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Karnal News: यमुना नदी में बाउंड्री पिलर बनाने की प्रक्रिया फिर शुरू

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Oct 2024 06:06 AM IST
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The process of making boundary pillars in Yamuna river started again
गगन तलवार
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करनाल। लोकसभा और हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए लगी आचार संहिता के खत्म होने और विभागीय प्रक्रिया में अटकी फाइल के पास होने के बाद यमुना नदी में बाउंड्री पिलर बनाने का रास्ता साफ हो गया है। प्रदेश सरकार की ओर से सर्वे ऑफ इंडिया (एसओआई) की निशानदेही पर पिलर बनाए जाएंगे। नए साल में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसका मुख्य उद्देश्य यमुना में जलस्तर बढ़ने के बाद होने वाले कटाव से उपजने वाले जमीनी विवाद को पूरी तरह से खत्म करना है। हरियाणा में यमुना के साथ लगते छह जिलों में यह पिलर दीक्षित अवार्ड के तहत बनेंगे। एसओआई का सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। इसी के आधार पर पीडब्ल्यूडी ने पिलर बनाने की प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी है। अब से पहले मार्च में यह प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसके बाद लोकसभा चुनाव की घोषणा हो गई तो प्रक्रिया बीच में ही रुक गई।
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इसके बाद जून में प्रक्रिया शुरू करनी चाही लेकिन विभागीय अड़चन आ गई। अब मुख्यालय से स्वीकृति मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर एक बार फिर प्रक्रिया शुरू हुई है। करनाल के अलावा यमुना नदी में यमुनानगर, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद और पलवल जिले सहित जहां से यमुना नदी निकल रही है, वहां पर करीब 1500 बाउंड्री पिलर बनाए जाने हैं। करनाल जिले की सीमा में 296 पिलर बनाए जाने हैं।
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विदित हो कि दोनों राज्यों की सीमाओं को बांटती यमुना में हद तय करने के लिए वर्ष 1974 में तत्कालीन गृह मंत्री उमाशंकर दीक्षित की ओर से एक बिल का मसौदा तैयार किया गया था, जिस पर वर्ष 1975 में दोनों राज्यों को अमल करने के लिए कहा गया ताकि यमुना और इसकी अंदर की जमीन पर खेतीबाड़ी को लेकर आसपास बसे गांवों के लोगों में विवाद न हो। पिलर लगाने का काम दीक्षित ऑवार्ड-1974 को आधार मानकर किया जाएगा।
इन तीन मसलों का होगा समाधान

- पिलर लगाने से दोनों राज्यों के सीमा पर बसे गांव के लोगों में जमीन को लेकर आपसी झगड़े नहीं होंगे।

- दूसरी ओर काफी हिस्सा खनन का भी आता है, उसे लेकर होने वाले विवादों पर भी लगाम लगेगी।

- यमुना नदी हर साल जलमार्ग बदलती रहती है, पिलर लगाने के बाद दोनों राज्यों के बीच सीमांकन के मसले का स्थाई हल हो जाएगा।
ऑड-ईवन नंबर बनेगा पहचान

अधिकारियों के अनुसार, ओड-इवन में पिल्लर का ओड नंबर हरियाणा और ईवन यूपी के लिए हैं। यही प्रदेश की सीमा की पहचान होगी। पिलर लंबे समय तक वजूद में रहें, इसका डिजाइनिंग में विशेषज्ञों ने खास ध्यान रखा है। जितना पिलर नदी में ऊंचाई पर रहेगा, उतना ही एक तिहाई हिस्सा जमीन के अंदर भी होगा। प्रत्येक पिलर की ऊंचाई 21.5 मीटर रखी गई है। पानी के अंदर लगने वाले पाइल पिलर होने के कारण यह 17 मीटर नीचे जमीन में रहेगा।

सबसे पहले वर्ष 2007 में दोनों राज्यों की यमुना में बाउंड्री निर्धारण के लिए पिलर लगाए थे, जिनमें से बहुत से पिलर पानी में बह गए। इसके बाद पायलट प्रोजेक्ट के तहत वर्ष 2021 में भी सर्वे ऑफ इंडिया की निशानदेही पर कुछ नए पिलर बने थे। अब पूरी तरह से छह जिलों में पिलर लगाए जाएंगे। करनाल जिले में पिलर बनाने के लिए करीब 80 लाख रुपये खर्च होंगे। इसका टेंडर जारी कर दिया गया है। - संदीप सिंह, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी
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