेतों तक सीमित नहीं है। शहरों और हाईवे पर खुले नाले तथा खराब सड़कों के गड्ढे भी जानलेवा साबित हुए हैं। हादसों के बाद जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही और समय रहते सुरक्षा इंतजाम करने की जरूरत पर सवाल उठते रहे हैं।
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एक साल में छह हादसे, कई परिवारों ने अपनों को खोया
फाजिलपुर, इंद्री, 16 अक्तूबर 2026: खेत में बारिश का पानी निकालने के लिए खोदे गए करीब 12 फीट गहरे गड्ढे में गिरकर सात वर्षीय देव की मौत।
काछवा-बहलोलपुर रोड, 12 अगस्त 2026: सड़क की खराब हालत और गड्ढे के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉली का संतुलन बिगड़ा। हादसे में अबरार, खालिद और फजरू की मौत।
तरावड़ी, एनएच-44, 21 मार्च 2026: खुले नाले में बाइक सवार दो युवक गिर गए, जिनमें से एक की मौत हो गई। उस समय कोहंड से समानाबाहू तक 150 से अधिक स्थानों पर नाले खुले मिले थे।
नीलोखेड़ी, दिसंबर 2025: वार्ड-1 निवासी 60 वर्षीय अमरजीत की निर्माणाधीन खुले नाले में गिरने से मौत। नाले पर कई जगह स्लैब नहीं थे।
नलीकलां-कुंजपुरा सड़क, अक्तूबर 2025: सड़क के गड्ढे में बाइक जाने से संतुलन बिगड़ा। चौरा निवासी विनोद की मौत हुई, जबकि प्रवीन गंभीर रूप से घायल हुआ।
एनएच-44, झिलमिल ढाबे के पास, 12 दिसंबर 2025: सड़क के गड्ढे में बाइक का टायर फंसने से नई दिल्ली निवासी राजीव गिर गए। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई।
सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सड़क गड्ढों पर अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई भी होगी। - डॉ. आनंद शर्मा, डीसी करनाल