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करनाल स्टेशन पर म्यूजियम में सहेजा जाएगा रेलवे का इतिहास

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Dec 2021 02:30 AM IST
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The history of railways will be saved in the museum
रामायण व महाभारत से जुड़े कई एतिहासिक तथ्यों को सहेजकर रखने वाली कर्णनगरी में इतिहास का एक और पृष्ट जुड़ने जा रहा है। उत्तर रेलवे दिल्ली मंडल की ओर से करनाल के रेलवे स्टेशन पर रेलवे के इतिहास को भी विरासत के रूप में सहेजा जाएगा। स्टेशन पर प्रवेश द्वार के साथ ही शीशे का पारदर्शी म्यूजियम बनाया जा रहा है। बहुत जल्द इसमें पुरातत्व के महत्व से जुड़ी रेलवे की निशानियों को सहेजा जाएगा। जो यहां आने वाले यात्रियों के लिए प्रदर्शित की जाएंगी।
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ब्रिटिश शासन में 1891 में करनाल में रेलवे स्टेशन बनकर तैयार हुआ था। तब दिल्ली-अंबाला के बीच सिंगल रेल लाइन थी। आजादी के बाद रेल लाइन का दोहरीकरण हुआ था। स्टेशन के प्रवेश द्वार की इमारत ब्रिटिश शासन के समय की वास्तुकला के प्रतीक के रूप में आज भी ज्यों की त्यों विद्यमान है और इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा पुराना वाटर टैंक व माल यार्ड के समीप एक भवन है। कुछ एतिहासिक निशानियां समय के साथ विलुप्त हो चुकी हैं। संवाद
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डीआरएम डिंपी गर्ग ने समझा महत्व
उत्तर रेलवे दिल्ली मंडल के डीआरएम डिंपी गर्ग 19 अगस्त को करनाल स्टेशन का निरीक्षण करने आए थे। तब उनकी नजर अधिकारी विश्राम गृह में रखे ब्रिटिश शासन के समय के अद्भुत एवं दुर्लभ हैंडपंप पर पड़ी तो उन्होंने इसे जनता के लिए प्रदर्शित करने के आदेश दिए। उसके बाद प्लेटफार्म की तरफ विश्राम गृह की दीवार को तोड़कर कांच का केबिन बनवाया गया। जिसमें यह हैंडपंप प्रदर्शित किया गया है। 1930-40 के दौर के इस हैंडपंप को चलाकर दर्शक पानी पी सकते हैं।
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रेलवे के क्रमिक विकास को समझेगी जनता
यह म्यूजियम आने वाली पीढ़ियों को रेल के इतिहास से रूबरू करवाएगा। आम जनता रेल के क्रमिक विकास को समझेंगी और जानेगी। पुरातन ज्ञान और नई तकनीक का समन्वय एक संग्रहालय के रूप में सहज रूप से देखा जा सकेगा। शुरुआत में रेल में भांप का इंजन होता था। उसके बाद डीजल इंजन आए। अब इलेक्ट्रिक इंजन हैं। जो रेलवे के क्रमिक विकास को इंगित करता है। रेलवे की धरोहर को पूरे देश की जनता देखेगी और इसके महत्व को समझेगी।

-- इतिहासकार डा. विनय कुमार डांगी, प्रोफेसर राजकीय महिला महाविद्यालय, मतलौडा-पानीपत।
स्टेशन पर बनाए जा रहे म्यूजियम में रेलवे की पुरानी घड़ी, पुराने इंजन की कलाकृति, लालटेन, सिग्नल में इस्तेमाल की जाने वाली पुराने जमाने की लाइट इत्यादि उपकरणों को रखा जाएगा। इससे रेलवे के अतीत का पता लगेगा। करनाल स्टेशन क्षेत्र में जो भी पुराने उपकरण हैं उन्हें सहेजेंगे।
- हरप्रीत सभ्रवाल, इंजीनियर, रेलवे विभाग, करनाल।
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