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डिलीवरी के दौरान बच्चे की मौत, अस्पताल में हंगामा
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
Updated Sat, 10 May 2014 09:30 PM IST
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बच्चे की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में जमकर बवाल काटा। परिजनों ने डाक्टर पर लापरवाही बरतने और अस्पताल में डिलीवरी के दौरान आवश्यक होने वाली सुविधाएं नहीं रखने का आरोप जड़ा है।
परिवार के लोगों ने डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। घटना सुबह करीब साढे़ छह बजे की बताई जा रही है। शहर के लाइनपार क्षेत्र के प्रेम नगर निवासी कमल कुमार ने बताया कि वह शुक्रवार को किसी काम से जालंधर गया था। उसकी पत्नी पायल उर्फ अंजना को डिलीवरी के लिए रात में करीब 12 बजे उसका बड़ा भाई सुनील कुमार और उसकी मां कमलेश रानी लेक र आईं। वह भी लगभग तीन बजे अस्पताल पहुंच गया था।
सुबह करीब साढे़ छह बजे बच्चा आधा पेट मेें था और आधा बाहर ऐसी हालत में डॉक्टर पूनम विरमानी ने उन्हें बताया कि वह बच्चे को नहीं बचा पाएंगी। थोड़ी देर में ही डॉक्टर ने मृत बच्चे को कपडे़ में लपेट कर उन्हें दे दिया। वह लोग आगबबूला हो गए। उन्होंने पहले बच्चे को दफनाया। इसके बाद सैकड़ों लोग विरमानी के अस्पताल पहुंच गए। आरोप है कि लोगों के अस्पताल पहुंचने की जानकारी होने पर डॉ. मनोज विरमानी अंडर ग्राउंड हो गया।
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लोगों ने अस्पताल में जमकर बवाल काटा। थाना सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंच गई। हालात पर नियंत्रण करने के लिए कई जिप्सियां मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने अस्पताल में ही परिजनों और वैद्य पूनम विरमानी से बात की। परिजनों ने सैकड़ों लोगों के सामने पूनम विरमानी पर लापरवाही बरतने और अस्पताल में सुविधा उपलब्ध नहीं कराने के लिए आरोप लगाया। पुलिस ने भी वैद्य पूनम विरमानी से भी कई सवाल जवाब किए। बाद में पुलिस परिजनों को लेकर थाना सिविल लाइन गई। परिजनों ने कहा था कि उन्हें डाक्टर के खिलाफ कार्रवाई चाहिए। परिजनों ने कहा कि उनका एक बच्चा इस डॉक्टर की लापरवाही के कारण करीब डेढ़ साल पहले भी मर चुका है।
नहीं की कोई लापरवाही
वैद्य पूनम विरमानी ने तमाम आरोप को नकारा है। उन्होंने कहा कि उनका अस्पताल आयुर्वेद पद्धति का है। वहां आपरेशन नहीं किया जाता है। सामान्य डिलीवरी कराई जाती है। कोई लापरवाही नहीं की गई है।
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परिवार के लोगों ने डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। घटना सुबह करीब साढे़ छह बजे की बताई जा रही है। शहर के लाइनपार क्षेत्र के प्रेम नगर निवासी कमल कुमार ने बताया कि वह शुक्रवार को किसी काम से जालंधर गया था। उसकी पत्नी पायल उर्फ अंजना को डिलीवरी के लिए रात में करीब 12 बजे उसका बड़ा भाई सुनील कुमार और उसकी मां कमलेश रानी लेक र आईं। वह भी लगभग तीन बजे अस्पताल पहुंच गया था।
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सुबह करीब साढे़ छह बजे बच्चा आधा पेट मेें था और आधा बाहर ऐसी हालत में डॉक्टर पूनम विरमानी ने उन्हें बताया कि वह बच्चे को नहीं बचा पाएंगी। थोड़ी देर में ही डॉक्टर ने मृत बच्चे को कपडे़ में लपेट कर उन्हें दे दिया। वह लोग आगबबूला हो गए। उन्होंने पहले बच्चे को दफनाया। इसके बाद सैकड़ों लोग विरमानी के अस्पताल पहुंच गए। आरोप है कि लोगों के अस्पताल पहुंचने की जानकारी होने पर डॉ. मनोज विरमानी अंडर ग्राउंड हो गया।
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लोगों ने अस्पताल में जमकर बवाल काटा। थाना सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंच गई। हालात पर नियंत्रण करने के लिए कई जिप्सियां मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने अस्पताल में ही परिजनों और वैद्य पूनम विरमानी से बात की। परिजनों ने सैकड़ों लोगों के सामने पूनम विरमानी पर लापरवाही बरतने और अस्पताल में सुविधा उपलब्ध नहीं कराने के लिए आरोप लगाया। पुलिस ने भी वैद्य पूनम विरमानी से भी कई सवाल जवाब किए। बाद में पुलिस परिजनों को लेकर थाना सिविल लाइन गई। परिजनों ने कहा था कि उन्हें डाक्टर के खिलाफ कार्रवाई चाहिए। परिजनों ने कहा कि उनका एक बच्चा इस डॉक्टर की लापरवाही के कारण करीब डेढ़ साल पहले भी मर चुका है।
नहीं की कोई लापरवाही
वैद्य पूनम विरमानी ने तमाम आरोप को नकारा है। उन्होंने कहा कि उनका अस्पताल आयुर्वेद पद्धति का है। वहां आपरेशन नहीं किया जाता है। सामान्य डिलीवरी कराई जाती है। कोई लापरवाही नहीं की गई है।