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Karnal News: दो हजार पेड़ नदी में बहने के बाद जागा विभाग
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बोली नदी के पानी में भूमि कटाव से जब जैतपुर गोहराबणी के जंगल के दो हजार पेड़ बह गए, तब वन विभाग के अफसरों की नींद टूटी। लेकिन जब तक नींद टूटी तब तक जंगल की भूमि तबाह हो चुकी थी। अफसरों की लापरवाही से जहां खैर के बेशकीमती व अन्य पेड़ नदी में बहे, वहीं सरकार के राजस्व को भी काफी नुकसान हुआ है। अफसरों ने बचाव कार्य करवाने के लिए आनन-फानन में प्रपोजल बनाकर उच्च अधिकारियाें को भेज दिया है। लेकिन यह तब संभव हुआ जब अमर उजाला ने इस मुद्दे को उठाया और प्रमुखता से छापा।
ग्रामीण आरिफ, नाजिम, फरीद, खालिद, अली अहमद, वाजिद, महबूब ने बताया कि 2018 में गांव के जंगल में लगभग 10 हजार पेड़ लगाए गए थे। जिससे जंगल हरा भरा हो गया था। वन विभाग हर वर्ष जंगल की सुरक्षा को लेकर बाढ़ बचाव कार्य करवाता था जिससे जंगल व साथ लगते गांव भी सुरक्षित रहते थे। लेकिन पिछले वर्ष वन विभाग द्वारा बाढ़ बचाव कार्य नहीं करवाए गए हैं। जिसका नुकसान सीधे तौर पर साथ लगते गांव व जंगल को हो रहा है।
जिला वन अधिकारी वीरेंद्र गिल ने जानकारी देते हुए बताया कि जैतपुर गोहराबणी में हुए नुकसान का जायजा लिया गया है। जंगल की सुरक्षा सर्वोपरि है। जंगल में कटाव की वजह से काफी नुकसान हुआ है। जंगल के साथ लगती नदी में कटाव को रोकने के लिए प्रपोजल बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। जल्द ही उच्च अधिकारियों की तरफ से स्वीकृति व फंड जारी होते ही जंगल के साथ-साथ रिटेनिंग वॉल का कार्य करवाया जाएगा। ताकि भविष्य में जंगल सुरक्षित रह सके और कटाव होने की वजह से पेड़ों का नुकसान न हो।
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ग्रामीण आरिफ, नाजिम, फरीद, खालिद, अली अहमद, वाजिद, महबूब ने बताया कि 2018 में गांव के जंगल में लगभग 10 हजार पेड़ लगाए गए थे। जिससे जंगल हरा भरा हो गया था। वन विभाग हर वर्ष जंगल की सुरक्षा को लेकर बाढ़ बचाव कार्य करवाता था जिससे जंगल व साथ लगते गांव भी सुरक्षित रहते थे। लेकिन पिछले वर्ष वन विभाग द्वारा बाढ़ बचाव कार्य नहीं करवाए गए हैं। जिसका नुकसान सीधे तौर पर साथ लगते गांव व जंगल को हो रहा है।
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जिला वन अधिकारी वीरेंद्र गिल ने जानकारी देते हुए बताया कि जैतपुर गोहराबणी में हुए नुकसान का जायजा लिया गया है। जंगल की सुरक्षा सर्वोपरि है। जंगल में कटाव की वजह से काफी नुकसान हुआ है। जंगल के साथ लगती नदी में कटाव को रोकने के लिए प्रपोजल बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। जल्द ही उच्च अधिकारियों की तरफ से स्वीकृति व फंड जारी होते ही जंगल के साथ-साथ रिटेनिंग वॉल का कार्य करवाया जाएगा। ताकि भविष्य में जंगल सुरक्षित रह सके और कटाव होने की वजह से पेड़ों का नुकसान न हो।
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